Monkeypox पर WHO का बड़ा फैसला, घोषित किया ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
नई दिल्ली, 23 जुलाई: कोरोना वायरस अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हुआ था कि अब पूरी दुनिया मंकीपॉक्स को लेकर परेशान है। इसकी गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया, जिसके तहत इस वायरस को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया गया। इसको लेकर WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की और इस बीमारी से जुड़ी सारी जानकारियां दुनिया के साथ साझा कीं।

डॉ. टेड्रोस ने कहा कि एक महीने पहले उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत आपातकालीन कमेटी की मीटिंग बुलाई थी। इसमें इस बात पर चर्चा की गई कि क्या मंकीपॉक्स को लेकर दुनियाभर में इमरजेंसी के हालात हैं। वैसे तो इसमें एक्सपर्ट्स के विचार अलग-अलग थे। इस वजह से उस वक्त ये फैसला टाल दिया गया। डॉ. टेड्रोस के मुताबिक पिछली मीटिंग के वक्त दुनिया के 47 देशों में 3040 केस सामने आए थे जबकि अब ये आंकड़ा 75 देशों में 16 हजार का हो गया है। इसके अलावा इससे 5 लोगों की मौत भी हुई।
WHO चीफ के मुताबिक उन्होंने 5 चीजों पर विचार किया, इसके बाद मंकीपॉक्स को इमरजेंसी घोषित करने का फैसला लिया गया। वो 5 कारण ये हैं-
- मंकीपॉक्स वायरस उन देशों में तेजी से फैला है, जहां पर इसको पहले नहीं देखा गया था।
- अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत किसी भी वायरस या बीमारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के लिए तीन मानक हैं, मंकीपॉक्स ने उनको पूरा किया।
- आपातकालीन समिति की सलाह, जिस पर आम सहमति नहीं बन पाई।
- वैज्ञानिक सिद्धांत, साक्ष्य और अन्य जानकारी जो वर्तमान में अपर्याप्त हैं और हमें कई अज्ञात चीजों के साथ छोड़ देती हैं।
- मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रसार की आशंका।
कैसे फैलता है ये वायरस?
WHO के मुताबिक मंकीपॉक्स संक्रमित जानवर के खून, पसीने या फिर घाव के संपर्क में आने से फैलता है। अभी तक अफ्रीका में गिलहरियों और चूहों के भी मंकीपॉक्स से संक्रमित होने के सबूत मिले हैं। वैज्ञानिकों ने जांच में पाया कि इसके इंसानों से इंसानों में फैलने के कम मामले सामने आए हैं। समलैंगिक और बायसेक्शुअल लोगों को खतरा ज्यादा है, क्योंकि ये सेक्स से भी फैल सकता है।












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