पीएम मोदी–स्टालिन की मुलाकात के क्या हैं मायने, पहले 15 अब 45 मिनट की मीटिंग, क्या कोई खिचड़ी पक रही?
MK Stalin and PM Modi's meeting: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शुक्रवार को मुलाकात की। प्रधानमंत्री के साथ स्टालिन की ये बैठक पूरे 45 मिनट तक चली। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद स्टालिन खिले हुए चेहरे के साथ बाहर निकले और मीडिया से बात करते हुए पीएम की तारीफ की और कहा उन्होंने मेरी बात धैर्यपूर्वक सुनी।
पीएम मोदी और स्टालिन के साथ दिल्ली में गर्मजोशी भरी इस मुलाकात के बाद संभावित राजनीतिक गठबंधन को लेकर कयास शुरू हो चुके है। सवाल उठ रहे हैं कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए क्या स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और भाजपा की भविष्य में साझेदारी संभव हैं? क्या स्टानिल इंडिया गठबंधन का साथ छोड़कर भाजपा से हाथ मिलाएंगे?

हालांकि पीएम मोदी से मिलने के बाद स्टानिल ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ठ किया कि पीएम मोदी से उनकी मुलाकात एक औपचारिक मुलाकात थी इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, उन्होंने साफ किया कि केवल तमिलनाडु की पांच मांगों के संबंध में बात की। लेकिन ये राजनीति है उसमें वो ही नहीं होता जो कहां जाता है।
इससे पहले भी गठबंधनों में लड़खड़ाहट हो चुकी है जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। 2019 में महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे का अपनी पक्की दोस्त भाजपा से बगावत कर विरोधी एनसीपी और कांग्रेस से हाथ मिलाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
तमिलनाडु में असफल इंडिया गठबंधन की पृष्ठभूमि में हो रही पीएम मोदी से स्टालिन एक के बाद मुलाकात और बैठकों का बढ़ता समय तमिलनाडु में राजनीतिक गठबंधन में बदलाव के संकेत दे रहे हैं।
डीएमके और भाजपा में क्या खिचड़ी पक रही?
इतना ही नहीं अभी तक जिन के अन्नामलाई के लिए कहा जा रहा था कि वो तमिलनाडु में भाजपा के लिए अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद बाद साइड लाइन पकड़ा दिया है क्योंकि डीएमके अन्नामलाई को पसंद नहीं करती है। ऐसे में माना जा रहा है कि डीएमके और भाजपा के बीच कुछ तो खिचड़ी जरूर पक रही है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव
बता दें तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों पर चुनाव अप्रैल- मई 2026 में होने की उम्मीद है, मौजूदा मुख्यमंत्री एम के स्टालिन अभी से चुनावी रणनीति तय करने में जुट चुके हैं। भाजपा को भी तमिलनाड़ु में कुछ सीटें चाहिए और स्टालिन की पार्टीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) भी इंडिया गठबंधन में शामिल होकर ठगा सा महसूस कर रही है।
केंद्रीय बजट में डीएमके की झोली रह गई खाली
इंडिया गठबंधन में शामिल होने के बाद डीएमके को लोकसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा। वहीं बजट में भी एनडीए गठबंधन में शामिल पार्टियों वाले राज्यों को मोदी सरकार ने दिल खोल कर बजट आवंटित किया। उदाहण के तौर पर केंद्रीय बजट में आंध्र प्रदेश जहां एनडीए गठबंधन में शामिल नायडू की टीडीपी की सरकार है उसे 50,475 करोड़ आवंटित किए हैं।
लेकिन इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियों वाली राज्य सरकारों की झोली में कुछ भी नहीं आया। उन राज्यों में स्टालिन के डीएमके का तमिलनाडु शामिल है। चुनाव से पहले सीएम स्टानिल को तमिलनाडु की योजनाओं को पूरा करने के लिए केंद्र का सहयोग जरूरी है ऐसे में स्टालिन भाजपा के साथ दोस्ती करने में शायद ही गुरेज करेगी।
कांग्रेस का विकल्प तलाशती डीएमके
बता दें कांग्रेस पार्टी के साथ साझेदारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के लिए आगामी चुनावों में एक दायित्व बन सकती है, ऐसे में स्टालिन कांग्रेस से पल्ला झटकर बेहतर विकल्प तलाश सकते हैं क्योंकि अगर कांग्रेस से वो गठबंधन करती है तो उसे बडी संख्या में सीटें शेयर करनी पड़ेगी और उसे लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा में भी कांग्रेस के कारण नुकसान उठाना पड़ सकता है।
लोकसभा चुनाव में डीएमके को कांग्रेस के कारण हुआ नुकसान
याद रहे स्टालिन की पार्टीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) जो कि विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल हैं। उसने कांग्रेस के साथ गठबंधन का लोकसभा चुनाव लड़ा था। जिसमें कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ना उसे भारी पड़ा था। 2019 के लोकसभा गठबंधन में राज्य की 39 में से 38 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन 2024 के लोक सभा चुनाव में ये संख्या घटकर 31 ही रह गई।
100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट होने के बावजूद डीएमके को हुआ नुकसान
हालांकि स्टालिन ने 2024 के लोकसभा चुनावों में 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और स्ट्राइक रेट 100% के साथ सभी पर जीत हासिल की थी लेकिन उसकी सहयोगी कांग्रेस महज नौ सीटों पर जीत मिली बाकी 8 सीटों पर अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। ऐसे में तमिनाड़ु में इंडिया गठबंधन फेल माना गया।
लाेकसभा चुनाव में तमिलनाडु में भाजपा को मिला बेहतरीन वोट शेयर
मजेदार बात ये है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तमिलनाडु में एक ही सीट पर जीत हासिल की लेकिन गठबंधन को द्रविड़ प्रमुखों के समर्थन के बिना 18.27% का अच्छा खासा वोट शेयर मिला। हालांकि भाजनपा के प्रतिनिधित्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने तमिलनाडु में 25% इवोट शेयर कर लक्ष्य रखा था लेकिन फिर भी 8.27% का अच्छा खासा वोट शेयर मिला।












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