महाराष्ट्र में अज़ान बनाम हनुमान चालीसा से क्या हासिल करना चाहते हैं राज ठाकरे
महाराष्ट्र में अज़ान बनाम हनुमान चालीसा से क्या हासिल करना चाहते हैं राज ठाकरे
डूबते राजनीतिक करियर को नया जीवन देने के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने अपने चाचा और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की तरह आक्रामक हिंदुत्व का सहारा लिया है.
राज ठाकरे ने अपने समर्थकों से मस्जिद के सामने अज़ान के वक़्त हनुमान चालीसा का पाठ करने की अपील की है.
राज ठाकरे ने गुड़ी पड़वा के दिन एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, "मैं धार्मिक रूप से कट्टर नहीं हूं लेकिन मुझे अपने धर्म पर गर्व है. जब धर्म बना होगा तब क्या लाउडस्पीकर्स थे? क्या आपने ऐसे लाउडस्पीकर्स दूसरे देशों में देखा है?"
महाराष्ट्र विधानसभा में राज ठाकरे की पार्टी का एक ही विधायक है. लेकिन उनका ये बयान काफ़ी ज़्यादा चर्चा में है. उनके इस संबोधन के बाद राज्य के गृह मंत्री दिलीप वाल्से पाटिल को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात करने के बाद बयान देना पड़ा कि धार्मिक जगहों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर एक समान नीति लागू की जाएगी.
राज ठाकरे ने क्यों लिया यू-टर्न?
शिवसेना ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर एक सेक्यूलर सरकार का गठन किया था, जिसके बाद 2019 में उद्धव ठाकरे राज्य के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद मराठी अस्मिता के साथ आक्रामक हिंदुत्व की जो राजनीति शिवसेना करती आ रही थी वह जगह खाली दिख रही है.
राज ठाकरे किसी तरह अपनी पार्टी को प्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें यह मौका दिख रहा है. शिवसेना के सेक्यूलर सरकार में शामिल होने से खाली जगह वो भरना चाहते हैं.
2019 के चुनाव में शिवसेना बीजेपी के साथ थी जबकि राज ठाकरे शरद पवार के साथ थे. लेकिन चुनाव के ठीक बाद शरद पवार ने शिवसेना के साथ समझौता करके राज ठाकरे को छोड़ दिया था.
वहीं बीजेपी और शिवसेना का भी सालों पुराना गठबंधन टूट गया. राज ठाकरे अब शिवसेना की जगह लेकर बीजेपी का जूनियर पार्टनर बनना चाहते हैं.
यही वजह है कि राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ बोलना बंद कर रखा है और अपनी पार्टी के झंडे को बदलते हुए भगवा झंडा अपनाया है. दरअसल अगले कुछ महीनों में मुंबई सहित राज्य के बड़े शहरों में नगर निगम का चुनाव होना है. स्थानीय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के बाद उत्पन्न स्थितियों में इन चुनाव को लंबित किया गया था.
जब हर सप्ताह केंद्रीय एजेंसियां शिवसेना या एनसीपी के नेताओं पर छापे मार रही हैं और उद्धव ठाकरे की सरकार को हर दिन संघर्ष करना पड़ रहा है, राज ठाकरे ने ख़ुद को मज़बूत करने के लिए ऐसे वक़्त को चुना है. एक तरफ़ उद्धव ठाकरे का ध्यान बंटा हुआ है और दूसरी तरफ़ नगर निगम के चुनाव कुछ महीने में होने हैं, ऐसे वक़्त में राज ठाकरे मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर को मुद्दा बना रहे हैं.
राज ठाकरे की पार्टी 16 साल पुरानी है और अब तक केवल मराठी मुद्दों पर बोलती है. राज ठाकरे के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने राज्य में हिंदी बोलने वाले लोगों को कई बार निशाना बनाया है. लेकिन इससे वह राजनीतिक तौर पर मज़बूत नहीं हुई तो अब पार्टी हिंदू बनाम मुस्लिम ध्रुवीकरण का सहारा लेना चाहती है.
हालांकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का दावा है कि यह यू-टर्न नहीं है. पार्टी के नेता संदीप देशपांडे ने कहा, "जब हमें लगता है कि नरेंद्र मोदी ग़लत हैं तो हम उनकी आलोचना करने से नहीं डरते हैं. लेकिन जब हमें लगता है कि वो सही हैं, तो राज ठाकरे उनकी प्रशंसा करते रहे हैं. ऐसे में यह यू-टर्न कैसे हुआ?"
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर सूर्यवंशी ने कहा, "शिवसेना का गठन मराठी आबादी के उद्देश्यों के लिए किया गया था, उसे मुंबई में भी समर्थन हासिल हुआ. लेकिन पार्टी मुंबई, ठाणे और कोंकण से आगे नहीं बढ़ सकी थी. तब 1984 के बाद से शिवसेना ने हिंदुत्व की राजनीति शुरू की और पार्टी तेज़ी से बढ़ने लगी. राज ठाकरे उसी रास्ते को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं."
हिंदुत्व के मुद्दे पर दावेदारी
राज ठाकरे की पार्टी की अचानक सक्रियता ने शिवसेना को परेशान करना शुरू किया है. राज ठाकरे पुणे के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना करने गए. पुणे में भी नगर निगम का चुनाव होना है. राज ठाकरे की यात्रा के तुरंत बाद शिवसेना के नेताओं ने मुंबई की एक मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ा. शिवसेना के नेता लगातार टीवी कैमरों पर आकर दावा कर रहे हैं कि भगवा झंडे के असली वाहक उनकी पार्टी है.
शरद पवार की पार्टी ने भी इफ़्तार के साथ साथ हनुमान जयंती का कार्यक्रम मनाया है. शरद पवार की बेटी और पार्टी सांसद सुप्रिया सुले ने अपनी हनुमान मंदिर की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है. शरद पवार ने यह भी स्पष्टता से कहा है कि वो नास्तिक नहीं हैं.
बीजेपी बिना किसी शोर-शराबे के राज ठाकरे की मदद कर रही है, ताकि शिवसेना के लिए मुश्किलें बढ़ें. बीजेपी के एक नेता ने कहा कि जो भी हिंदू मस्जिद के सामने लाउडस्पीकर्स लगाना चाहते हैं, उन्हें वह लाउडस्पीकर मुहैया कराएंगे. इस मुद्दे पर अप्रत्याशित समर्थन मिलने से राज ठाकरे का मनोबल बढ़ा है. वेोआने वाले दिनों में मुंबई के बाहर दो-चार और रैलियां करने की योजना बना रहे हैं. इससे आने वाले दिनों में हिंदुत्व को लेकर राजनीतिक घमासान जारी रहने की उम्मीद है.
मस्जिदों पर लाउडस्पीकर्स
यह कोई पहला मौका नहीं है जब मस्जिदों पर लगने वाले लाउडस्पीकर्स राजनीतिक मुद्दा बने हैं. शिवसेना और बीजेपी पहले भी इसको लेकर सवाल उठाती रही थी. हालांकि हिंदु त्योहारों के वक्त भी लाउडस्पीकर के ऊंचे शोर को लेकर सवाल उठते रहे हैं.
मुंबई में ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए संघर्ष करने वाली संस्था आवाज़ फाउंडेशन की सुमैरा अब्दुलाली ने बीबीसी मराठी से कहा, "नेता ये जानते हैं कि अगर अज़ान के दौरान लाउडस्पीकर का प्रयोग प्रतिबंधित हुआ तो इसे गणेश चतुर्थी के त्योहार में भी प्रतिबंधित करना होगा. कोई इसका इस्तेमाल बंद नहीं करना चाहता. इसलिए केवल एक-दूसरे की आलोचना करते रहते हैं. जब वो विपक्ष में होते हैं तब अज़ान और लाउडस्पीकर की बात करते हैं, सत्ता में आने पर कुछ नहीं करते हैं."
नासिक के पुलिस कमिश्नर दीपक पांडेय ने यह आदेश जारी किया है कि तीन मई से पहले नियमों के मुताबिक सभी धार्मिक प्रतिष्ठान लाउड स्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति हासिल करें, इसका उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की बात भी आदेश में शामिल है.
मीडिया से बात करते हुए दीपक पांडेय ने कहा, "हमने यह फ़ैसला लिया है ताकि क़ानून व्यवस्था के साथ शांति की स्थिति रहे. ये आदेश महाराष्ट्र पुलिस एक्ट 1951 के तहत दिए गए हैं. अगर इसका उल्लंघन किया गया तो हम लोग नियमानुसार कार्रवाई करेंगे. नियम सभी धार्मिक स्थल पर एक समान ढंग से लागू होंगे. मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च परिसर में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए अनुमति की ज़रूरत होगी. अभी तक किसी ने अनुमति नहीं ली है."
नासिक पुलिस ने यह भी कहा है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने में कोई मुश्किल नहीं है लेकिन यह मस्जिद के 100 मीटर के दायरे में और अज़ान के समय नहीं होना चाहिए.
क्या कहता है क़ानून?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक लाउडस्पीकर्स का इस्तेमाल इस्लाम के लिए आवश्यक नहीं है. अदालत ने 2020 में अपने फ़ैसले में कहा था, "इस्लाम में अज़ान एक धार्मिक अभ्यास है. लेकिन लाउडस्पीकर्स पर अज़ान देना आवश्यक नहीं है इसलिए मुस्लिम धर्मगुरु मस्जिद से बिना लाउडस्पीकर्स के अज़ान दे सकते हैं."
मुंबई हाईकोर्ट के वकील और महाराष्ट्र गोवा बार कांउसिल के सदस्य उदय वारुनजिकर कहते हैं, "पर्यावरण संरक्षण एक्ट, 2000 के तहत शोर को लेकर कुछ प्रावधान किए गए हैं. ये प्रावधान धार्मिक स्थलों पर भी लागू हैं. राज्य सरकार साल में 15 दिन रात के दस बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति दे सकती हैं. सरकार यह अनुमति किसी त्योहार या रैली के दौरान दे सकती है."
उदय के मुताबिक, "लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर संबंधित संस्था को यह देखना होगा कि निश्चित डेसीबल लिमिट का ध्यान रखा जाए, उस लिमिट से ज़्यादा शोर होने पर इस्तेमाल करने वाले और लाउडस्पीकर मुहैया कराने वालों पर पुलिस केस हो सकता है"
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