कोटा के बहाने प्रियंका गांधी को टारगेट करने के पीछे क्या है मायावती की रणनीति?

नई दिल्ली- बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने राजस्थान के कोटा में एक सरकारी अस्पताल में मासूम बच्चों की मौत को लेकर जिस तरह से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा पर हमला बोला है, उससे सवाल उठ रहा है कि अबतक गांधी परिवार के खिलाफ ज्यादा मुखर नहीं होने वाली बहनजी को आखिर हो गया है? दरअसल, मायावती ने राजस्थान में मासूम बच्चों की मौत को लेकर जिस तरह से प्रियंका पर निशाना साधा है, उसके तार यूपी में बदल रहे राजनीतिक समीकरणों से जुड़े हुए हैं। लोकसभा चुनाव में नाकामी के बाद पिछले कुछ महीनों में प्रियंका ने जिस तरह से प्रदेश की सियासत में सक्रियता बढ़ाई है, शायद उससे मायावती असहज होती दिख रही हैं। इस आलेख में उन कारणों पर चर्चा की गई है कि मायावती के सियासी विस्फोट के पीछे क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

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    कोटा में मासूमों की मौत,प्रियंका पर भड़कीं मायावती

    कोटा में मासूमों की मौत,प्रियंका पर भड़कीं मायावती

    राजस्थान के कोटा में एक अस्पताल में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत के बहाने बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है। ट्विटर के जरिए उन्होंने राज्य की कांग्रेस सरकार को मासूमों की मौत के प्रति असंवेदनशील तो करार दिया ही है, सीधे प्रियंका को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने लिखा है, "(अशोक गहलतो सरकार की असंवेदनशीलता) किन्तु उससे भी ज्यादा अति दुखद है कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और खासकर महिला महासचिव (प्रियंका) की इस मामले में चुप्पी साधे रखना। अच्छा होता कि वह यू.पी. की तरह उन गरीब पीड़ित माओं से भी जाकर मिलती, जिनकी गोद केवल उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही आदि के कारण उजड़ गई हैं।" अगले ट्वीट में माया ने लिखा है- "यदि कांग्रेस की महिला राष्ट्रीय महासचिव राजस्थान के कोटा में जाकर मृतक बच्चों की 'माओं' से नहीं मिलती हैं तो यहां अभी तक किसी भी मामले में यू.पी. पीड़ितों के परिवार से मिलना केवल इनका यह राजनीतिक स्वार्थ और कोरी नाटकबाजी ही मानी जाएगी, जिससे यू.पी. की जनता को सर्तक रहना है।"

    वाराणसी मामले पर प्रियंका ने खूब किया है बवाल

    वाराणसी मामले पर प्रियंका ने खूब किया है बवाल

    दरअसल, कांग्रेस महासचिव इन दिनों यूपी में सीएए विरोधी प्रदर्शन को लेकर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोली हुई हैं। बुधवार को ही उन्होंने 14 महीने की मासूम चंपक के गिरफ्तार माता-पिता की रिहाई को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला बोला था। उसके माता-पिता को 19 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के बेनिया बाग इलाके में धारा-144 के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मासूम की माता पिता क्लाइमेट एजेंडा नाम का एक एनजीओ चलाते हैं और पुलिस ने उन्हें नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पकड़ लिया था। प्रियंका ने इसपर ट्वीट कर कहा था कि बीजेपी सरकार इतनी अमानवीय है कि एक मासूम को उसके माता-पिता से अलग कर दिया। हालांकि, अब उन्हें रिहा कर दिया गया है। बीएसपी चीफ ने बिना जिक्र किए इसी मामले को उठाकर प्रियंका पर अटैक किया है कि यूपी में तो मासूमों के नाम पर राजनीति करती हैं, लेकिन उन्हें कांग्रेस शासित राजस्थान में सौ से ज्यादा मासूमों की चिंता नहीं हो रही है।

    मोदी-योगी विरोधी चेहरा बनने की कोशिश

    मोदी-योगी विरोधी चेहरा बनने की कोशिश

    प्रियंका के खिलाफ मायावती का हमला दरअसल पूरी तरह से यूपी की राजनीति से जुड़ा हुआ है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लखनऊ समेत यूपी के कई इलाकों में काफी उग्र प्रदर्शन और जबर्दस्त हिंसा हुई है। इसे नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने कई जगह पर सख्ती का भी इस्तेमाल किया। इस मौके का राजनीतिक फायदा उठाने में फिलहाल प्रियंका गांधी वाड्रा यूपी की दोनों बड़ी विपक्षी पार्टियों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से कहीं आगे निकलती दिखाई दे रही हैं। मसलन, अपनी ही सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर वह सीएए विरोधी प्रदर्शन में गिरफ्तार पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी के परिवार वालों से मिलने के लिए 8 किलोमीटर तक बिना सुरक्षा स्कूटी पर चली गईं। उन्हें जहां भी मौका मिला उन्होंने खुद को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल लोगों के साथ खड़ा कर लिया। वह एक महिला सीओ पर गला पकड़ कर गिराने जैसे आरोप लगाकर भी सुर्खियां बटोरती रहीं। यहां तक कि एक विशेष प्रेस कांफ्रेंस में सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर उनके 'भगवा लिबास' से जोड़कर सीधा निशाना साध दिया। लेकिन, इस दौरान विपक्षी चेहरे के रूप में बहनजी कहीं नहीं दिखाई पड़ीं। इस तरह से उन्होंने यूपी में योगी और मोदी सरकार के खिलाफ खुद को एक मुखर चेहरा बना लिया है, जिसमें फिलहाल सियासी बुआ और बबुआ पिछड़ते दिखाई दे रहे हैं।

    भीम आर्मी चीफ से प्रियंका की सियासी नजदीकी

    भीम आर्मी चीफ से प्रियंका की सियासी नजदीकी

    मायावती की प्रियंका से सियासी नाराजगी की एक वजह भीम आर्मी भी हो सकती है, जिसके मुखिया से लोकसभा चुनावों के दौरान अस्पताल में प्रियंका की मुलाकात की खबरें सुर्खियां बनीं थीं। आज की तारीख में भीम आर्मी न सिर्फ कांग्रेस के साथ कदमताल करते हुए सीएए का मुखर विरोध कर रहा है, बल्कि इसके चलते चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण तिहाड़ जेल भी पहुंच चुके हैं। भीम आर्मी चीफ ने ऐलान किया है कि वह एक नई राजनीतिक पार्टी बनाना चाहते हैं। जाहिर है कि अगर ऐसा हुआ तो यूपी में वह बीएसपी को ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी की मुखालफत करते हुए उनके राजनीतिक पार्टी बनाने के मंसूबे के पीछे कांग्रेस भी हो सकती है। क्योंकि, हाल ही में चंद्रशेखर ने कहा था कि उन्होंने बसपा के साथ हाथ मिलाने की काफी कोशिश की, लेकिन उसकी नेता इसके लिए तैयार नहीं हुईं। शायद इन्हीं वजहों से बीएसपी चीफ को लग रहा है कि यूपी में बीजेपी सरकार के खिलाफ प्रियंका और उनके सियासी भाई चंद्रशेखर की सक्रियता कहीं उनका और राजनीतिक बंटाधार न कर दे! इसलिए जब उन्हें कोटा ने मौका दिया तो वो कांग्रेस की यूपी प्रभारी महासचिव पर बरस पड़ीं।

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