WHO चीफ ने चीन से फिर किया अनुरोध, कहा-'बताए कैसे और कहां से फैला कोरोना'

चीन में एक फिर कोरोना वायरस का विस्फोट हो गया है। जिसकी वजह से दुनिया के सभी देशों की टेंशन बढ़ गई है। इसी बीच WHO ने फिर से चीन से कोरोना का डाटा और इसके उत्पत्ति के बारे में जानकारी देने का अनुरोध किया है।

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कोरोना वायरस का पहला मरीज 2020 में चीन के वूहान में मिला था। तब से ही चीन पर कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने का आरोप लग रहा है। लेकिन चीन की तरफ से हमेशा इस वायरस को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया ही दी गई है। वहीं, जब कोरोना पूरी दुनिया में खात्मे के कगार पर था, तब चीन में फिर इससे संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी हैं और श्मशान घाटों पर लाशों की अंबार लग गई है। इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने फिर चीन से कोरोना के सही आंकड़े बताने की अपील की है।

बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशकटेड्रोस अधानोम ने चीन से सही आंकड़े देने और इसके उत्पत्ति के बारे में जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि "कोविड-19 के बाद की स्थिति की हमारी समझ में अंतराल का मतलब है कि हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि संक्रमण के दीर्घकालिक परिणामों से पीड़ित लोगों का इलाज कैसे किया जाए? इस महामारी की शुरुआत कैसे हुई, इस बारे में हमारी समझ में अंतराल भविष्य की महामारियों को रोकने की हमारी क्षमता प्रभावित कर रही हैं।

ऐसे में हम चीन से डेटा साझा करने का अनुरोध कर रहे हैं। इसको लेकर हम पहले भी चीन अनुरोध कर चुके हैं। इसके अलावा टेड्रोस ने चीन में फिर से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को लेकर चिंता भी व्यक्त की। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि जमीन पर स्थिति का व्यापक जोखिम मूल्यांकन करने के लिए, डब्ल्यूएचओ को रोग की गंभीरता, अस्पताल में भर्ती और गहन देखभाल इकाइयों के समर्थन की आवश्यकताओं के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी की आवश्यकता है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा चीन के वुहान में इसके उद्भव के तीन साल बाद कैसे SARS-CoV-2 सांस से संबंधित एक गंभीर बीमारी बना आज भी बहस का मुद्दा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने वायरस की उत्पत्ति पर दो प्रमुख सिद्धांतों को सामने रखा है। पहला सिद्धांत यह है कि SARS-CoV-2 एक प्राकृतिक जूनोटिक स्पिलओवर का परिणाम है। दूसरा सिद्धांत यह है कि वायरस ने एक शोध से संबंधित घटना के परिणामस्वरूप मनुष्यों को संक्रमित किया।

पिछले हफ्ते WHO प्रमुख ने कहा कि उन्हें "उम्मीद" है कि अगले साल COVID-19 महामारी को अब वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं माना जाएगा। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले साल किसी बिंदु पर, हम यह कहने में सक्षम होंगे कि सीओवीआईडी ​​-19 अब वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं है।

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