'पाकिस्तानी जासूस' ज्योति मल्होत्रा को फांसी या उम्र कैद? देशद्रोह साबित होने पर कितनी होगी सजा? क्या है कानून
Jyoti Malhotra Pakistan Spy Case: हरियाणा के हिसार की रहने वाली ट्रैवल व्लॉगर और यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में 17 मई को गिरफ्तार की गई है। फिलहाल वो पुलिस रिमांड पर है, उसे 22 मई को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।ज्योति पर भारत के बारे में संवेदनशील जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI को देने और सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की पॉजिटिव छवि पेश करने का आरोप है।
ज्योति मल्होत्रा उर्फ ज्योति रानी पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम-1923 (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923) की धारा 3, 4 और 5 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया है। हिसार में दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान उच्चायोग के एक कर्मचारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में आई थी, जिसे भारत में अपने आधिकारिक दर्जे से बाहर की गतिविधियों में शामिल होने की वजह से अवांछित व्यक्ति (पर्सोना नॉन ग्राटा) घोषित कर देश से निकाल दिया गया है। ज्योति मल्होत्रा का लिखित कबूलनामा भी दर्ज किया गया है। जांच अब आर्थिक क्राइम ब्रांच हिसार को सौंप दी गई है।

ऐसे में आइए जानते हैं कि अगर देशद्रोह साबित होने पर ज्योति मल्होत्रा को कितने साल की सजा होगी, क्या इस धारा में फांसी या उम्र कैद का भी प्रावधान है, आइए जानते हैं।
Official Secrets Act, 1923: (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923) के तहत कितनी सजा होती है?
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि ज्योति पर अधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये कानून अंग्रेजों के शासन के वक्त शुरू हुआ था। पहले इसे 'द इंडियन ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (एक्ट XIV)-1889' के नाम से जाना जाता है। इसका इस्तेमाल उस वक्त स्वतंत्रता सेनानियों के पक्ष में आवाज उठाने वाले अखबारों और लेखों पर किया जाता था। उसके बाद इस कानून में बदलाव किया गया और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम-1904 में फिर अस्तित्व में आया। 1932 में इसमें फिर से बदलाव हुआ और उसे नोटिफाई किया गया।
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923 की धाराएं उन लोगों पर लगाई जाती है, जिसपर जासूसी का आरोप हो। यह कानून देश की सुरक्षा और सरकारी गोपनीयता को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। यह कानून में सरकार की संवेदनशील जानकारी को जनता या विदेशी शक्तियों तक लीक होने से बचाया गया है।
अगरऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923 के तहत कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसे 14 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। हालांकि इसके धारा-3 के तहत तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। कानून की धारा-4 के तहत तीन साल की सजा या जुर्माना हो सकता है। लेकिन अगर किसी ने खुफिया जानकारी, भारतीय सेना से जुड़ी जानकारी साझा करने में दोषी पाया जाता है तो उसे 14 साल तक की सजा मिल सकती है। अगर आरोपी देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते तो उसे आजीवन कारावास की भी सजा हो सकती है।
BNS Section 152: भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत क्या सजा मिलती है?
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) 2023 की धारा 152 एक अहम प्रावधान है, जो "राज्य की स्वतंत्रता, अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ अपराधों" से संबंधित है। यह धारा उन व्यक्तियों पर लागू होती है जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, युद्ध में सहयोग करने या युद्ध की साजिश रचने जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त होते हैं।
बीएनएस की धारा 152, जो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A की जगह लाई गई थी। धारा 152 के अपराध के तहत दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास या सात साल तक की सजा और अनिवार्य जुर्माना मिल सकता है।
ज्योति मल्होत्रा को कितनी होगी सजा?
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि ज्योति मल्होत्रा पर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923 की धारा 3, 4 और 5 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अगर ज्योति इन दोनों धाराओं में दोषी पाई जाती है तो उन्हें तीन से 14 साल तक की सजा या फिर आजीवन कारावास हो सकता है। हालांकि ये अपराध की गंभीरता पर आधारित होता है।












Click it and Unblock the Notifications