चीन में कोरोना का BF.7 वेरिएंट मचा रहा है तबाही, जानें यह क्या है और इससे बचना मुश्किल क्यों है ?
चीन में कोविड का BF.7 वेरिएंट फैल रहा है। यह ओमिक्रॉन का सब-वेरिएंट है। वहां की आबादी में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है, जिसके चलते संकट गहरा चुका है। इसे एक बहुत ही संक्रामक वेरिएंट भी पाया गया है।

चीन में जिस रफ्तार से कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, उससे लग रहा है कि वहां किसी के भी इसकी चपेट में आने से बचना मुश्किल हो चुका है। वहां जो कोविड वेरिएंट का इंफेक्शन फैला है, वह ओमिक्रॉन वेरिएंट का ही एक सब-वेरिएंट है। गौरतलब है कि मौजूदा साल की शुरुआत में भारत में भी ओमिक्रॉन ने बहुत बड़ी जनसंख्या को संक्रमित किया था। वैक्सीन की दो-दो डोज लगवा चुके लोग भी इंफेक्टेड हुए थे। लेकिन, चीन की बड़ी आबादी उम्रदराज है। इसलिए उसपर संकट बड़ा है। यही नहीं वहां ओमिक्रॉन के जिस सब-वेरिएंट BF.7 की लहर चल रही है और बहुत ही ज्यादा संक्रामक भी है।
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चीन में कोरोना का BF.7 वेरिएंट मचा रहा है तबाही
चीन में इस समय कोरोना वायरस जो तबाही मचा रहा है, उसके पीछे कोविड-19 के ओमिक्रॉन वेरिएंट के सब-वेरिएंट BF.7 का संक्रमण माना जा रहा है। यही वायरस पूरे देश में घूम रहा है और लगता है कि इसकी चपेट में आने से बचना बहुत मुश्किल हो गया है। मसलन, बीजिंग में एक भारतीय अखबार के लिए काम करने वाले पत्रकार अनंत कृष्णन ने ट्विटर पर लिखा है कि 'कोविड की कई लहरें देखी गई हैं- 2020 के शुरू में चीन में 20-21 में भारत में और 2022 में हॉन्गकॉन्ग में, लेकिन चीन में इस समय जितनी तेजी से फैल रहा है, ऐसा नहीं दिखा है। पहली बार मैं जिसे जानता हूं, उन सबको हो चुका है- एक ही साथ। आखिरकार मुझे भी पकड़ चुका है। आने वाले हफ्तों में मेडिकल सिस्टम पर अप्रत्याशित दबाव पड़ने वाला है।'

चीन में फैले BF.7 वेरिएंट के बारे में क्या पता है ?
ऐसा नहीं है कि ओमिक्रॉन का यह सब-वेरिएंट पहली बार सामने आया है। अक्टूबर में यह अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में देखा जा चुका है और इसके फैलने के बाद बाकी सारे वेरिएंट गायब ही हो गए थे। BF.7 से पहले भी ओमिक्रॉन के कई सब-वेरिएंट सामने आ चुके हैं। इसी महीने 'सेल होस्ट एंड माइक्रोब' जर्नल में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक BF.7 वुहान से निकलने मूल कोरोना वायरस के मुकाबले 4.4 गुना ज्यादा संक्रामक है। मतलब प्रयोगशाला की स्थिति में वैक्सीन से या संक्रमण की वजह से लोगों में जो एंटीबॉडी तैयार हुई है, वह वुहान वाले वायरस की तुलना में BF.7 के खिलाफ कम प्रभावी पाए गए थे। हालांकि, ओमिक्रॉन का ही एक और सब-वेरिएंट BQ.1 इसी शोध में 10 गुना ज्यादा संक्रमाक पाया गया था।

चीन में फैले BF.7 की ज्यादा संक्रामकता का मतलब क्या है ?
वायरस के ज्यादा संक्रामक होने का अर्थ यह है कि यह आबादी में ज्यादा संख्या में फैल सकता है और दूसरे प्रभावी वेरिएंट की जगह ले सकता है। अक्टूबर में BF.7 के केस अमेरिका में 5% से ज्यादा और यूके में 7.26% पाए गए थे। तब मेडिकल एक्सपर्ट इस वेरिएंट पर सख्त निगरानी रख रहे थे। लेकिन, वहां इसकी वजह से कोविड के मामलों में कोई अप्रत्याशित वृद्धि नहीं हुई थी और ना ही अस्पतालों में भर्ती ही बढ़ी थी।

क्या BF.7 भारत में भी फैल रहा है ?
दिसंबर 2021 और जनवरी 2022 में भारत में कोरोना की जो लहर आई थी, उसके लिए ओमिक्रॉन सब-वेरिएंट BA.1 और BA.2 जिम्मेदार थे। इसके बाद जो BA.4 और BA.5 वेरिएंट आए, वह भारत में ज्यादा नहीं फैले, इसलिए अपने देश में BF.7 (जो कि BA.5 का ही एक ऑफशूट है) के अबतक कुछ ही मामले देखे गए हैं। भारत के नेशनल SARS-CoV-2 जीनोम सिक्वेंसिंग नेटवर्क के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में देश में जितने भी कोरोना केस थे, उसमें BA.5 के सिर्फ 2.5% थे। हालांकि, चीन में मामले बढ़ने के बाद गुजरात के वडोदरा में एक एनआरआई महिला में BF.7 की पुष्टि ने टेंशन जरूर बढ़ा दी है। वैसे नवंबर में देश में सबसे ज्यादा XBB वेरिएंट के मामले थे, जिनकी संख्या कुल मामलों में 65.6% थी।

चीन के लिए BF.7 क्यों बन गया है आफत ?
एक्सपर्ट मानते हैं कि चीन में जिस तरह से BF.7 का संक्रमण भयावह रूप से फैला है, उसकी वजह इसकी हाइयर ट्रांसमिसिबिलिटी या इम्यून इवेसिव्नेस नहीं है। बल्कि, चीन में इसके मामले इसलिए अप्रत्याशित रूप से बढ़े हैं, क्योंकि वहां के लोगों में शायद जीरो-कोविड पॉलिसी की वजह से स्वाभाविक इम्यूनिटी का अभाव है। भारत के कोविड-19 जीनोम सिक्वेंसिंग कंसोर्टियम INSACOG के पूर्व प्रमुख डॉक्टर अनुराग अग्रवाल का कहना है, 'चीन वैसे ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों का अनुभव कर रहा है, जिसका सामना दूसरे देश पहले ही कर चुके हैं और ठीक उसी तरह जैसे कि पाबंदियां कम करने के बाद हॉन्गकॉन्ग ने देखा था।' दूसरी तरफ वहां भारत के मुकाबले आबादी में बुजुर्गों की संख्या भी अधिक है।

ओमिक्रॉन से हम कैसे बचे थे ?
उनके मुताबिक, 'हमारे लिए ओमिक्रॉन हल्का था, क्योंकि यहां की जनसंख्या पहले के संक्रमण और वैक्सिनेशन की वजह से सुरक्षित थी। इसके अलावा हम लोग पहले ही इसकी कीमत चुका चुके हैं, जैसे कि डेल्टा लहर के दौरान (अप्रैल-मई 2021 में)। लोग मरे, लेकिन जो बच गए उनकी इम्यूनिटी अच्छी थी। इसके अलावा ओमिक्रॉन मुख्यतौर पर बुजुर्गों को मार रहा है और हमारे पास आबादी युवा है।' यही वजह है कि ज्यादा तेजी से फैलने के बावजूद भारत में ओमिक्रॉन सर्दी, बुखार, खांसी और गले में खराश तक सीमित होकर रह गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डैशबोर्ड के मुताबिक चीन में भी काफी वैक्सिनेशन हो चुकी है। लेकिन, उसने शुरू में ही मूल वायरस के खिलाफ यह तैयार की थी। भारत में दो डोज ले चुके लोगों को भी ओमिक्रॉन ने संक्रमित किया था। पहले के संक्रमण से प्राप्त इम्यूनिटी, वैक्सीन और युवा जनसंख्या ने शायद इसकी रक्षा करने में मदद की थी।












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