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Citizenship Amendment Bill: जानिए क्या है नागरिकता संशोधन बिल?

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नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को तीखी बहस के बीच नागरिकता संशोधन बिल पेश हो गया है, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल को पेश किया , विपक्ष के भारी विरोध के कारण बिल सीधे पेश नहीं हो पाया, बल्कि मतदान के जरिए पेश हुआ, लोकसभा में बहुमत होने के कारण भाजपा को इसमें दिक्कत नहीं आई और बड़े अंतर के साथ सरकार ने इस बिल की पहली परीक्षा को पास कर लिया है, आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल पेश करने के पक्ष में 293 और पेश करने के विरोध में 82 वोट पड़े, सोमवार को सदन में कुल मतदान 375 हुआ था।

    Citizenship amendment bill पर आखिर क्यों है Dispute, जानिये सबकुछ । वनइंडिया हिंदी

    ऐसे में यहां ये जानना बेहद जरूरी है कि आखिर नागरिकता संशोधन बिल है क्या और इस पर बवाल क्यों मचा है?

    नागरिकता संशोधन बिल

    नागरिकता संशोधन बिल

    दरअसल नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में 'नागरिकता अधिनियम' 1955 में बदलाव के लिए लाया गया है। केंद्र सरकार ने इस विधेयक के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना वैध दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए उनके निवास काल को 11 वर्ष से घटाकर छह वर्ष कर दिया गया है। यानी अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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     नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव

    नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव

    नागरिकता संशोधन बिल से नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा, नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा।

    क्यों हो रहा है विरोध?

    क्यों हो रहा है विरोध?

    इस बिल का विरोध करने वाले नागरिकता अधिनियम में इस संशोधन को 1985 के असम करार का उल्लंघन बता रहे है, जिसमें सन 1971 के बाद बांग्लादेश से आए सभी धर्मों के नागरिकों को निर्वासित करने की बात थी, असम में बीजेपी की गठबंधन पार्टी असम गण परिषद बिल को स्वदेशी समुदाय के लोगों के सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के खिलाफ बताया है। कृषक मुक्ति संग्राम समिति एनजीओ और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन भी इस बिल के विरोध में मुखर रूप से सामने आए हैं।

    असम समझौते के प्रावधानों का विरोध

    असम समझौते के प्रावधानों का विरोध

    नागरिकता संशोधन बिल का सबसे ज्यादा विरोध पूर्वोत्तर के राज्यों में हो रहा है, पूर्वोत्तर के लोगों के एक बड़े तबके और संगठनों का कहना है कि यह बिल आने के बाद 1985 में हुए असम समझौते के प्रावधानों को प्रभावहीन कर देगा, यह समझौता 24 मार्च, 1971 के बाद के सभी अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने की बात कहता है, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो।

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    English summary
    Indian Citizenship Amendment Bill proposed in the Lok Sabha on July 19, 2016, amending the Citizenship Act of 1955.
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