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Green Hydrogen: क्या है ग्रीन हाइड्रोजन? जिसका भारत को हब बनाना चाहते हैं PM मोदी, क्या होगा इससे फायदा

Green Hydrogen: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 78वें स्वतंत्रता दिवस पर संबोधित करते हुए कहा है कि वे भारत को 'ग्रीन हाइड्रोजन' का हब बनाना चाहते हैं। पीएम मोदी ने कहा, ''हम भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र बनाना चाहते हैं, इसमें ग्रीन जॉब बढ़ाने की भी क्षमता है।''

पीएम मोदी ने कहा कि, अपने तीसरे कार्यकाल में उन्होंने जिन लोगों से मुलाकात की, उनमें से अधिकांश भारत में निवेश करना चाहते थे। ऐसे में अगर भारत ग्रीन हाइड्रोजन का हब बनता है तो, इससे रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। केंद्र सरकार ने नेशनल हाइड्रोजन मिशन भी लॉन्च किया गया है। आइए जानें क्या है ग्रीन हाइड्रोजन?

Green Hydrogen PM modi

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What is Green Hydrogen: क्या है ग्रीन हाइड्रोजन?

H2O यानी पानी से...ये तो हमने भी किताबों में पढ़ा है। सरल शब्दों में कहे तो इसमें दो कण हाइड्रोजन यानी H2 के हैं। एक हिस्सा ऑक्सीजन (O) का है। अब इसको इलेक्ट्रोलाइजर से अलग कर दे तो सिर्फ हाइड्रोजन बचेगा, उसे ही ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाता है। ग्रीन हाइड्रोजन, वह धातु है जो बिजली का करंट पैदा करके अणुओं को तोड़ने का काम करता है।

अब सवाल ये उठता है कि ग्रीन हाइड्रोजन कहां से और कैसे मिलेगा? तो बता दें कि ग्रीन हाइड्रोजन सौर, पवन और जल ऊर्जा की मदद से मिलता है। इससे पनचक्की चलाकर बिजली पैदा की जाती है। उसके बाद बिजली से इलेक्ट्रोलाइजर की मदद से पानी के अणुओं को तोड़कर ग्रीन हाइड्रोजन पैदा किया जाता है। ग्रीन हाइड्रोजन में कार्बन फुटप्रिंट कम होता है।

ग्रीन हाइड्रोजन के तहत विद्युत द्वारा जल (H2O) को हाइड्रोजन (H) और ऑक्सीजन (O2) में विभाजित किया जाता है।

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भारत को ग्रीन हाइड्रोजन से क्या फायदा होगा?

ग्रीन हाइड्रोजन भारत को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जा सकता है। ग्रीन हाइड्रोजन में जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने में भी मदद कर सकता है। देश हर साल ऊर्जा के लिए 12 ट्रिलियन रुपये (12 लाख करोड़) खर्च करता है। जिसका ज्यादातर हिस्सा जीवाश्म ईंधन को जाता है। ग्रीन हाइड्रोजन से जीवाश्म ईंधन की खपत कम होगी। इससे धीरे-धीरे मौसम सुधरेगा और गर्मी भी कम होगी।

भारत इससे जीवाश्म ईंधन पर अपनी आयात निर्भरता को कम कर सकता है। भारत ने इसके लिए नेशनल हाइड्रोजन मिशन भी बनाया है। इसके पीछे ग्रीन हाइड्रोजन के टारगेट को पूरा करने का मकसद है।

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