Norovirus क्या है ? केरल के दो बच्चों में हुई पुष्टि, इसके बारे में सबकुछ जानिए
नई दिल्ली, 6 जून: केरल में स्कूल जाने वाले दो बच्चों में नोरोवायरस की पुष्टि हुई है। यह इंफेक्शन इसी महीने का है। ये दोनों केस केरल के विझिनजाम और तिरुवनंतपुरम के हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक केरल के एसएसओ से कहा गया है कि जल्द से जल्द इस मामले की डिटेल रिपोर्ट सौंपें। ये मामले तब सामने आए हैं, जब फूड प्वाइजनिंग की शिकायत करने वाले स्कूली छात्रों के सैंपल की राज्य के सरकारी लैब में जांच की गई। केरल सरकार ने रविवार को कहा था कि नोरोवायरस इंफेक्शन डायरिया फैलाने वाले रोटावायरस की तरह होते हैं। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस बीमारी को बहुत ही ज्यादा संक्रामक बताया है और लोगों से स्वच्छता का ख्याल रखने को कहा है। आइए नोरोवायरस के बारे में सबकुछ जानते हैं।
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नोरोवायरस क्या है ?
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक यह अत्यधिक संक्रामक रोग है, जिसकी वजह से उल्टी और दस्त की शिकायतें देखने को मिलती हैं। नोरोवायरस को कई बार स्टमक फ्लू या 'विंटर वोमिटिंग बग' भी कहते हैं। हालांकि, सीडीसी का कहना है कि यह इंफ्लूएंजा वायरस से संबंधित नहीं है, जिसके कारण फ्लू होता है। यूनाइटेड किंगडम के नेशनल हेल्थ सर्विस का कहना है कि नोरोवायरस की शुरुआत बहुत ही तकलीफदेह साबित हो सकती है। लेकिन, लगभग दो दिनों में इसका असर सामान्य तौर पर कम हो जाता है।

नोरोवायरस के लक्षण
सीडीसी के मुताबिक नोरोवायरस की वजह से पेट या आंतों में सूजन होता है। इसे एक्यूट गैस्ट्रोएन्टराइटिस भी कहा जाता है। नोरोवायरस के संक्रमण के 12 से 48 घंटों के भीतर सामान्य तौर पर लक्षण सामने आने लगते हैं। ज्यादातर लोग इसकी चपेट में आने के बाद 1 से 3 दिनों में ठीक भी हो जाते हैं। इसके कुछ प्रमुख लक्षणों में उल्टी, दस्त, जी मिचलाना और पेट दर्द शामिल हैं। कुछ मरीज बुखार, सिरदर्द या शरीर में दर्द की भी शिकायत कर सकते हैं। सीडीसी की चेतावनी है कि खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दूसरे रोगों से पीड़ित लोगों में इसके चलते डीहाइड्रेशन की समस्या पैदा हो सकती है।

नोरोवायरस कैसे फैलता है ?
नोरोवायरस दूषित खाना और तरल पदार्थों के सेवन से हो सकता है या फिर दूषित चीजों या सतहों को छूने के बाद उंगलियों को मुंह में डालने, रोगियों के सीधे संपर्क में आने या उसके इस्तेमाल किए हुए बर्तनों के उपयोग से भी फैल सकता है। सीडीसी के अनुसार संक्रमित व्यक्ति नोरोवायरस के अरबों पार्टिकल निकाल सकता है, जिसे माइक्रोस्कोप के बिना नहीं देखा जा सकता। लेकिन, उनमें से कुछ ही पार्टिकल दूसरों को बीमार कर सकते हैं।

नोरोवायरस से बचाव
हाथ को साबुन और पानी से धोकर नोरोवायरस से बचे रहा जा सकता है। सीडीसी का कहना है कि नोरोवायरस से स्वस्थ हो चुके व्यक्ति के मल में दो हफ्तों या उससे भी अधिक समय तक वायरस मौजूद रह सकता है। इसीलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि लगातार अपने हाथों को धोते रहें।

नोरोवायरस का इलाज
नोरोवायरस से बीमार हुए व्यक्ति के इलाज के लिए कोई विशेष दवा नहीं है। सीडीसी की सलाह है कि ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ पीते रहें, जिससे डीहाइड्रेशन से बचा जा सकता है। क्योंकि, उल्टी और दस्त की वजह से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसका कहना है कि जब बीमारी चरम पर हो तो शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना जरूरी है। नहीं तो मरीज को शरीर में नस के माध्यम से फ्लूइड चढ़ाने की नौबत आ सकती है।












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