हम हल्के में नहीं लेंगे... पतंजलि विज्ञापन केस में अदालत की वो 6 बातें, जिनसे बढ़ जाएगी बाबा रामदेव की टेंशन
पतंजलि भ्रामक विज्ञापन केस में सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और सरकार को जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बाबा रामदेव और बालकृष्ण के दूसरे माफीनामे को भी खारिज कर दिया।
जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच ने पतंजलि के वकील विपिन सांघी और मुकुल रोहतगी से कहा कि आपने जानबूझकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, मामले को हल्के में लिया है। ऐसे में कार्रवाई के लिए तैयार रहें। आइये जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में आज की कार्यवाही पांच सबसे जरूरी बातें...

माफीनामा स्वीकार नहीं किया
अवमानना मामले में पंतजलि और बाबा रामदेव की ओर से जो हलफनामा पेश किए गए, उसे स्वीकार करने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया। जस्टिस कोहली ने कहा, हम इसे स्वीकार करने से इनकार करते हैं, हम इसे अदालत की अवमानना मानते हैं। अब आप कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
'हम अंधे नहीं, यहां पर उदार नहीं होंगे'
सुप्रीम कोर्ट में बाबा रामदेव का हलफनामा पढ़ने और बिना शर्त माफी मांगने के बाद जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, 'हम अंधे नहीं हैं।' जस्टिस कोहली ने कहा पकड़े जाने के बाद केवल कागज पर माफी मांगी गई है। हम इसे स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा कि ये स्वीकार ने लायक नहीं है, ऐसा तीन बार किया जा चुका है। इस पर बाबा रामदेव के वकील रोहतगी ने कहा पेशवेर वादी नहीं है, लोग जीवन में गलतियां करते हैं। बेंच ने कहा, हमारे आदेश के बाद भी गलती? इस मामले में हम इतना उदार नहीं होना चाहते।
'आप बहुत हल्के में ले रहे हैं'
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस कोहली ने कहा कि अवमानना के केस में जब आप यह कहकर छूट मांगते हैं कि आपके पास विदेश यात्रा का टिकट है। आपने देश से बाहर जाने के अपने एक कार्यक्रम की जानकारी दी है, इसे देखकर लगता है कि आप सारी प्रक्रिया को हल्के में ले रहे हैं। जस्टिस अमानुल्लाह ने सुनवाई के दौरान कहा, कोर्ट से झूठ बोला गया।
उत्तराखंड सरकार को लगी जबरदस्त फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र ने ये मामला 2020 में उत्तराखंड सरकार को भेजा था। केंद्र से खत आता है कि आपके पास मामला है। कानून का पालन कीजिए। 6 बार ऐसा हुआ। बार-बार लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर चुप रहे। इसके बाद जो आए, उन्होंने भी यही किया। अदालत ने अधिकारियों से पूछा आपने अब तक इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं करवाया। यह क्यों न माना जाए कि आपकी इनसे मिलीभगत है। हमें अफसर का एफिडेविट चाहिए कि 3 साल तक फाइलें बढ़ाने के अलावा आपने किया क्या।
'अफसरों को सस्पेंड किया जाए'
कोर्ट ने कहा इन अफसरों को सस्पेंड किया जाना चाहिए। जस्टिस कोहली ने पूछा कि ड्रग ऑफिसर और लाइसेंसिंग ऑफिसर का क्या काम है? आपके अफसरों ने कुछ नहीं किया है। जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, हमें अफसरों के लिए 'बोनाफाइड' शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति है। हम हल्के में नहीं लेंगे। हम इसकी धज्जियां उड़ा देंगे।
'हमें एसी सभी कंपनियों को लेकर फ्रिक'
कोर्ट ने कहा कि हमें ऐसी सभी कंपनियों को लेकर फिक्र है, जो ऐसे लुभावने विज्ञापन देती हैं और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। जस्टिस कोहली ने सरकार से फटकार लगाते हुए कहा, 'कोई मरे तो मरे...लेकिन हम चेतावनी देंगे'।
जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा आपने हमें उकसाने का काम किया। ये तो अभी शुरुआत है। केंद्र सरकार की ओर पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ये तो बस गलतियां हैं। जस्टिस कोहली ने कहा, ये मूर्खताएं हैं।
मेहता ने कहा, हम एक पार्टी नहीं थे। इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वाह! कोई भी पार्टी आपको आपके सार्वजनिक कर्तव्य से मुक्त नहीं कर सकती! आप चाहते हैं कि हम एक आदमी को माफ कर दें। उन सभी लोगों का क्या, जिन्होंने आपकी दवा खाई थी, जिनके बारे में कहा गया था कि ये बीमारी दूर कर देंगी, जिनका इलाज नहीं हो सकता था। क्या आप ऐसा किसी आम आदमी के साथ कर सकते हैं?












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