जब रात के अंधेरे में एक भारतीय को मिला पाकिस्तानी!
बेंगलुरु। पाकिस्तान से लगी सीमा पर जब गोली चलती है, तब हर भारतीय का खून खौल उठता है। भारत का कोई नेता-अभिनेता जब पाकिस्तान जाने की बात करता है, तो मन ही मन खुन्नस के बोल गूंजने लगते हैं और जब बात क्रिकेट मैच की आती है, तब भी एक नफरत का माहौल बन ही जाता है। ऐसे में अगर कोई भारतीय रात के अंधेरे में कहीं फंस जाये और सामने एक पाकिस्तानी आकर खड़ा हो जाये, तो मन में सबसे पहला खयाल क्या आयेगा?

आप मन ही मन इस सवाल का जवाब सोचते जाइये और शुक्रवार की रात की इस घटना को पढ़ते जाइये, आपका उत्तर खुद आपकी जुबां पर आ जायेगा। यह सच्ची घटना ऑस्ट्रेलिया में शुक्रवार की रात को घटी जब गुजरात के मेहसाना जिले का मूल निवासी संदीप पटेल अंधेरी सड़क पर जा रहा था। अचानक उसकी कार पंक्चर हो गई। उस वक्त रात के डेढ़ बजे थे।
सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ था, कारें निकल रही थीं, लेकिन कोई मदद के लिये नहीं रुक रही थीं। संदीप के पास स्टैपनी थी, लेकिन जैक लगाना उसे आता नहीं था। बिना जैक के स्टेपनी बदलना नामुमकिन था। फिर भी संदीप की कोशिशें जारी थीं। तभी अचानक पीछे से आवाज़ आयी, "ब्रदर क्या कर रहे हो, मैं हेल्प करूं क्या।"
संदीप ने पलट के देखा, वो एक टैक्सी ड्राइवर था। टैक्सी रोड के किनारे पार्क थी और उसमें पैसेंजर बैठे हुए थे। इससे पहले संदीप कुछ कहता टैक्सी ड्राइवर ने अपने यात्रियों को टैक्सी से यह कहकर उतार दिया कि "मेरे दोस्त की कार खराब हो गई है, मुझे टाइम लगेगा, आप दूसरी टैक्सी से चले जाइये..."। और फिर वह संदीप के पास आया और कार की स्टेपनी बदलनी शुरू कर दी।

वनइंडिया से बात करते हुए संदीप ने कहा कि उस वक्त मन में सोच रहा था, कि अपने देश के लोग जब मिल जाते हैं, तो परदेस में परेशानियां भी छू मंतर हो जाती हैं। सोचते-सोचते उसने टैक्सी ड्राइवर से पूछा, भाई तुम कहां के रहने वाले हो? ड्राइवर बोला "रावलपिंडी, पाकिस्तान।" संदीप की आंखों में पानी आ गया। मन ही मन उस व्यक्ति के लिये सम्मान इतना बढ़ गया, कि उसने उससे उसका नाम तक पूछना गवारा नहीं समझा और घर पहुंचते ही उस टैक्सी ड्राइवर को "जैंटलमैन" की संज्ञा दे डाली। संदीप ने अपनी फेसबुक वॉल पर उस जैंटलमैन को बड़ा सा धन्यवाद दिया।












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