जब एक हिन्दू ने लिखा पाक का राष्ट्रीय गीत

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) ये बात आपको सुनकर जरूर हैरानी होगी कि पाकिस्तान का पहला राष्ट्रीय गान एक हिन्दू ने लिखा था। पाकिस्तान बना था मुसलमानों के लिए और उसका कौमी तराना कोई हिन्दू लिखे ये तो अकल्पनीय बात है। पर ये सच है।

आपको बता दें कि लिखने वाले थे लाहौर निवासी जगन्नाथ आजाद। वे उर्दू के शायर थे। पाकिस्तान बनने से कुछ दिन पहले मोहम्मद अली जिन्ना ने जगन्नाथ आजाद को संदेश भेजा कि वे नए मुल्क का कौमी तराना लिखें।

हुआ था वाद-विवाद

इसके बोल थे-तराना ए पाकिस्तान..। इसे लेकर पाकिस्तान में काफी नाराजगी भी फैली। खूब वाद-विवाद हुआ। वरिष्ठ लेखक संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि बंटवारे से पहले बेशक जिन्ना ने जितने भी मुस्लिम कार्ड खेले हों लेकिन पाकिस्तान के निर्माण के वक्त वह खुद की छवि एक सेक्यूलर के तौर पर बनाना चाहते थे। शायद बेहतर अंतरराष्ट्रीय नेता बनने के लिए।

राष्ट्रीय गान मंजूर

जिन्ना ने इसे राष्ट्रीय गान के तौर पर मंजूर कर लिया। लेकिन ये महज डेढ़ साल ही आधिकारिक गान रह पाया।1950 में इसे ठुकरा दिया गया। हालात ऐसे बने वर्ष1948 में नहीं चाहते हुए भी जगन्नाथ आजाद को पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। वह दिल्ली चले आए। वर्ष 2004में उनकी मौत हुई। उन्होंने 70 से ज्यादा किताबें लिखीं। उर्दू साहित्य पर खूब काम किया।

प्रचार से दूर

हालांकि जगन्नाथ आजाद ने अपनी ओर से खुद कभी जोरशोर से इसका उल्लेख नहीं किया। जगन्नाथ आजाद का ही लिखा राष्ट्रीय गान 14 अगस्त 1947 को लाहौर रेडियो स्टेशन से प्रसारित किया गया।

लाहौर में रहना चाहते थे

जगन्नाथ अपनी पूरी जिंदगी लाहौर में ही गुजारना चाहते थे। लेकिन उनका भारत आने के लिए बाध्य होना पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत की बानगी पेश करता है।

हाफिज जालंधरी की कहानी

बता दें कि पाकिस्तान का बाद में कौमी तराना हाफिज जालंधरी ने लिखा। वे जालंधर शहर के बस्ती दानिशमंदा में रहते थे। वे 1977 में नई दिल्ली आए थे। हालांकि अब अगर आप जालंधर जाएं तो आपको हाफिज जालंधरी का पुश्तैनी घर बताने वाला कोई नहीं मिलेगा।

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