महिला जज को बार-बार 'सर' कहता रहा वकील, जस्टिस रेखा पल्ली के जवाब से हुई बोलती बंद
नई दिल्ली, 17 फरवरी। किसी भी बड़े पद पर महिलाओं का पहुंचना उस समाज में महिलाओं को मिल रहे समान अवसर को दर्शाता है। ऐसे में जब कोई महिला उस बड़े पद पर पहुंचती है तो उसे पुरुषों के बराबर ही सम्मान का अधिकार है। लेकिन जब पुरुष प्रधान समाज इस बात को स्वीकार नहीं करता है और यह भूल जाता है कि महिलाएं भी इस पद के लिए समान रूप से अधिकृत हैं। कुछ इसी तरह की घटना दिल्ली हाई कोर्ट में सामने आई है, जहां पर महिला जज ने वकील को याद दिलाया कि यह कुर्सी सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं है।

जब जज ने टोका तो वकील ने कही ये बात
दरअसल जस्टिस रेखा पल्ली जब दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को एक केस की सुनवाई कर रही थीं तो केस में पैरवी कर रहे वकील लगातार उन्हें सर कहकर संबोधित कर रहे थे। जिसके बाद जस्टिस रेखा पल्ली ने इसपर आपत्ती जताते हुए कहा कि मैं सर नहीं हूं, उम्मीद है कि आप ये समझें। जज की इस बात पर वकील ने कहा कि मैं आपसे माफी चाहता हूं लेकिन यह इसलिए हो रहा है क्योंकि आप उस कुर्सी पर बैठी हैं।

जस्टिस पल्ली ने पढ़ाया समानता का पाठ
वकील के इस जवाब को सुनकर जस्टिस रेखा पल्ली ने वकील को याद दिलाया कि यह कुर्सी सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं बनी है। उन्होंने कहा कि मैं इस कुर्सी पर बैठी हूं और यहां पर सिर्फ सर बैठते हैं यह कोई बहाना नहीं है। इससे भी बदतर क्या हो सकता है कि आपको यह लगता है कि यह कुर्सी सिर्फ सर लोगों के लिए है। अगर आपके जैसा युवा सदस्य इस तरह का भेदभाव नहीं खत्म कर सकता है तो मुझे भविष्य में क्या उम्मीद होगी।

देश में महिला जजों का अनुपात
गौर करने वाली बात है कि भारत में न्यायपालिका में महिला और पुरुषों के अनुपात की बात करें तो यह बहुत ही कम है। देश को अदालतों में महिला जज की संख्या बहुत ही कम है। 2021 में महिला वकीलों के एक संगठन ने जनहित याचिका दायर करके कहा था कि कोर्ट में महिला जजों की नियुक्ति और होनी चाहिए पीआईएल में कहा गया कि मणिपुर, मेघालय, पटना, त्रिपुरा, उत्तराखंड में एक भी महिला जज नहीं है। गुवाहाटी, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान और सिक्किम हाई कोर्ट मे सिर्फ एक महिला जज है।












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