पिटाई के बाद बोले दिव्यांग लेखक, सिनेमाहॉल में राष्ट्रगान बजना बंद हो
सलिल चतुर्वेदी ने कहा कि सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान गाना ठीक नहीं है, ये जगह देश के प्रति प्यार जताने का नहीं है। थिएटर में कई लोग शराब पीकर आते हैं।
पणजी। गोवा में राष्ट्रभक्ति की भावना कुछ लोगों में इसकदर हावी हो गई कि उन्होंने व्हीलचेयर पर ही रहने को मजबूर लेखक और दिव्यांग कार्यकर्ता की पिटाई कर दी। उनकी गलती केवल इतनी थी कि उन्होंने मल्टीप्लेक्स में राष्ट्रगान बजने पर खड़े नहीं हुए।

सलिल चतुर्वेदी से सिनेमा हॉल में हुई मारपीट
लेखक और दिव्यांग कार्यकर्ता सलिल चतुर्वेदी रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण व्हीलचेयर ही रहने को बाध्य हैं। बताया जा रहा है कि गोवा की राजधानी पणजी में वो एक मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने गए थे।
फिल्म शुरु होने से पहले ही वहां राष्ट्रगान बजा लेकिन लेखक खड़े नहीं हुए। इससे वहां मौजूद एक पति-पत्नी ने राष्ट्रगान के दौरान उनके खड़े नहीं होने पर उनसे मारपीट की।
ये पूरा घटनाक्रम फिल्म के शुरू होने से पहले हुआ। राष्ट्रगान शुरू होते ही पति-पत्नी खड़े होकर इसे गाने लगे। लेकिन सलिल चतुर्वेदी खड़े नहीं हो सकते थे। इस पर उन्होंने उन पर हमला बोल दिया।
राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं होने पर किया गया हमला
सलिल चतुर्वेदी के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रगान खत्म होने का भी इंतजार नहीं किया उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। राष्ट्रगान की वजह से सलिल उनसे उस समय कुछ नहीं बोले और जैसे ही राष्ट्रगान खत्म हुआ उन्होंने पति-पत्नी को पूरी बात बताई कि आखिर वो खड़े क्यों नहीं हुए।
सलिल चतुर्वेदी ने बताया कि वो 1984 से व्हीलचेयर पर हैं। उनके कमर से नीचे के हिस्से को लकवा मार गया है। उन्होंने कहा कि मैं इस घटना से बिल्कुल कांप गया हूं। मुझे इस घटना से गहरा आघात पहुंचा है।
पणजी के एक थिएटर की घटना
सलिल चतुर्वेदी ने कहा कि सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान गाना ठीक नहीं है, ये जगह देश के प्रति प्यार जताने का नहीं है। थिएटर में कई लोग शराब पीकर आते हैं।
बावजूद इसके अगर सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान गाया जाता है तो इससे पहले थिएटर की ओर से एक संबोधन होना चाहिए जिसमें ये जानकारी दी जाए कि कुछ राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं हो सकते हैं।












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