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क्या है गुरुद्वारा रकाबगंज विवाद? कैसे शुरू हुआ और क्या है कहानी? जानें सबकुछ

दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज के निर्माण को लेकर विवाद एक बार फिर शुरू हो गया है। यह विवाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा के बयानों के बाद सामने आया है।

सिरसा ने अपने एक बयान में कहा कि मस्जिद गिरा कर गुरुद्वारा रकाबगंज का निर्माण हुआ था। जिसके बाद सियासत गरमा गई। हालांकि, सिरसा ने अपने इस बयान के पीछे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा प्रकाशित पुस्तक का हवाला जरूर दिया था। आइए हम जानते हैं क्या है इतिहास?

Gurdwara Rakabganj controversy

क्या है रकाबगंज गुरुद्वारा की कहानी?
सिखों के नौंवे गुरु 'गुरु तेग बहादुर जी' के बलिदान के बाद 11 नवंबर 1675 को गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु बने। 1707 में गुरु गोविंद सिंह ने दोनों स्थानों की निशानदेही की। एक जहां गुरु तेग बहादुर जी का जहां बलिदान हुआ था, वहां शीशगंज गुरुद्वारा है। दूसरा, जहां धड़ का संस्कार हुआ था, वहां पर गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब है।

1783 में गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब वाले स्थान को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसके बाद खोदाई करावाई गई, तो स्थान से अस्थियां निकली। उसके बाद वहां गुरुद्वारा बनाने का निर्णय हुआ। बाबा बघेल सिंह, बाबा जस्सा सिंह आहलूवालिया और बाबा जस्सा सिंह रामगढ़िया ने वहां गुरुद्वारा बनवाया। अहम बात यह रही कि कोई मस्जिद नहीं गिराई गई गई थी। गुरुद्वारा के पास नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) कार्यालय बना है। जिसे आज भी रकाबगंज मस्जिद कहा जाता है।

क्या था सिरसा का बयान? जिसपर विवाद
दरअसल, मनजिंदर सिंह सिरसा ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा प्रकाशित पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि सिख योद्धा बाबा बघेल सिंह ने 1783 में मस्जिद ध्वस्त कर गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब का निर्माण किया था। इसपर, शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) के प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना व अन्य सिख नेताओं ने विरोध जताया और कार्रवाई करने की मांग की।

सिरसा का किया डीएसजीएमसी ने समर्थन
उधर, डीएसजीएमसी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने सिरसा के बयान का समर्थन किया और सरना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।कालका ने कहा कि सिखों की सर्वोच्च संस्था एसजीपीसी द्वारा 2018 में प्रकाशित पुस्तक शहीदी जीवन (गुरबख्श सिंह लिखित) के पेज नंबर 32 पर स्पष्ट लिखा है कि बाबा बघेल सिंह ने मस्जिद ध्वस्त कर गुरुद्वारा साहिब स्थापित किया था।

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