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कौन हैं कैप्टन जोया अग्रवाल ? Air India की पहली पायलट जिन्होंने North Pole के ऊपर से भरी सबसे लंबी उड़ान

नई दिल्ली-ऑल वीमेन कॉकपिट क्रू (all women cockpit crew ) ने दुनिया की सबसे लंबी एयर रूट अमेरिका के सैन फ्रांसिसको से बंगलुरु के लिए उड़ान भरी है। इस ऐतिहासिक एयरक्राफ्ट को कैप्टन जोया अग्रवाल (Captain Zoya Aggarwal)कमांड कर रही हैं। इनके बारे में नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri)ने ट्वीट कर जानकारी दी है- 'अब लड़कियां रास्ता तय कर रही है! प्रोफेशनल, क्वालिफाइड और कॉन्फिडेंट- ऑल वीमेन कॉकपिट क्रू वाली एयर इंडिया (Air India) की फ्लाइट सैन फ्रांसिसको (San Francisco) से बंगलुरु(Bengaluru) के लिए एउड़ान भर चुकी है, जो नॉर्थ पोल के ऊपर से गुजरेगी। हमारी नारी शक्ति ने सबसे पहले एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।'

ऐतिहासिक हवाई सफर पर 'भारत की बेटियां'

ऐतिहासिक हवाई सफर पर 'भारत की बेटियां'

एयर इंडिया की ऑल वीमेन कॉकपिट क्रू ने नॉर्थ पोल (North Pole) के ऊपर से दुनिया की सबसे लंबी एयर रूट सैन फ्रांसिसको (San Francisco) से बंगलुरु(Bengaluru) के लिए उड़ान भरी है, जो सोमवार को लैंड करेगी। यह फ्लाइट करीब 14,000 किलोमीटर की दूरी नॉन-स्टॉप तय करेगी। यात्रा शुरू करने से पहले इस फ्लाइट की कमांडर कैप्टन जोया अग्रवाल (Captain Zoya Aggarwal)ने कहा कि वो बहुत उत्साहित हैं और इतिहास बनाने जा रही हैं। इंडिया टुडे टीवी से बातचीत में जोया अग्रवाल ने कहा, 'मैं इतिहास बनाने के लिए काफी उत्सुक हूं। मैं बहुत ही ज्यादा उत्साहित हूं। कल हम हर तरह का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं। मैं इसके बारे में सोचकर बहुत ही रोमांचित हो रही हूं।'

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    Zoya Aggarwal: Air India की पहली Pilot जिन्होंने North Pole के ऊपर से भरी उड़ान | वनइंडिया हिंदी
    पिछले साल ही रचा जाना था इतिहास

    पिछले साल ही रचा जाना था इतिहास

    एयर इंडिया की इस ऐतिहासिक फ्लाइट को उड़ाने में कैप्टन जोया अग्रवाल का साथ दे रही हैं कैप्टन थनमई पापागारी, कैप्टन अकांक्षा सोनावारे और कैप्टन शिवानी मनहास। इनके अलावा इस फ्लाइट में एयर इंडिया की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (फ्लाइट सेफ्टी) कैप्टन निवेदिता भसीन भी सफर कर रही हैं। कैप्टन जोया ने कहा, 'हमें यह पिछले साल ही कर दिखाना था, लेकिन दुर्भाग्य से खराब मौसम ( bad weather) की वजह से यह हो नहीं सका। कई लोगों के लिए यह बहुत ही पुराना सपना है। उम्मीद है कि कल हम इस सपने को सच्चाई में बदलने जा रहे हैं। हम जा रहे हैं और भगवान ने चाहा तो यह पूरा होगा। '

    दो सिलिकन वैली के बीच का ऐतिहासिक सफर

    दो सिलिकन वैली के बीच का ऐतिहासिक सफर

    इस उड़ान की खासियत के बारे में उन्होंने बताया कि , 'ध्रुवीय उड़ान (Polar flight) एक आधार पर पहले भी किया गया है, लेकिन यह पहली बार है कि क्रू में सारी महिलाएं हैं। 'भारत की बेटियां' अमेरिका के सिलिकन वैली (Silicon Valley) से भारत की सिलिकन वैली (Silicon Valley of India) तक उड़ान भर रही हैं। ' उन्होंने बताया कि 'अभी भी हम लंबी दूरी की उड़ान भरते हैं। मसलन, अटलांटिक महासागर के ऊपर से और वापस की यात्रा या फिर प्रशांत महासागर के ऊपर से और फिर अटलांटिक के ऊपर से वापस आना। इसमें कई तरह के बदलाव करने पड़ते हैं। लेकिन, उत्तरी ध्रुव के ऊपर से उड़ान भरना अपने आप में अलग बात है। कितने लोगों ने उत्तरी ध्रुव (North Pole) को देखा है? मैं अपने आपको खुशनसीब समझ रही हूं कि उस हवाई जहाज को कमांड करूंगी और उत्तरी ध्रुव को ऊपर से देखूंगी और उसके ऊपर से दूसरी तरफ जाऊंगी! यह एवियेशन के इतिहास में नया अध्याय रचा जाने वाला है।'

    Boeing 777-200 LR हवाई जहाज का इस्तेमाल

    Boeing 777-200 LR हवाई जहाज का इस्तेमाल

    उनके मुताबिक करीब 17 घंटे की यह उड़ान सैन फ्रांसिसको से बंगलुरु तक की सबसे तेज संभव रूट पर तय किया गया है। उनके मुताबिक दुनिया की एक लंबी उड़ान होने के बावजूद भी अटलांटिक और प्रशांत के ऊपर से गुजरने वाली इतनी ही दूरी की दूसरी उड़ानों के मुकाबिले इसमें इंधन की भी कम खपत होगी। एयर इंडिया के मुताबिक इस ऐतिहासिक उड़ान के लिए जिस बोइंग 777-200एलआर हवाई जहाज का इस्तेमाल हो रहा है, उसमें 238 यात्रियों के बैठने की जगह है और यह पूरी तरह से भरा हुआ है। कैप्टन जोया ने भी इस हवाई जहाज की तारीफ करते हुए बताया है कि ग्लोब के दो भिन्न कोणों की यात्रा करने में यह विमान सक्षम है।

    बहुत ही सीनियर पायलट हैं जोया अग्रवाल

    बहुत ही सीनियर पायलट हैं जोया अग्रवाल

    कैप्टन जोया अग्रवाल बहुत ही सीनियर पायलट हैं और उनके पास 8,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है। जबकि, बतौर कमांडर बी-777 हवाई जहाज उड़ाने का उनके पास 10 साल से ज्यादा और 2,500 घंटे से ज्यादा उड़ान घंटे का अनुभव है। जोया कहती हैं, 'जब मैंने एयर इंडिया ज्वाइन किया था, तब मैं बहुत कम महिला पायलटों में से एक थी। सभी लोग बच्चे की तरह देखते थे, लेकिन बहुत सहयोग करते थे। बहरहाल, यह पुरुषों के दबदबे वाला ही फिल्ड है। आपको कड़ी मेहनत करनी है, लेडी पायलट होने की वजह से नहीं, बल्कि पायलट होने की वजह से क्योंकि यह बहुत ही जिम्मेदारी वाला काम है।'

    माता-पिता की अकेली संतान हैं जोया

    माता-पिता की अकेली संतान हैं जोया

    जोया अपने माता-पिता की अकेली संतान हैं। उन्हें आज भी याद है कि जब उन्होंने पहली बार घर में बताया था कि वह पायलट बनना चाहती हैं तो उनकी मां डर से कैसे रो पड़ी थीं। लेकिन,जल्द ही वह बदल गईं। उन्होंने कहा कि वह पिछले 8 साल से कमांडर की भूमिका निभा रही हैं और यह बहुत ही जबर्दस्त यात्रा रही है। '2013 में जब मैं कैप्टन बनी तो मेरी मां फिर से रो पड़ी थीं, लेकिन इस बार खुशी की वजह से रोई थीं।'

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