कौन हैं हुमायूं कबीर? बाबरी मज्जिद की बुनियाद रखने के बाद अब ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने की खाई कसम
Who is Humayun Kabir: पश्चिम बंगाल में इन दिनों मुर्शिदाबाद के भरतपुर विधायक हुमायूं कबीर का नाम खूब चर्चा में है। बेलडांगा में बाबरी मस्जिद शिलान्यास करके हुमायूं कबीर का नाम सुर्खियों में है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अनुशासन समिति द्वारा पार्टी से निलंबित किए गए हुमायूं हैदर ने रविवार 7 दिसंबर को बड़ा ऐलान कर दिया है।
मस्जिद निर्माण की अपनी घोषणा के बाद निलंबित किए गए हुमांयु हैदान ने ममता बनर्जी पर पलटवार करते हुए उन्हें "आरएसएस का एजेंट" बताया। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा को लेकर 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी के गठन और एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ गठबंधन करने की घोषणा की है।

कबीर ने घोषणा की है कि उनकी यह नई पार्टी राज्य की 135 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसकी औपचारिक घोषणा 22 दिसंबर को होगी। इसके साथ ही, उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया है।

135 सीटों पर चुनाव लड़ने का क्यों किया फैसला?
आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए कबीर ने अपनी चुनावी योजना का खुलासा कारते हुए दावा किया कि राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी 42 प्रतिशत से लेकर 82 प्रतिशत तक है, जो उनकी इस चुनावी रणनीति का अहम आधार है। इनके अनुसार, इन उच्च मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों से लगभग 90 सीटें बनती हैं। शेष 45 सीटों को मिलाकर, उनका कुल चुनावी लक्ष्य 135 सीटों का है।
हुमायूं ने किया दावा- ममता की TMC का वोट बैंक जल्द खत्म हो जाएगा
हुमायूं कबीर ने आगे कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार हैं। ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा, "तृणमूल का मुस्लिम वोट बैंक जल्द खत्म हो जाएगा, पिक्चर अभी बाकी है।" उन्होंने दावा किया कि अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में उनका यह कदम राज्य की राजनीति में "गेमचेंजर" साबित होगा और तृणमूल अपनी अगली सरकार नहीं बना पाएगी। जानिए आखिर हुमायूं कबीर कौन हैं?
कौन हैं हुमायूं कबीर?
भरतपुर से विधायक कबीर रेजिनगर के एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मुर्शिदाबाद की राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कबीर कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी के करीबी सहयोगी के तौर पर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और 2009 से कांग्रेस की मुर्शिदाबाद इकाई के महासचिव भी रहे। इसके बाद कांग्रेस से टीएमसी में चले गए।
हुमायूं कबीर का राजनीतिक करियर
- 2011 में हुमायूं कबीर ने कांग्रेस के टिकट पर रेजिनगर से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने।
- 2012 में अधीर रंजन चौधरी से मतभेद होने पर वे टीएमसी में शामिल हो गए और विधायक पद से त्यागपत्र दिया, इसी वर्ष उपचुनाव हुआ और ये हार गए।
- 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में टीएमसी ने उन्हें छह साल के लिए निलंबित कर दिया था।
- टीएमसी से निलंबन के बाद, कबीर 2018 में भाजपा में शामिल हुए और 2019 के लोकसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद सीट से चुनाव लड़े लेकिन हार गए।
- 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले टीएमसी में शामिल हुए और भरतपुर से विधायक चुने गए।
हुमायूं कबीर का विवादों से है पुराना नाता
हुमायूं कबीर अपने तीखे और कई बार सांप्रदायिक कहे जाने वाले बयानों के लिए पहले भी विवादों में घिरे रहे हैं! अप्रैल 2025 में वक्फ बिल के मुद्दे पर मुर्शिदाबाद में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान भी उनके बयानों को लेकर काफी हंगामा हुआ था।












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