IAS Meenakshi Singh: ‘जातिवादी होना जरूरी’ बोलने वाली IAS अफसर मीनाक्षी सिंह कौन हैं? पति हैं MP के नेता
IAS Meenakshi Singh News: मध्य प्रदेश की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी मीनाक्षी सिंह का एक बयान इन दिनों जबरदस्त विवाद की वजह बना हुआ है। भोपाल के अंबेडकर पार्क में आयोजित अजाक्स संगठन के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज के समय में 'जातिवादी होना जरूरी' है। उनका यह बयान कैमरे में कैद हुआ और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो सामने आते ही सियासत गरमा गई और अलग-अलग समाज के संगठनों ने तीखी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। सवर्ण समाज के कई संगठनों ने इसे एक आईएएस अधिकारी के पद की गरिमा के खिलाफ बताया। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि एक प्रशासनिक अधिकारी से इस तरह की जातिगत टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जाती और यह समाज में विभाजन बढ़ा सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन हैं IAS अफसर मीनाक्षी सिंह?

🟡 Who is IAS Meenakshi Singh: कौन हैं मीनाक्षी सिंह?
मीनाक्षी सिंह 2013 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश कैडर से ताल्लुक रखती हैं। उनका जन्म 7 जून 1972 को हुआ था। वह राज्य सेवा से पदोन्नति के जरिए आईएएस बनीं। वर्तमान में वह आदिम जनजाति विभाग में उपसचिव के पद पर कार्यरत हैं।
इससे पहले वह डिप्टी सेक्रेटरी जैसे अहम पदों पर भी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। मीनाक्षी सिंह अजाक्स संगठन से भी जुड़ी रही हैं, जो अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकारियों-कर्मचारियों का संगठन माना जाता है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब अजाक्स संगठन पहले से ही विवादों में रहा है। हाल ही में इसी संगठन से जुड़े आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के एक आपत्तिजनक बयान पर बड़ा बवाल मचा था। उस मामले में सरकार ने वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया था और जांच के आदेश दिए थे। ऐसे में मीनाक्षी सिंह का बयान भी उसी कड़ी में जोड़कर देखा जा रहा है।
🟡 कौन हैं मीनाक्षी सिंह के पति नेता दामोदर यादव? (IAS Meenakshi Singh Husband)
मीनाक्षी सिंह के निजी जीवन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। उनके पति दामोदर यादव मध्य प्रदेश के चर्चित नेता हैं। वह पहले कांग्रेस में रहे, बाद में आजाद समाज पार्टी में शामिल हो गए। 2023 में उन्होंने सेंवढ़ा विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, हालांकि जीत नहीं सके।
दामोदर यादव खुद को अंबेडकरवादी और बहुजन नेता बताते हैं। वह भीम आर्मी से भी जुड़े रहे हैं और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के विरोध को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं।
स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक दामोदर यादव की दो शादियां हुई हैं। पहली पत्नी इंदरगढ़ में रहती हैं, जबकि दूसरी पत्नी मीनाक्षी सिंह हैं, जो भोपाल में रहती हैं। मीनाक्षी सिंह से उन्हें एक बेटा और एक बेटी हैं। यह पहलू भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
🟡 मीनाक्षी सिंह का जातिवाद वाल पूरा बयान
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मीनाक्षी सिंह कहती दिखती हैं कि समाज को जोड़ने के लिए सबसे पहली कड़ी परिवार होता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को यह बताना जरूरी है कि वे आदिवासी हैं, एससी समुदाय से हैं और उनकी जाति क्या है। उनका कहना था कि आज के दौर में जातिगत पहचान को समझना और उसे लेकर सजग रहना समय की जरूरत बन गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि जैसे सवर्ण समाज में लोग सरनेम देखकर एक-दूसरे का पक्ष लेते हैं, उसी तरह यह जातिगत चेतना हमारे लिए भी जरूरी है। अपने समाज के लोगों को पहचानना और उनकी मदद करना जरूरी है। यही बातें उनके बयान को लेकर विवाद की जड़ बन गईं।
🟡 सवर्ण संगठनों का विरोध, कार्रवाई की मांग
बयान वायरल होने के बाद सवर्ण समाज के कई संगठनों ने इसे एक आईएएस अधिकारी के पद की गरिमा के खिलाफ बताया। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि एक प्रशासनिक अधिकारी से इस तरह की जातिगत टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जाती और यह समाज में विभाजन बढ़ा सकती है।
इस पूरे विवाद पर मीनाक्षी सिंह का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे सीधे बात नहीं हो सकी। बताया गया कि हाल ही में उनकी सर्जरी हुई है और वह फिलहाल बातचीत की स्थिति में नहीं हैं। उनके परिवार की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मीनाक्षी सिंह ने अपने भाषण में यह भी कहा था कि कई बार आदिवासी और एससी समुदाय के लोग उनसे मिलने में झिझकते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों से बिना डर संवाद करने की अपील की, ताकि समाज के लिए मिलकर काम किया जा सके।
हालांकि, बयान का एक हिस्सा सामने आने के बाद पूरा फोकस 'जातिवादी होना जरूरी' वाले वाक्य पर टिक गया। अब सवाल यह है कि सरकार इस मामले को किस नजर से देखती है और क्या कोई प्रशासनिक कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल, यह बयान मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों में बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
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