क्या है ब्रेन-ईटिंग अमीबा? केरल में अब तक 19 लोगों की मौत, जानें इसका संक्रमण क्यों है इतना खतरनाक?
Brain Eating Amoeba Kerala: केरल में इन दिनों ब्रेन-ईटिंग अमीबा यानी प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। साल 2025 में अब तक 69 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 19 लोगों की मौत हो चुकी है। यह बीमारी जितनी दुर्लभ है, लेकिन उतनी ही घातक भी, क्योंकि यह सीधे दिमाग पर हमला करती है।
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि अमीबा आखिर दिमाग तक कैसे पहुंचता है और वहां जाकर उसे नष्ट कैसे करता है?विशेषज्ञ बताते हैं कि "ब्रेन-ईटिंग अमीबा" के लक्षण शुरुआती दौर में साधारण बुखार या सिरदर्द जैसे दिखते हैं, लेकिन बीमारी तेजी से जानलेवा बन जाती है।

इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि ब्रेन-ईटिंग अमीबा क्या है, यह कितना खतरनाक है, इसके कारण क्या हैं और इसके लक्षण कैसे पहचानें।।
What Is Brain-Eating Amoeba? क्या है प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM)?
केरल स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह एक दुर्लभ लेकिन घातक संक्रमण है जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से Naegleria fowleri नामक सूक्ष्म अमीबा से होता है, जिसे आमतौर पर ब्रेन-ईटिंग अमीबा कहा जाता है। यह दिमाग के ऊतकों को नष्ट कर देता है और गंभीर ब्रेन स्वेलिंग (मस्तिष्क सूजन) का कारण बनता है, जिससे अधिकांश मामलों में मौत हो जाती है।
Symptoms: इसके लक्षण क्या हैं?
चिकित्सकों के अनुसार, शुरुआती लक्षण मेनिंगाइटिस जैसे लगते हैं और जब तक अन्य संभावित कारणों को खारिज करके PAM की पुष्टि होती है, तब तक बीमारी तेजी से बढ़ चुकी होती है।
कई मामलों में मरीज को गंभीर मस्तिष्क सूजन (cerebral edema) हो जाती है, जिससे मौत का खतरा बढ़ जाता है। ब्रेन-ईटिंग अमीबा के लक्षण बैक्टीरियल मेनिंगाइटिस से मिलते-जुलते होते हैं। इनमें शामिल हैं:
- तेज सिरदर्द, बुखार, मतली और उल्टी
- सूंघने या स्वाद में गड़बड़ी (कभी-कभी)
- गंभीर मामलों में मस्तिष्क में सूजन और बेहोशी
संक्रमण की मुख्य विशेषताएँ
केरल स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक PAM के कुछ प्रमुख लक्षण और परिस्थितियाँ इस प्रकार हैं:
- यह रोग अक्सर स्वस्थ बच्चों, किशोरों और युवाओं को प्रभावित करता है।
- अधिकतर मामले गर्मियों के मौसम और गर्म जलवायु में सामने आते हैं।
- लक्षण तेजी से बढ़ते हैं और 1-2 दिनों में स्थिति गंभीर हो जाती है।
- यह अमीबा नाक के जरिए दिमाग तक तेजी से पहुंचता है और इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है।
- संक्रमण होने पर इलाज मुश्किल हो जाता है क्योंकि सही पहचान होने तक बीमारी बहुत आगे बढ़ चुकी होती है।
- बीमारी का प्रगति दर बेहद तेज होता है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।
केरल सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा?
मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि इस साल के मामलों में अलग-अलग जगहों पर व्यक्तिगत संक्रमण मिले हैं, किसी भी साझा जलस्रोत से फैले क्लस्टर संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। 2024 में ऐसा देखा गया था जब एक ही जलस्रोत से कई लोगों को संक्रमण हुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को गर्म पानी के तालाब, झील और नदियों में तैरते समय सावधानी बरतनी चाहिए। नाक के जरिए पानी के प्रवेश से बचना चाहिए और साफ पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए।












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