Bucket Scam क्या है? अरुणाचल प्रोफेसर ने ₹2,500 में एक बाल्टी खरीदी! ₹55,000 की रिश्वत कमाई-CBI ने पकड़ा
What is Bucket Scam: एक बाल्टी की कीमत ₹2,500? यह कोई मजाक नहीं, बल्कि अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में सामने आए एक सनसनीखेज भ्रष्टाचार घोटाले की हकीकत है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 23 जुलाई 2025 को कृषि महाविद्यालय, पासीघाट के सहायक प्रोफेसर पवनकुमार गौदर और स्थानीय सप्लायर मैट्रिक्स सॉल्यूशंस के मालिक आनंद कुमार द्विवेदी को ₹55,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
यह कार्रवाई एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश करती है, जिसमें 30 प्लास्टिक बाल्टियों को असल कीमत से दोगुने से ज्यादा दर पर खरीदने का मामला सामने आया है।

What is Bucket Scam: क्या है 'बाल्टी घोटाला'?
सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, गौदर ने द्विवेदी और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। इस साजिश का मकसद था- 'कॉलेज को नुकसान पहुंचाकर अनुचित लाभ कमाना'। 3 जुलाई 2025 को मैट्रिक्स सॉल्यूशंस ने कॉलेज को 30 मिल्टन ब्रांड की प्लास्टिक बाल्टियां सप्लाई कीं, जिनका बिल ₹75,000 (प्रति बाल्टी ₹2,500) बनाया गया। लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि इन बाल्टियों की वास्तविक बाजार कीमत ₹36,000 (प्रति बाल्टी ₹1,200) थी। इस बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए बिल में ₹39,000 का अंतर था, जिसे गौदर ने रिश्वत के रूप में मांगा। इसके अलावा, पिछले सौदों के लिए बकाया ₹24,000 की रिश्वत भी मांगी गई, जिसे मिलाकर कुल ₹63,000 की मांग थी।
द्विवेदी ने ₹55,000 देने पर सहमति जताई। सीबीआई को सूचना मिली कि 23 जुलाई को पासीघाट में यह रिश्वत दी जाएगी। इसके बाद, सीबीआई ने जाल बिछाया और दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया।
पहले भी मिली थी रिश्वत
जांच में यह भी पता चला कि मई 2025 में गौदर को द्विवेदी ने एक निर्दिष्ट बैंक खाते में ₹1.95 लाख की रिश्वत दी थी। यह राशि कॉलेज को विभिन्न सामानों की सप्लाई में तरजीही व्यवहार और अनुबंध देने के बदले में दी गई थी। सीबीआई ने इस मामले में आपराधिक साजिश, सार्वजनिक सेवक द्वारा रिश्वत मांगने, और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 8, 9, 10, और 12 के तहत मामला दर्ज किया है।
सीबीआई की कार्रवाई
सीबीआई को एक गुप्त सूचना मिली थी कि गौदर और द्विवेदी के बीच रिश्वत का लेन-देन होने वाला है। 21 जुलाई को गौदर ने द्विवेदी को ₹55,000 की रिश्वत देने की याद दिलाई। इसके आधार पर, सीबीआई ने 23 जुलाई को पासीघाट में ऑपरेशन चलाया और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। प्राथमिकी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच गुवाहाटी की सीबीआई एंटी-करप्शन ब्रांच को सौंपी गई है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
सोशल मीडिया पर इस घोटाले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक यूजर ने लिखा, '₹2,500 में एक बाल्टी? ये तो भ्रष्टाचार की हद है!' एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, 'शिक्षा संस्थानों में ऐसी हरकतें शर्मनाक हैं। सीबीआई को और सख्ती करनी चाहिए।' यह मामला सोशल मीडिया पर 'बाल्टी घोटाला' के नाम से वायरल हो रहा है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
भ्रष्टाचार के मामलों के जानकारों का कहना है कि छोटे-छोटे अनुबंधों में भी रिश्वत का खेल शिक्षा और सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाता है। एक पूर्व सीबीआई अधिकारी ने कहा, 'ऐसे मामले दिखाते हैं कि भ्रष्टाचार कितनी गहरी जड़ें जमा चुका है। छोटी राशि हो या बड़ी, हर स्तर पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।'
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