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Personal Data Protection Bill: क्या है डेटा प्रोटेक्शन बिल, जिसका ड्राफ्ट आज सरकार करेगी पेश

What Personal Data Protection Bill: डिजिटल इंडिया के इस दौर में डेटा की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ऐसे में डेटा सुरक्षा को लेकर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय आज इस बिल का ड्राफ्ट पेश करने जा रही है इस बिल को लेकर 2017 से काम चल रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव आज इस बिल के ड्राफ्ट को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। माना जा रहा है कि दोपहर 3 बजे होने वाली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस ड्राफ्ट पर विस्तार से जानकारी दे सकते हैं। मानसून सत्र में इस बिल को संसद से वापस ले लिया गया था, इसके बाद इस बिल को एक बार फिर से नए सिरे से तैयार किया गया है।

कैसे होता है उल्लंघन

कैसे होता है उल्लंघन

अक्सर जिस तरह से डेटा लीक होने की खबरें सामने आती हैं, उसको लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए डेटा प्रोटेक्शन बिल की कवायद शुरू की थी। इस बिल का मकसद है कि लोगों से जुड़ी जो जानकारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर, एप्लिकेशन के जरिए या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर ली जाती है उसे लीक नहीं किया जा और लोगों द्वारा मुहैया कराई गई जानकारी सुरक्षित रहे। जिस तरह से लोगों के व्यक्तिगत डेटा को अलग-अलग कंपनियों को बेचने की खबरें सामने आती हैं, इस बिल के आने के बाद उसपर रोक लग सकती है।

सख्त बिल तैयार किया गया

सख्त बिल तैयार किया गया

डेटा प्रोटेक्शन बिल की बात करें तो इस बिल में सरकार ने अपने हिसाब से जानकारों से सलाह ली थी, कई देशों के डेटा प्रोटेक्शन से जुड़ी जानकारी को लिया गया है। साथ ही डेटा को किसी के साथ साझा करने से पहले यूजर्स की अनुमति लिए जाने पर जोर दिया गया है। इसको लेकर नियम को काफी सख्त बनाया गया है। भारतीय संविधान के अनुसार निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना जाता है, यही वजह है कि सरकार डेटा प्रोटेक्शन बिल को लेकर काफी संजीदा नजर आ रही है।

डेटा को भारत में ही स्टोर किया जाएगा

डेटा को भारत में ही स्टोर किया जाएगा

अगस्त 2017 की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था, कोर्ट ने कहा था कि बिना इजाजत किसी भी पर्सनल डेटा को साझा नहीं किया जा सकता है। इस बिल के अनुसार किसी भी डेटा को सिर्फ भारत में ही स्टोर किया जाएगा, देश से बाहर डेटा को स्टोर या सुरक्षित नहीं किया जा सकता है। पर्सनल डेटा बिल की विस्तार से बात करें तो इस ड्राफ्ट को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज डीएन श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में तैयार किया गया है। इस बिल में लोगों के नाम, फोटो, पता आदि को सुरक्षित करने को सुनिश्चित किया गया है। सरकारी पहचान पत्र आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, लाइसेंस आदि की सुरक्षा को लेकर नियम बनाए गए हैं।

संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने का उद्देश्य

संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने का उद्देश्य

इसके साथ ही इस बिल में उस डेटा को भी सुरक्षित रखने की बात कही गई है जो लोगों के व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी है। लोग क्या खरीद रहे हैं, कौन सी फिल्म देख रहे हैं। इस बिल में वित्तीय लेनदेन, बायोमीट्रिक, सेक्सुअल ओरिएंटन, धार्मिक विश्वास, राजनीतिक राय आदि को संवेदनशील माना गया है। किसी भी कंपनी के साथ जब व्यक्तिगत डेटा इस्तेमाल किया जाता है तो सिर्फ संबंधित काम के लिए उस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है, इसके अलावा किसी अन्य काम के लिए नहीं किया जा सकता है।

 सख्त सजा का प्रावधान

सख्त सजा का प्रावधान

राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सरकार इस डेटा का इस्तेमाल कर सकती है। किसी अपराध को रोकने, कानूनी कार्रवाई आदि के लिए भी सरकार इस जानकारी का इस्तेमाल कर सकती है। इसके साथ ही रिसर्च और पत्रकारिता के क्षेत्र में इस जानकारी का इस्तेमला किया जा सकता है। इस डेटा को सुरक्षित करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की एक अथॉरिटी का गठन किया गया है, वह उन लोगों पर नजर रखेगी जो डेटा प्रोटेक्शन का उल्लंघन करेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है, पांच साल तक की सजा का भी प्रावधान है।

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