‘बच्चों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर लाना क्या गुनाह था?’

डॉक्टर कफ़ील ख़ान
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डॉक्टर कफ़ील ख़ान

पिछले साल अगस्त में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बच्चों की मौत हुई थी.

इस मामले में अस्पताल के नवजात शिशु विभाग के वार्ड सुपरिटेंडेंट रहे डॉक्टर कफ़ील ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था. उन्हें लखनऊ में इस मामले की जांच के लिए बनाए गए स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने दो सितंबर को गिरफ़्तार किया.

बीते बुधवार को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत दे दी.

ज़मानत पाने के लिए कफ़ील के परिवार ने आठ महीनों में छह बार याचिकाएं दाख़िल की थीं जो निचली अदालत से नामंज़ूर होती रहीं. इसके बाद उनके परिवार ने हाईकोर्ट में अपील की थी.

जेल से ज़मानत पर बाहर आए डॉक्टर कफ़ील से बीबीसी संवाददाता आदर्श राठौर ने बात की.

तकरीबन आठ महीने तक जेल में रहने वाले डॉक्टर कफ़ील कहते हैं कि यह काफ़ी बुरा अनुभव था, जेल में स्थितियां काफ़ी अमानवीय हैं, एक सेल में 150 से अधिक लोग रहते हैं जो कि बहुत डरावना है और जब जेल से निकलकर आया तो मानसिक रूप से काफ़ी थका हुआ था.

वह कहते हैं, "जब कोई गुनाह किया हो तो लगता है कि चलो गुनाह किया है लेकिन मेरा दिल बार-बार पूछता था कि मैंने क्या गुनाह किया है कि जो मैं यहां हूं. बच्चों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर लाना क्या गुनाह था? मेरा दिल कहता था कि तुमने कोई ग़लती नहीं की है. शायद अल्लाह परीक्षा ले रहा है."

'800 की क्षमता वाली जेल में दो हज़ार लोग'

कफ़ील जेल के अनुभवों पर विस्तार से कहते हैं कि 150 से अधिक क़ैदियों के लिए एक टॉयलेट होता था जो कि काफ़ी गंदा होता था. वह बताते हैं कि 800 से अधिक क़ैदियों की क्षमता वाली जेल में दो हज़ार से अधिक क़ैदी थे.

जेल से बाहर आने पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद उन्हें यक़ीन नहीं हुआ कि इतने सारे लोग उन्हें लेने आएंगे.

वह कहते हैं, "इसमें से कुछ वे लोग थे जो अपने बच्चों को खो चुके थे. सरकार ने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं उस पर हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने ख़ुद बोला है कि सरकार सबूत नहीं पेश कर पाई इसलिए मुझे ज़मानत दी जा रही है."

बीआरडी मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद ऐसी ख़बरें आई थीं कि कफ़ील ने ख़ुद से ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराए थे. इस पर कफ़ील कहते हैं, "मुझ पर आपराधिक धाराएं लगाई गई हैं और मैंने उन्हें सबूत दिए की कैसे-कैसे ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराए थे."

उन्होंने आगे कहा कि सरकार का कहना था कि ऑक्सीजन ख़त्म ही नहीं हुई थी, अगर ऐसे हुआ था तो उन्होंने ऑक्सीजन मुहैया कराने वाली कंपनी के मालिक को जेल में क्यों डाला था?

'सात महीने तक इंतज़ार किया'

प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कफ़ील ने कहा कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का बक़ाया नहीं चुकाया जा रहा था जिसके बाद प्रशासन के पास उसके बिल घूमते रहे और कोई इस पर चिंतित नहीं था कि बिल जमा करना है.

आगे उनकी क्या तैयारी है? वह कहते हैं कि वह सात महीने तक इंतज़ार करते रहे और गिरफ़्तारी तक उन्होंने किसी के ख़िलाफ़ कुछ नहीं बोला, लेकिन जब ऑक्सीजन मुहैया कराने वाले मालिक की ज़मानत हो गई तो उन्हें लगा कि अब बोलना पड़ेगा.

वह कहते हैं, "इसके बाद मेरे परिवार ने फ़ैसला लिया कि अब हमें सच बताना होगा. यह लंबी लड़ाई है और मैं इसके लिए तैयार हूं."

कफ़ील बड़े दावे से कहते हैं कि ख़ुद को निर्दोष साबित करने के लिए उनके पास बहुत सारे सबूत हैं.

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