जब चांद की मिट्टी ने ले ली होती अंतरिक्ष यात्री की जान, 1 चम्मच 'मून डस्ट' कुछ मिनटों में छीन सकती है जिंदगी
भारत के चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक सफल लैंडिग कर इतिहास रच दिया था। सालों पहले 1969 में अमेरिका ने भी चांद पर मनुष्यों की सफल लैंडिग कराकर इतिहास रचा था।
अमेरिका के मिशन अपोलो-11 के जरिए तीन लोगों को चांद पर भेजा गया था। जिनमें नील आर्मस्ट्रांग चांद पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने थे। अपोलो मिशन मानव जाति के इतिहास के सबसे अहम मिशन में से एक था। क्रू चांद से अपने साथ मून डस्ट लेकर आया था।

कहा जाता है कि, मून डस्ट मानव को लिए बहुत ही खतरनाक है। जो किसी मनुष्य को कुछ मिनटों में मार सकती है। खैर, 24 जुलाई 1969 को जब अपोलो मिशन का क्रू धरती पर लौटा तो अपने साथ चांद की मिट्टी यानि की मून डस्ट भी लेकर आया था। लेकिन जब उन डिब्बों को खोला गया तो साइंटिस्ट देखकर दंग रह गए।
नासा की ओर से अपोलो क्रू को मून डस्ट लाने के लिए स्पेशल कंटेनर दिए गए थे। जोकि एल्युमिनियम धातु के बने हुए थे। जिन्हें भरने के बाद सील किया जा सकता था। चांद के लो प्रेशर को ध्यान में रखकर बनाए गए इन कंटेनरों में वे 50 पाउंड यानि करीब 22 किलो चांद की मिट्टी लेकर आए थे।
क्रू के धरती के लैंड करने के बाद इन कंटेनरों में भरी मिट्टी को जांच के लिए लैब ले जाया गया। लैब में जब इन सील पैक कंटेनरों को खोला गया। तो वैज्ञानिकों को जो दिखा वह हैरान कर देने वाला था। इन डिब्बों में लाई गई मून डस्ट पूरी तरह से बर्वाद हो चुकी थी। विशेष तौर पर डिजाइन किए गए ये कंटेनर मिट्टी को सुरक्षित रखने में नाकाम रहे।
लैब में जब इन डिब्बों को खोला गया तो उसमें पिसा हुए शीशे जैसे पाउडर मिला। टेस्ट में वैज्ञानिकों को सिलिका और आयरन जैसी मेटल की मौजूदगी उस मिट्टी में मिली थी। मून डस्ट का निर्माण चांद की सतह पर लाखों उल्का पिंड के टकराने के कारण हुई है। यहां की मिट्टी में हवा और पानी की मौजूदगी नहीं है।
चांद पर हवा और पानी ना होने के चलते वहां की मिट्टी बहुत की खतरनाक है। एक शोध के मुताबिक चांद की मिट्टी इतनी जानलेवा होती है कि अगर यह इंसान के शरीर में एक चम्मच चली जाए तो 90 फीसदी फेफड़ों को कुछ मिनट के अंदर खराब कर सकती है। इसका उदाहरण साल 1972 में देखने को मिला था।
जब मून मिशन पर गए एक अंतरिक्ष यात्री हैरिसन स्मिट की जान पर इस मिट्टी की वजह से आफत बन आई थी। चांद पर घूमने के बाद हैरिसन स्मिट जब अपने अंतरिक्ष यान में वापस आए, तो उनके स्पेस शूट में मून डस्ट चिपककर अंदर आ गई। गलती से सांस के साथ वह उनके शरीर के अंदर चली गई। मिट्टी के अंदर जाने के कुछ सेकेंड के बाद ही उनकी आंखें लाल हो गईं और उनकी नाक से पानी बहने लगा। उनकी हालत बुरी तरह खराब हो गई। बड़ी मशक्कत के बाद उनकी जान बच पाई थी। हैरिसन चांद की सतह पर चलने वाले अभी तक आखिरी इंसान हैं।
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