वक्फ विधेयक का मदरसों और मुस्लिम शिक्षा के लिए क्या है मायने?

Waqf Amendment Bill: वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने के बाद ये कानून लागू हो चुका है। इस विधेयक के लागू होने के बाद वक्‍फ के वास्‍तविक उद्देश्‍य और जमीनी हकीकत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुस्लिम समुदाय पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर बहस छिड़ चुकी है। जिसमें मुस्लिम शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी इसमें शामिल है।

हालांकि सरकार के अनुसार वक्फ संशोधन कानून, वक्‍फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में सुधार करने के मकसद से बनाया गया है लेकिन मुस्लिम संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। इतना ही नहीं उत्‍तर प्रदेश में सोशल मीडिया पर झूठा दावा किया जा रहा है कि वक्‍फ कानून के तहत कार्रवाई शुरू हो चुकी है और यूपी में मदरसों को सील किया जा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं वक्फ संशोधन विधेयक का मदरसों और मुस्लिम शिक्षा के लिए क्या है मायने है? क्‍या सच में इस पर कोई असर होगा?

Waqf Amendment Bill

बता दें वक्फ की संपत्तियां पारंपरिक रूप से मस्जिदों, मदरसों (इस्लामिक स्कूलों), अनाथालयों और अन्य सामुदायिक कल्याण के लिए प्रयोग की जाती रही हैं। हालांकि वक्फ की संपत्तियां का इनके लिए उपयोग कम ही किया गया उन पर अतिक्रमण किया गया। ये ही कारण कि वक्‍फ की संपत्ति के कुप्रबंधन में सुधार और बेहतर प्रशासन और सामुदायिक विकास के लिए इन संपतियों के सही उपयोग के लिए वक्‍फ संशोधन विधेयक की आवश्‍यकता पड़ी है।

देश भर में हैं 8.72 लाख पंजीकृत वक्फ संपत्तियां

वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया (WAMSI) पोर्टल के अनुसार, देश भर में लगभग 8.72 लाख पंजीकृत वक्फ संपत्तियां हैं, जो 38 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई हैं। राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा वक्फ की संपतियों को प्रबंधन किया जाता है। वहीं वक्फ संधोशन विधेयक जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियां जो मुस्लिम कानून के तहत धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए दान की गई उनको नियंत्रित करने वाले मौजूदा ढांचे में सुधार करना है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस कहा "हमने इसे किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया है। वफ्फ संशोधन विधेयक मुख्य रूप से संपत्ति प्रबंधन और शासन के बारे में है।"

"वक्‍फ बोर्ड अगर मदद कर रहा होता तो मुस्लिम समाज शिक्षा में आगे होता"

वरिष्‍ठ पत्रकार नावेद शिकोह का कहना है कि "वक्फ का उद्देश्य धर्मार्थ, गरीबों की सहायता, शिक्षा खासकर धार्मिक तालीम को आगे बढ़ाना भी है। लेकिन वक्फ बोर्ड अपने उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करते। खासकर शिक्षा में तो उनका योगदान ना के बराबर रहा है। वक्फ बोर्ड की सम्पत्तियों की आर्थिक ताकत को यदि मुस्लिम समाज की शिक्षा में लगाया गया होता तो आज मुस्लिम समाज शिक्षा में सबसे आगे होता। जबकि इसके विपरीत ये समाज शिक्षा में बेहद पिछड़ा है। मदरसों को वक्फ बोर्ड की आर्थिक मदद मिल रही होती तो केंद्र और सरकारों को मदरसों की वित्तीय सहायता नहीं देनी पड़ती।"

क्‍या मुस्लिम शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा?

उत्‍तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा भाजपा के पूर्व अध्‍यक्ष शफ़ाअत हुसैन ने कहा मदरसे मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा दिए गए इमदाद(दान या सहायता) और जकात के पैसे से चलते हैं। वक्फ बोर्ड का मदरसे के संचालन से कोई लेना देना नहीं होता है।वक्‍फ से होने वाली आमदनी से विधवा पेंशन, गरीब बच्‍चों की पढ़ाई छात्रवृति दी जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।"

उन्‍होंनें कहा "वक्‍फ की संपत्ति का फायदा, मुतवल्‍ली और मंत्री समेत बोर्ड के लोग उठाते रहे हैं। जिन पर इस वक्‍फ संशोधन बिल से लगाम लगेगी और वक्‍फ की संपत्ति पर मुस्लिम समाज की लड़कियों के लिए कॉलेज खुलेगे, मुस्लिम समाज के गरीब बच्‍चों की शिक्षा पर खर्च होगा। हर मायने में वक्‍फ संशोधन विधेयक मुसलमानों के फायदे के लिए है।"

क्‍या गिरा दिए जाएंगे मदरसे?

वहीं अल्‍पसंख्‍यक आरक्षण मोर्चा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और जेडीयू के वरिष्‍ठ नेता हाजी मोहम्‍मद परवेज सिद्धिकी जो इस वक्‍फ संशोधन विधेयक की खिलाफत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुके हैं। उनका कहना है कि "वक्‍फ की प्रापर्टी पर कई मदरसे चलते, कई जगहों पर स्‍कूल चल रहे हैं। कई ऐसी जमीनें हैं जहां पर वर्षो से मदरसे चल रहे हैं।"

उन्‍होंने कहा "वक्‍फ संशोधन विधेयक लागू होने के बाद उनकी जमीन के कागज मांगे जाएंगे अगर नहीं दिया गया तो उन्‍हें गिरा दिया जाएगा। वक्‍फ की बहुत जमीन हैं जिनके कागज नहीं है इसके बड़ी वजह थी कि मुस्लिम शिक्षित नहीं थे तो दस्‍तावेज नहीं होने के कारण मदरसे गिरा दिए जाएंगे। इससे मुस्लिम शिक्षा प्रभावित होगी। इससे निजी मदरसे भी प्रभावित होंगे।"

वक्‍फ संशोधन विधेयक का क्रियान्वयन अनिश्चितता को दूर करेगा

अलीगढ़ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रो. मुहम्मद सज्जाद ने मीडिया को दिए इंटरव्‍यू में कहा "हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। वक्‍फ संशोधन विधेयक का क्रियान्वयन ही अनिश्चितता को दूर करेगा।"

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