जानिए कितनी होती है स्‍टार्टअप के फाउंडर की सैलरी और कैसी होती है शुरुआत

नई दिल्‍ली। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले स्‍टार्टअप इंडिया प्रोजेक्‍ट की शुरुआत करने वाले हैं। शनिवार शाम लांच होने वाले इस प्रोजेक्‍ट का मकसद देश में मौजूद युवा उद्यमियों को प्रोत्‍साहित कर उनके आइडिया को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।

भारत, अमेरिका के बाद दूसरा ऐसा देश है जहां पर स्‍टार्टअप्‍स के लिए युवाओं में जोश देखा गया है। आज स्‍टार्टअप्‍स के लिए क्रेज इस कदर बढ़ गया है कि यूगांडा जैसे देश में भी अब तेजी से इस क्षेत्र में लोग आगे आने लगे हैं।

स्‍टार्टअप का इतिहास अगर आप तलाशें तो इसकी शुरुआत उस समय से मिलती है जब दुनिया डॉटकॉम के दौर में प्रवेश कर चुकी थी। लोगों को अमेरिका में सिलिकॉन वैली जैसी जगह के बारे में पता चला।

80 के दशक के अंत और 90 के दशक की शुरुआत ने यंग एंटरप्रेन्‍योर्स का जो जोश देखा उसने दुनिया को आज फेसबुक, उबर, फ्लिपकार्ट और ऐसे तमाम वेंचर्स से रूबरू करवाया है जो आम जिंदगी को बदलने में कारगर साबित हुए हैं।

आइए आज आपको इसी स्‍टार्टअप्‍स की दुनिया से जुड़े कुछ खास तथ्‍यों के बारे में बताते हैं।

भारत का नंबर दूसरा

भारत का नंबर दूसरा

अमेरिका दुनिया का पहला देश है जहां पर सबसे ज्‍यादा स्‍टार्टअप्‍स हैं। वर्तमान समय में अमेरिका में 4.8 मिलियन स्‍टार्टअप्स हैं। वहीं भारत का नंबर दूसरा है जहां पर इस समय करीब दो मिलियन स्‍टार्टअप्‍स मौजूद हैं।

20% स्‍टार्टअप्‍स का अस्तित्‍व बरकरार

20% स्‍टार्टअप्‍स का अस्तित्‍व बरकरार

आज अमेरिका के कैलिफोर्निया में जिसे दुनिया का सिलिकॉन वैली कहा गया, वहां पर 100 मिलियन डॉलर का शेयर रखने वाली आईटी कंपनियों में गिरावट जारी है। 90 के दशक में सिर्फ 35% कंपनिया ही यहां टिक सकीं लेकिन आज यह आंकड़ा 20% तक पहुंच चुका है।

वर्ष 2013 से लगातार इजाफा

वर्ष 2013 से लगातार इजाफा

कौफमैन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 से इस क्षेत्र में युवा महिला उद्यमियों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हुआ है।

यूके में 50 प्रतिशत तक टैक्‍स छूट

यूके में 50 प्रतिशत तक टैक्‍स छूट

इजरायल में करीब 450 मिलियन डॉलर की मदद उन कंपनियों को सरकार की ओर से मिलती है जो खेती के लिए बीजों से जुड़े प्रोजेक्‍ट से जुड़ी होती हैं और रिसर्च में आगे हों। यूके करीब 50 प्रतिशत तक की टैक्‍स छूट उन कंपनियों को देता है 100,000 पौंड तक का निवेश किया गया हो। फिनलैंड 145 मिलियन डॉलर और सिंगापुर 45 मिलियन डॉलर तक की मदद देता है।

95% के पास होती है डिग्री

95% के पास होती है डिग्री

अक्‍सर आपने सुना होगा कि कॉलेज ड्रॉपआउट्स स्‍टार्टअप्‍स के क्षेत्र में बेहतर साबित होते हैं। जबकि हकीकत कुछ और है। ए‍क रिपोर्ट की मानें तो करीब 95% एंटप्रेन्‍योर्स के पास बैचलर्स या फिर इसके आगे की डिग्री होती है।

70% फाउंडर्स विवाहित

70% फाउंडर्स विवाहित

अगर आप मानते हैं कि अगर आपकी शादी हो गई है और आपके बच्‍चे हैं तो आप इसके लिए फिट नहीं हैं। तो फिर आप जान लीजिए कि 70% फाउंडर्स शादीशुदा होते हैं तो 60% ऐसे होते हैं जो स्‍टार्टअप्‍स के समय कम से कम एक बच्‍चे के पिता बन चुके होते हैं।

सिर्फ 37% को मिलती है सफलता

सिर्फ 37% को मिलती है सफलता

आपको बता दें कि इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में शुरू होने वाले स्‍टार्टअप्‍स में असफलता काफी हद तक तय होती है। इस क्षेत्र में सिर्फ 37% स्‍टार्टअप्‍स ही पिछले चार वर्षों में सफल हो पाए हैं।

फाइनेंस और इंश्‍योरेंस को चुनें

फाइनेंस और इंश्‍योरेंस को चुनें

एक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक फाइनेंस, इंश्‍योरेंस और रीयल इस्‍टेट ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर आपको सफलता मिल सकती है। इनका सक्‍सेस रेट पिछले चार वर्षों में 58% रहा है।

कम सैलरी के लिए रहें तैयार

कम सैलरी के लिए रहें तैयार

अगर आप स्‍टार्टअप्‍स के लिए तैयार हैं तो आपको बता दें कि फाउंडर को औसतन वर्ष में 50,000 डॉलर से कम की सैलरी मिलती है। वहीं इनवेस्‍टर्स को कितना फायदा होता है इस बारे में कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है।

फ्लिपकार्ट से लेकर एप्‍पल तक

फ्लिपकार्ट से लेकर एप्‍पल तक

दुनिया के कुछ फेमस स्‍टार्टअप्‍स की लिस्‍ट में आज फेसबुक से लेकर गूगल, उबर, एप्‍पल, व्‍हाट्सएप और फ्लिपकार्ट का नाम शामिल है।

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