अब क्या करेंगे कानूनी जंग जीते शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) क्या ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद की कानूनी जंग को जीतने वाले द्वारिका व ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती पर सनातन धर्म के हित में एक पीठ से इस्तीफा देंगे? सनातन धर्मावलम्बियों को इस बात से राहत मिली की हिन्दुओं के शीर्ष धर्मगुरू शंकराचार्य के पद पर चल रही न्यायालय की जंग का फैसला हो जाने से अब बेवजह के विवाद के बादल छट जायेंगे।

हिन्दू धर्म के हित में
इस धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरू के पद पर आसीन शंकराचार्य के पद पर जिस प्रकार से विवाद लम्बे समय से न्यायालय व सड़कों पर विवाद चल रहा था उससे हिन्दू धर्म की जगहंसाई हो रही थी। इससे धर्मावलम्बियों की भावनायें बेहद आहत हो रही थी। सबसे अधिक विवाद ज्योतिष पीठ पर आसीन शंकराचार्य के दावों को लेकर है। यहां मुख्य रूप से दावेदारों में शंकराचार्य स्वरूपानंद जी, बासुदेवानंद जी व माधवाश्रम जी महाराज आदि के बीच था।
इलाहाबाद कोर्ट का फैसला
इस प्रकरण पर इलाहाबाद सिविल जर्ज गोपाल उपाध्याय ने 26 सालों से चल रहे मुकदमें का फैसला सुनाते हुए कहा कि इस पीठ पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का दावा ही न्यायोचित है। न्यायालय ने कहा कि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को स्पष्ट निर्देश दिये कि वे शंकराचार्य के रूप में कोई कार्य न करे। गौरतलब है कि इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के पक्ष में फेसला सुनाया था।
इसके खिलाफ शंकराचार्य स्वरूपानंद जी ने सवोच्च न्यायालय में फरियाद की। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता समझते हुए उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाते हुए सिविल कोर्ट को सुनवाई का आदेश दिया था।
अब इस फैसले के आने के बाद अब जहां शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के समर्थकों में खुशी की लहर छायी हुई है। मिष्ठान वितरण किया गया। वहीं स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने इसके खिलाफ न्यायालय में फरियाद करने की बात कही। इस अंतहीन द्वंद से सनातन धर्म के श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पंहुच रही है और शेष धर्मो के बीच धर्म की जग हंसाई हो रही है।
इससे देश के तमाम निष्पक्ष धर्माचार्य व धर्मावलम्बी हिन्दु धर्म के शीर्ष चार पीठों में आसीन शंकराचार्यो से सनातन धर्म के हित में उच्च आदर्श स्थापित करने की आश करती है। सनातन धर्म के 4 पीठों में से दो पीठो में (द्वारिका और ज्योतिष) शकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी आसीन है। इसलिए शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से ही सनातनी आशा करते हैं कि वे सनातन धर्म की जगहंसाई से बचाने व न्यायालय के विवादों से मुक्त करने के लिए एक पीठ का त्याग कर सनातन धर्म को सही दिशा देने की पहल करें।
वरिष्ठ लेखक देव सिंह रावत कहते हैं कि भले ही संयोग से शंकराचार्य स्वरूपानंद जी अपनी विद्धता के कारण दो पीठों पर आसीन हो गये है परन्तु आदि गुरू शंकराचार्य जी के चार पीठों के गठन की मूल भावना का सम्मान करते हुए उन्हें एक पद से त्याग करके धर्मध्वजा को पूरे जग में फहराने में अपना योगदान देना चाहिए।












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