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जब चीन ने अक्साई चिन और PoK को असलियत में मान लिया था भारत का हिस्सा

नई दिल्ली- नक्शों में हेर-फेर करके दूसरे के हिस्सों पर दावा जताना माओ के जमाने से साम्यावादी चीन की रणनीति रही है। उसे जहां भी कहीं नया सीमा विवाद पैदा करना होता है पहले राजनीतिक नक्शे के साथ छेड़छाड़ करता है और फिर उस इलाके को अपना बताते हुए उसपर जबरन कब्जे की कोशिश करता है। लेकिन, पिछले तीन-चार वर्षों से उसकी इस हरकत को चुनौती मिल रही है। यही वजह है कि कई बार नक्शे के साथ धांधली करने वाले चीन की पोल खुल चुकी है। मसलन, उसने अक्साई चिन पर अवैध कब्जा कर रखा है और पाकिस्तानी कब्जे वाली कश्मीर को भी पाकिस्तान का हिस्सा बताता है। जबकि, ये दोनों इलाके भारत के हिस्से हैं, जिनमें से एक गैरकानूनी तौर पर चीन के और दूसरा पाकिस्तान के कब्जे में हैं। लेकिन, कम से कम दो बार वह खुद से अपनी पोल खोल चुका है और गलती से ही सही अक्साई चिन और पीओके का असल नक्शा आधिकारिक तौर पर जारी कर चुका है। हालांकि, जैसे ही उसे अपनी चोरी पकड़े जाने का एहसास हुआ है, उसने फिर से जाली नक्शा सामने बढ़ा दिया है।

जब पकड़ी गई थी चीन की चोरी

जब पकड़ी गई थी चीन की चोरी

पिछले साल अप्रैल के आखिरी हफ्ते की बात है चीन की राजधानी बीजिंग में उसकी महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिसिएटिव को लेकर दूसरा बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान शी जिनपिंग सरकार की ओर से बीआरआई की योजना को दिखाने के लिए जिस नक्शे का इस्तेमाल किया गया, उसमें अक्साई चिन को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया था। वह नक्शा (जो कि भारत का असल नक्शा है) चीन के कॉमर्स मंत्रालय की ओर से जारी किया गया था। चीन सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर जारी किए गए उस नक्शे में पूरे जम्मू एवं कश्मीर (आज जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो संघ शासित क्षेत्र बन चुके हैं) जिसमें पीओके और अक्साई चिन के अलावा अरुणाचल प्रदेश को चीन की सरकार ने भारतीय क्षेत्र के रूप में प्रदर्शित किया था। बता दें कि चीन भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश को भी अपना हिस्सा बताता है।

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    2018 में चीन दिखा पूरे क्षेत्र का असल नक्शा

    2018 में चीन दिखा पूरे क्षेत्र का असल नक्शा

    वैसे यह पहली बार नहीं था। एक साल पहले यानि 2018 में भी चीन ने भारत का असली और आधिकारिक नक्शा प्रदर्शित किया था। उस समय चाइनीज कॉन्सुलेट पर हुए आतंकी हमले की रिपोर्टिंग के दौरान चीन की सरकारी मीडिया ने पाकिस्तानी कब्जे वाली कश्मीर (पीओके) का असल नक्शा इस्तेमाल किया था। हालांकि, अभी वह जो नक्शा दिखाता है उसमें पीओके को अभी भी उसी स्थिति में दिखाता है, जो पिछले साल भारत की ओर से हुए राजनीतिक नक्शे में बदलाव से पहले था। दरअसल चीन, भारत के विरोध के बावजूद पीओके के रास्ते चीन- पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए 6,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का निवेश कर रहा है। आज की तारीख में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो में चीन इतना हिंसक हो रहा है, उसकी एक बड़ी वजह भी यही है कि भारत इस इलाके में अपना स्ट्रैटजिक इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ा रहा है, जो चीन के हुक्कमरानों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उन्हें डर है कि आज न कल भारत अपने सारे इलाके को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करेगा, जिससे उसका पूरा निवेश डूब सकता है।

    जम्मू-कश्मीर में हुए बदलाव से भी परेशान है चीन

    जम्मू-कश्मीर में हुए बदलाव से भी परेशान है चीन

    बीते साल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जिस तरह से जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाकर उसे मिले विशेषाधिकार को हटा दिया और राज्य को दो संघ शासित प्रदेशों में बदल दिया, चीन की चिंता उस कारण से भी बढ़ी हुई है। क्योंकि, 5 अगस्त, 2019 के बाद भारत सरकार के जिम्मेदार पदों से यह बात दोहराई गई है कि पीओके असल में जम्मू-कश्मीर का ही हिस्सा है, जिसपर पाकिस्तान ने गैरकानूनी दखल कर रखा है। कई बार पीओके को भी भारत के अधिकार में लेने की बातें कही गई हैं। खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी मुजफ्फराबाद में सार्वजनिक तौर पर इसको लेकर अपना डर जता चुके हैं। ऐसे में चीन को इस बात का टेंशन है कि अगर वाकई भारत ने पीओके को अपने कब्जे में ले लिया तो उसके हजारों करोड़ डॉलर के निवेश का क्या होगा जो वह सीपीईसी पर निवेश कर रहा है। ऊपर से भारतीय सेना बार-बार यह बात दोहरा चुकी है कि राजनीतिक नेतृत्व से इशारे भर की देरी है पीओके फिर से जम्मू-कश्मीर का अटूट हिस्सा बन सकता है।

    अक्साई चिन पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा

    अक्साई चिन पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा

    दरअसल, चीन ने जिस अक्साई चिन पर अवैध कब्जा कर रखा है, वह भारत का हिस्सा है। ऐतिहासिक रूप से यह इलाका लद्दाख का भू-भाग रहा है और चीन ने पहले धोखे से उसपर 1950 के दशक में कब्जा शुरू किया और 1962 की लड़ाई के बाद से तो पूरी तरह से उस भारतीय हिस्से पर कुंडली मारकर बैठ गया है। यह एक ठंडा और समतल रेगिस्तानी निर्जन इलाका है और सिर्फ काराकाश नदी और खारे पानी की झीलें ही यहां पर पानी के स्रोत हैं। जब चीन के साथ सीमा विवाद की बात आती है, तब यह इलाका भी है, जिसे खोने का डर ड्रैगन को सताता रहता है। (आखिरी तस्वीर प्रतीकात्मक)

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