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बुराड़ी में क्या था एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत का सच? 3 साल बाद हुआ सबसे बड़ा खुलासा

बुराड़ी मामले को रूहानी ताकतों से भी जोड़कर देखा गया था, लेकिन अब असली सच सामने आया है।

नई दिल्ली: उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में तीन साल पहले, जुलाई 2018 को घटी एक घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। एक जुलाई की सुबह जब लोगों की आंख खुली तो खबर मिली कि बुराड़ी में एक घर के अंदर रहने वाले परिवार के 11 लोगों की लाशें मिली हैं। 11 में से 10 लोग फांसी के फंदे से लटके हुए मिले थे, जबकि एक लाश जमीन पर पड़ी थी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की। पुलिस की जांच के दौरान 11 लोगों की मौत के केस में हर दिन एक नए रहस्य का खुलासा हुआ। अब तीन साल की पुलिस जांच के बाद इस मामले को लेकर सबसे बड़ा सच सामने आया है।

इस वजह से गई थी परिवार के 11 लोगों की जान

इस वजह से गई थी परिवार के 11 लोगों की जान

दरअसल, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने इस मामले को अब बंद कर दिया है और अपनी क्लोजर रिपोर्ट में बताया है कि बुराड़ी में रहने वाले चुंडावत परिवार के 11 लोगों की जान किस वजह से गई थी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर यह कहा जाए कि इन 11 मौतों के पीछे किसी तरह की कोई साजिश या किसी और का हाथ था। यह पूरी तरह से एक सुसाइड पैक्ट का मामला था, जिसमें परिवार के 11 लोगों ने आपसी सहमति से अपनी जान दी।

केस को रूहानी ताकतों से जोड़कर भी देखा गया

केस को रूहानी ताकतों से जोड़कर भी देखा गया

यह केस दिल्ली पुलिस के सबसे रहस्यमयी मामलों में से एक था। उस वक्त ये 11 लोगों की मौत की एक ऐसी अनसुलझी कहानी थी, जिसमें हर दिन एक नया राज सामने आता था। कभी इन 11 लोगों की मौत के पीछे हत्या का शक जताया गया, कभी किसी गहरी साजिश की कहानी बुनी गई, तो कभी पूरे मामले को रूहानी ताकतों से जोड़कर देखा गया। इस मामले में शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था, लेकिन धीरे-धीरे हर रहस्य से पर्दा हटा और अब तीन साल की जांच के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट बना दी है।

किस हालत में मिले थे परिवार के लोगों के शव

किस हालत में मिले थे परिवार के लोगों के शव

आपको बता दें कि एक जुलाई को जब बुराड़ी के इस घर में पुलिस दाखिल हुई, तो परिवार के 10 लोग लोहे की ग्रिल से लटके हुए मिले थे। सभी की आंखों पर पट्टी बंधी थी और हाथ-पैर भी बांधे हुए थे। वहीं, परिवार की मुखिया नारायण देवी का शव छत पर मिला था। नारायण देवी के अलावा मृतकों में उनके बेटे भवनेश और ललित, बेटी प्रतिभा, भवनेश की पत्नी सविता और उनके तीन बच्चे- नीतू, मोनू और ध्रुव, ललित की पत्नी टीना, बेटा शिवम और प्रतिभा की बेटी प्रियंका थे।

रजिस्टरों में लिखी थी मौत की डरावनी प्लानिंग

रजिस्टरों में लिखी थी मौत की डरावनी प्लानिंग

पुलिस ने जब मामले की तफ्तीश शुरू की, तो घर के अंदर से कुछ रजिस्टर बरामद हुए। इन रजिस्टरों को जब पढ़ा गया तो पुलिस भी हैरान रह गई। दरअसल इन रजिस्टरों में वो डरावनी प्लानिंग लिखी हुई थी, जिसके जरिए परिवार के 11 लोगों ने अपनी जान दी। पुलिस ने जब गहराई से जांच की, तो रजिस्टरों में लिखी एक-एक बात मौत के हालात से मेल खाती हुई नजर आई।

सुसाइड के लिए परिवार ने खुद जमा किए स्टूल

सुसाइड के लिए परिवार ने खुद जमा किए स्टूल

अगस्त 2019 में हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ने पुलिस को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि घर से मिले रजिस्टरों में जो बातें लिखी हुई हैं, वो परिवार के लोगों ने ही लिखी हैं। इसके अलावा घर के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में भी इस बात का खुलासा हुआ, कि मौत से पहले चुंडावत परिवार ने खुद आत्महत्या करने के लिए स्टूल वगैरह जमा किए थे।

मौत से पहले सभी मोबाइल मंदिर में रखे गए

मौत से पहले सभी मोबाइल मंदिर में रखे गए

धीरे-धीरे पुलिस की जांच आगे बढ़ी और इस बात के पुख्ता सबूत मिलने शुरू हुए कि परिवार ने अपनी मर्जी से आत्महत्या की है। पुलिस जांच के दौरान एक सूत्र ने बताया, 'मौत से पहले परिवार के सभी लोगों ने अपने-अपने मोबाइल साइलेंट मोड पर लगाए और इसके बाद एक बैग में सारे फोन डालकर, घर के मंदिर में रख दिए। रजिस्टरों में लिखी बातों और मौत के तरीके से इस बात के भी संकेत मिले कि परिवार ने किसी अनुष्ठान के तहत सामूहिक आत्महत्या की है।'

रजिस्टर में किसने लिखी थीं वो बातें?

रजिस्टर में किसने लिखी थीं वो बातें?

जांच के दौरान हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि रजिस्टरों में ज्यादातर बातें ललित और प्रियंका ने लिखी थीं। सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान कोई भी बाहरी शख्स घर के अंदर दाखिल होता हुआ नजर नहीं आया। वहीं, साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि परिवार के 11 लोगों का मरने का कोई इरादा नहीं था। बल्कि, सभी को यह उम्मीद थी कि इस अनुष्ठान के बाद वो सामान्य जीवन में वापस लौट आएंगे। इसके अलावा विसरा रिपोर्ट में भी किसी के शरीर में जहर का कोई अंश नहीं मिला।

ललित को लगता था- पिता उससे बात करते हैं

ललित को लगता था- पिता उससे बात करते हैं

रजिस्टरों में लिखी बातों से पता चला कि ललित के अंदर एक बहुत मजबूत अंधविश्वास था कि उसके पिता, जिनकी मौत 2007 में ही हो चुकी थी, वो उससे बात करते हैं। ललित मानता था कि उसके पिता ने एक अनुष्ठान करने लिए कहा है, जिससे परिवार को लाभ होगा। इस मामले में पुलिस ने 11 जून को अपनी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी और मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी।

ये भी पढ़ें- बुराड़ी के घर में रहने आए डॉक्टर ने कहा, इस घर को कभी किराए पर नहीं लेता, अगर...

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