क्या है Waqf by user, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- अगली सुनवाई तक इसमें नहीं होगा कोई बदलाव
Waqf by user: वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार 17 अप्रैल को भी सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वक्फ कानून पर केंद्र सरकार को 7 दिन की मोहलत दी है। तब तक डिनोटिफाई और नई नियुक्तियों पर रोक रहेगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति पी.वी. संजय कुमार और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की बेंच इस मामले पर सुनवाई की। इस बीच 'वक्फ बाय यूजर' को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। आज सुनवाई के दौरान ये भी कहा गया है कि अगली सुनवाई तक 'वक्फ बाय यूजर' में कोई बदलाव नहीं होगा। 'वक्फ बाय यूजर' को लेकर 16 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चिंता भी जताई थी।
पीठ 70 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन, वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी, वरिष्ठ अधिवक्ता सी.यू. सिंह और अन्य सहित कई अधिवक्ता कर रहे हैं। 'वक्फ बाय यूजर' का मुद्दा इन वकीलों ने भी सुप्रीम कोर्ट में उठाया है। इनका कहना है कि इसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। वक्फ सैकड़ों साल पहले बनाए गए थे...अगर सरकार 200-300 साल पुरानी डीड मांगेगी तो कोई भी नहीं दे पाएगा...। ऐसे में आइए जानें क्या है 'वक्फ बाय यूजर'?

🔴 सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकीलों ने 'वक्फ बाय यूजर' को लेकर क्या तर्क दिया?
16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान बहस की शुरुआत करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा,
''वक्फ बाय यूजर' वक्फ की एक शर्त है। मान लीजिए कि मेरे पास एक संपत्ति और मैं चाहता हूं कि उस संपत्ति पर कुछ ऐसे बने...जिससे समाज का भला हो...तो इसमें परेशानी क्या है? मेरी प्रॉपर्टी है...मैं उसपर कुछ भी बनवा सकता हूं...ऐसे में सरकार मुझ से रजिस्टर्ड कराने के लिए क्यों कहेगी?''
इसपर कोर्ट ने कहा, ''अगर आप रजिस्ट्रेशन कराएंगे तो रिकार्ड रखने में आसानी होगी। फर्जी दावों से बचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाता है।''
जवाब में कपिल सिब्बल ने तर्क दिया, ''ये कहने में आसान है...लेकिन सच्चाई ये है कि वक्फ सैकड़ों साल पहले लागू किया गया था। अगर सरकार 300 साल पुरानी जमीन की वक्फ डीड मांगेगी तो...वो कहां से लाया जाएगा।'' जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि ये एक बड़ा मुद्दा है...इसपर चर्चा की जरूरत है।
🔴 सुप्रीम कोर्ट ने 'वक्फ बाय यूजर' पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने 'वक्फ बाय यूजर'की अवधारणा को हटाने के केंद्र के कदम पर सवाल उठाया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि कानून में इस तरह के बदलाव से भारत भर में हजारों लंबे समय से चली आ रही धार्मिक संपत्तियों का दर्जा खत्म हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि, ''सरकार वैसी वक्त संपत्तियों का क्या करेगी...? जो वक्फ की है...लेकिन उसका वक्फ बोर्ड के पास कोई औपचारिक दस्तावेज नहीं है?'' सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "आप उपयोगकर्ता द्वारा ऐसे वक्फों को कैसे पंजीकृत करेंगे? उनके पास कौन से दस्तावेज होंगे?''
🔴 What is 'Waqf by user': क्या है 'वक्फ बाय यूजर'
'वक्फ बाय यूजर', उस संपत्ति को कहा जाता है, जिसे लंबे समय तक धार्मिक या परोपकारी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल में लाए जाने की वजह से वक्फ माना जाता है। भले ही उस संपत्ति का कोई औपचारिक या अधिकारिक दस्तावेज न हो। हालांकि नए वक्फ कानून में छूट दी गई है कि यह उन संपत्तियों पर लागू नहीं होगा जो विवादित हैं या सरकारी भूमि पर हैं।
इस अवधारणा को अदालती फैसलों के जरिए कानूनी मान्यता दी गई और यूपीए सरकार द्वारा पारित वक्फ संशोधन अधिनियम, 2013 में इसे संहिताबद्ध किया गया है।
वक्फ संशोधन अधिनियम, 2013 के तहत सामुदायिक उपयोग और लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक स्वीकृति के आधार पर, दस्तावेजी सबूत के अभाव में भी संपत्तियों को वक्फ के रूप में दर्ज करने की अनुमति दी। इसका उद्देश्य आधुनिक भूमि पंजीकरण प्रणालियों से पहले की विरासत संरचनाओं की रक्षा करना था।
ये तो रही कानूनी भाषा... सरल शब्दों में इसे ऐसे समझे...मुस्लिम धर्म में ऐसी मान्यताएं हैं कि जब कोई भी व्यक्ति अपनी सपंत्ति अपने पास रखता है लेकिन ये कहता है कि इसका इस्तेमाल अल्लाह के नाम पर होगा ताकि समाज को फायदा मिले...तो इसे वक्फ कहते हैं। मान लीजिए किसी शख्स ने अपनी जमीन वक्फ को दान कर दी... और वहां मस्जिद, मदरसे, अस्पताल खुलवाए जा सकते हैं...लेकिन फिर भी उस जमीन का इस्तेमाल अभी भी दान देने वाला शख्स अपने फायदे के लिए करता है तो उसे 'वक्फ बाय यूजर' कहा जाता है। वह शख्स उस जमीन का कानून तौर पर मालिक तो नहीं रहता लेकिन उसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करता है।
🔴 waqf by user properties across India: भारत भर में 4.02 लाख 'वक्फ बाय यूजर' संपत्तियां हैं
वक्फ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया (WAMSI) पोर्टल पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ 32 बोर्डों ने कुल 8.72 लाख वक्फ संपत्तियों की रिपोर्ट की है, जो 38 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई हैं। इनमें से 4.02 लाख संपत्तियों को 'वक्फ बाय यूजर' के रूप में बांटा गया है।
भारत में वक्फ संपत्तियां वैश्विक स्तर पर धार्मिक और सामुदायिक स्वामित्व वाली भूमि के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक हैं, जिसमें देश भर में विभिन्न प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं।
इनमें 1,50,516 कब्रिस्तान (17%) और 1,19,200 मस्जिदें (14%) शामिल हैं। इसके अलावा दुकानें 1,13,187 और घर 92,505 व्यावसायिक संपत्तियां वक्फ व्यवस्था के आर्थिक पोषण में योगदान करती हैं। वहीं 1,40,784 संपत्तियां कृषि भूमि (16%) हैं, जबकि दरगाह और मजार जैसे धार्मिक स्थल की 33,492 संपत्तियां हैं।
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