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जब लालू के रवैये पर भड़के प्रणब दा ने कर दिया था ये ऐलान

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शांतचित्त और विद्वान नेता थे। आमतौर पर वे गुस्सा नहीं होते थे। लेकिन एक बार वे लालू यादव के रवैया से इतना खफा हुए कि उनके सब्र का पैमाना छलक गया। उन्होंने दो टूक कहा दिया था कि लालू यादव का अब किसी भी सरकार में शामिल होना मुश्किल है। प्रणब दा का कहा सच हुआ था। 2009 में जब यूपीए-2 की सरकार बनी तो लालू यादव को सरकार में शामिल नहीं किया गया। मनमोहन सरकार को लालू के समर्थन की जरूरत नहीं थी। फिर भी सकुचाए लालू यादव ने बिना मांगे ही समर्थन दे दिया। उस समय कांग्रेस के मन में लालू को लेकर गहरी नाराजगी थी। लालू यादव सफाई देते रहे लेकिन कांग्रेस का दिल नहीं पसीजा। आखिर ऐसा क्या हुआ था कि प्रणब दा लालू पर नाराज हो गये थे?

जब लालू पर भड़के थे प्रणब दा

जब लालू पर भड़के थे प्रणब दा

2004 के लोकसभा चुनाव के बाद जब मनमोहन सिंह की पहली सरकार बनी तो लालू यादव उसमें शामिल हुए। उनके 24 सांसद थे इसलिए पूछ थी। लालू यादव रेल मंत्री बनाये गये। वे साढ़े चार साल तक कांग्रेस के साथ दोस्ती निभाते रहे। लेकिन 2009 में चुनाव के ठीक पहले लालू का रवैया बदल गया। वे कांग्रेस पर हमलावर हो गये। बिहार में सीट बंटवारे के मुद्दे पर लालू ने कांग्रेस को अपमानित किया। लालू ने कांग्रेस से गठबंधन तोड़ लिया और रामविलास पासवान से हाथ मिला लिया। अप्रैल 2009 की एक चुनावी सभा में लालू ने कहा, बाबरी विध्वंस के लिए कहीं न कहीं कांग्रेस भी जिम्मेवार है क्योंकि कांग्रेस के राज में ही ताला खुला था। लालू के इस बयान से कांग्रेस तिलमिला गई। उस समय प्रणब मुखर्जी विदेश मंत्री थे। उन्होंने लालू के खिलाफ मोर्चा संभाला। प्रणब दा ने भी एक चुनावी सभा में लालू से हिसाब बराबर कर लिया। उन्होंने कहा, लालूजी की सरकार बनाने की बात तो दूर की है, अब उनका किसी सरकार में शामिल होना भी मुश्किल है।

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    क्या थी नाराजगी की वजह?

    क्या थी नाराजगी की वजह?

    लोकसभा चुनाव के समय सीट बंटवारे को लेकर राजद ने कांग्रेस की खूब उपेक्षा की थी। कांग्रेस ने 40 में से केवल आठ -दस सीटें मांगी थी। लेकिन राजद को यह भी मंजूर न हुआ। लालू और रामविलास ने कांग्रेस के लिए केवल तीन सीटें छोड़ीं। कांग्रेस को ये अपमानजनक ऑफर मंजूर न हुआ। तब कांग्रेस ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। प्रणब दा ने चुनावी सभा में लालू पर अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा, वे हमारे साथ पांच साल तक सरकार में रहे। हम उनकी इज्जत करते थे। लेकिन चुनाव के समय उन्होंने कांग्रेस के साथ जो वर्ताव किया उससे हमें बहुत तकलीफ हुई है। हमने उनसे ज्यादा सीटें नहीं मांगी थी फिर भी उन्होंने नहीं दी। यहां तक कि इसके बारे में कोई बातचीत भी नहीं की।

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    यूपीए-2 से लालू की छुट्टी

    यूपीए-2 से लालू की छुट्टी

    2009 के लोकसभा चुनाव में लालू को जोर का झटका लगा। राजद के केवल चार सांसद चुने गये। यहां तक कि रामविलास पासवान खुद चुनाव हार गये। कांग्रेस को 206 सीटें मिलीं और उसने अपने सहयोगी दलों के साथ 262 का आंकड़ा जुटा लिया। उसे बहुमत के लिए सिर्फ 10 सांसदों के समर्थन की जरूरत थी। अन्य दलों के सहयोग से कांग्रेस बहुमत जुटा लिया। कांग्रेस को लालू के समर्थन की जरूरत ही नहीं पड़ी। लालू यादव के लिए असहज स्थिति हो गयी। जिस कांग्रेस को भाव नहीं दे रहे ते उसे बिहार में 2 सीटें मिलीं। खुद को मजबूत मानने वाले राजद को कांग्रेस से सिर्फ दो सीटें ही अधिक मिलीं। कांग्रेस से झगड़ा करना लालू के महंगा पड़ गया। अंत में लाज बचाने के लिए उन्होंने बिना मांगे ही कांग्रेस को समर्थन दे दिया। लेकिन कांग्रेस पर कोई असर नहीं पड़ा प्रणब मुखर्जी की बात सच साबित हुई। मनमोहन सिंह की दूसरी बार सरकार बनी लेकिन लालू को इसमें शामिल नहीं किया गया। वे लाख सफाई देते रहे कि उन्होंने कांग्रेस या सोनिया गांधी के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा, लेकिन बात नहीं बन पायी।

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    English summary
    When Pranab Mukherjee made an announcement on Lalu yadav's attitude
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