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अल्पसंख्यकों को मौका देने के पीछे बीजेपी की रणनीति क्या है? जानिए

बीजेपी को लगता है कि अल्पसंख्यकों को लेकर उसके खिलाफ धारणा बनाई गई है। पार्टी ने अब इस धारणा को बदलने पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। हाल में पार्टी में जो बदलाव देखे जा रहे हैं, उसक कारण ये भी हैं।

BJP started a new initiative to connect with minorities, the aim is to change the perception about the party

बीजेपी अब अल्पसंख्यक समुदाय पर भी खास फोकस कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पार्टी कार्यकर्ताओं से कह चुके हैं कि समाज का कोई भी तबका छूटना नहीं चाहिए। सबके पास जाएं और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताएं। पिछले कुछ समय से बीजेपी ने अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं की भी पार्टी में एंट्री बढ़ा दी है। भाजपा के इस अभियान से खासकर कांग्रेस को कई झटके लगे हैं। पंजाब से लेकर केरल तक में उसके कई प्रभावशाली अल्पसंख्यक नेता अब हाथ में कल थामे घूम रहे हैं।

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अल्पसंख्यक नेताओं पर बीजेपी ने किया फोकस
भारतीय जनता पार्टी ने पिछले कुछ समय से अल्पसंख्यकों के बीच अपनी पहुंच का दायरा बढ़ाने पर बहुत फोकस किया है। पार्टी ने सिख समुदाय के पूर्व आईपीएस और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा को अपने शीर्ष संस्था संसदीय बोर्ड में जगह दी है। पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी पार्टी में शामिल कर अपनी रणनीति साफ की है। वहीं अनिल एंटनी को शामिल करके केरल जैसे दक्षिणी राज्य में भी अपना इरादा जाहिर किया है।

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मुस्लिम-ईसाई समुदाय के बीच प्रभाव बढ़ाने की कोशिश
आज की तारीख में उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भाजपा के चार मुस्लिम विधान पार्षद हैं। वहीं केरल में ईसाइयों के त्योहारों क्रिसमस से लेकर गुड फ्राइडे को भी पार्टी अब पूरे उत्साह के साथ मनाने लगी है। इस महीने वह केरल में ईस्टर पर भी उत्सव मना चुकी है। बीजेपी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तारीक मंसूर को विधान परिषद में जगह दी है, जो यूपी की राजनीति की बदली हवा का संकेत माना जा सकता है।

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कार्यकर्ताओं से भी पीएम मोदी कर चुके हैं आह्वान
अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात करें तो वो शुरू से अल्पसंख्यक समुदायों के आध्यात्मिक नेताओं से बहुत ही जोशपूर्ण तरीके से मुलाकात करते रहे हैं। लेकिन, बदलाव ये हुआ है कि पार्टी की पिछली दो राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि वह अल्पसंख्यक समाज तक पहुंचें, चुनाव के इरादे से नहीं, बल्कि सरकार के कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताने के लिए।

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    'मोदी के नेतृत्व में बीजेपी समावेशी शक्ति है'
    ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक दरअसल भाजपा जो अल्पसंख्यक समाज के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिशों में जुटी हुई है, उसका मकसद चुनावी कम और अपने बारे में बनी धारणा बदलना ज्यादा है। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने कहा, 'विपक्ष खासकर कांग्रेस ने हमारे बारे में हमेश यह धारणा बनाने की कोशिश की है कि हम एक विभाजनकारी तत्व हैं, जबकि मोदी के नेतृत्व में बीजेपी समावेशी शक्ति है, जो सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत पर काम कर रही है।'

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    धारणा बदलना चाहती है बीजेपी
    उन्हीं के मुताबिक भाजपा ने संगठन में अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने के लिए कई कदम उठाए हैं, ताकि पार्टी एक समावेशी दल के रूप में दिखे भी। इसी रणनीति के तहत भाजपा अल्पसंख्यकों के बीच में पहुंच का दायरा बढ़ाने के साथ ही कांग्रेस के सिख और ईसाई नेताओं को पार्टी में स्वागत भी कर रही है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें पंजाब और केरल में ही जीती थी। भाजपा ने इन्हीं दोनों राज्यों के अल्पसंख्यक नेताओं को तरजीह भी दी है।

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    केरल और पंजाब पर फोकस
    2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सिर्फ इन दोनों राज्यों में 23 सीटें जीतीं थीं। उसे केरल की 20 में से 15 और पंजाब की 13 में से 8 सीटें मिली थीं। लेकिन, केरल में 2021 में और पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनावों में कहानी पलट गई और कांग्रेस काफी कमजोर नजर आई। अब भाजपा इन दोनों राज्यों में कांग्रेस की जमीन पर अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश में दिख रही है। जहां तक उत्तर भारतीय राज्यों में मुस्लिम समुदाय की बात है तो पिछले कुछ चुनावों में भाजपा ने अपनी सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं के दम पर उनके बीच अपनी स्थिति पहले से बेहतर जरूर की है।

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