'नीच' राशि में जाने से क्या होता है ग्रहों का असर, मणिशंकर के बवाली बयान से ज्योतिष को समझिए
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ''नीच'' शब्द का इस्तेमाल किया जिससे इन दिनों राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है। बहरहाल राजनीति जो भी चले, हम ज्योतिष की नजर से इस ‘‘नीच‘‘ शब्द की पड़ताल करते हैं कि आखिर इसका मतलब क्या होता है।

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ''नीच'' शब्द का इस्तेमाल किए जिससे इन दिनों राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है। खासकर ऐसे समय में जब गुजरात में विधानसभा चुनाव का माहौल चरम पर है। कांग्रेस ने अपनी साख बचाने के लिए फौरन मणिशंकर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। लेकिन बात अभी थमी नहीं है, भाजपा ने जहां इस मौके को भुनाते हुए इसे चुनावी मुद्दे का रूप दे दिया है, वहीं कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी ने हालिया जारी बयान में कहा है कि भाजपा नेता भी कांग्रेस और उनके खिलाफ व्यक्तिगत बदजुबानी करते रहे हैं।

''नीच'' पर क्या कहता है ज्योतिष?
बहरहाल राजनीति जो भी चले, हम ज्योतिष की नजर से इस ‘‘नीच‘‘ शब्द की पड़ताल करते हैं कि आखिर इसका मतलब क्या होता है। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के लिए उच्च और नीच शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। नीच ग्रहों को पापी ग्रह या अंग्रेजी में मेलेफिक ग्रह भी कहा जाता है। माना जाता है कि ग्रह अपनी उच्च राशि में हो तो शुभ फल देता है और नीच राशि में हो या नीच का हो तो उल्टे प्रभाव देता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक ग्रह जिस राशि में उच्च का होता है, उससे सातवीं राशि में नीच का हो जाता है। उदाहरण के लिए सूर्य मेष राशि में उच्च का होता है तो इससे सातवीं राशि यानी तुला में नीच का होगा।

नीच का अर्थ है निम्न प्रभाव देने वाला ग्रह!
अब बात करते हैं नीच शब्द की। ज्योतिष शास्त्र में नीच शब्द का अर्थ किसी अपमानित करने वाले शब्द से नहीं है, बल्कि नीच का अर्थ है निम्न प्रभाव देने वाला ग्रह। नीच मतलब निचले स्तर का, अर्थात कम प्रभाव देने वाला या यूं भी कह सकते हैं जिसका ज्यादा प्रभाव नहीं रहता। जो ग्रह उच्च का होता है वह अपना पूर्ण प्रभाव देता है और संबंधित जातक को समस्त प्रकार के शुभ परिणाम देता है, लेकिन जो ग्रह नीच का होता है वह स्वयं किसी प्रभाव में नहीं रहता या कम प्रभावी रहता है। इसलिए जो ग्रह स्वयं ही प्रभावी नहीं है, वह जातक को कैसे शुभ परिणाम देगा।

मणिशंकर अय्यर के बयान का मतलब
यदि ज्योतिष की इस मैथेडोलॉजी को मणिशंकर अय्यर के ‘‘नीच‘‘ शब्द से जोड़कर देखा जाए तो इसका यह भी अर्थ निकलता है कि प्रधानमंत्री देश और जनता पर अपना पूर्ण प्रभाव दिखाने में असफल रहे। नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दों से न केवल जनता, बल्कि व्यापारी वर्ग भी नाराज है, तो कहीं न कहीं वे इन योजनाओं में जनता का विश्वास जीतने में असफल रहे।

जरूरी नहीं कि अशुभ परिणाम ही दे नीच ग्रह
हम फिर ज्योतिष पर लौटते हैं। भृगु संहिता या अन्य जितने भी कुंडली विश्लेषण करने वाले ग्रंथ हैं, उनकी बात मानें तो यह जरूरी नहीं कि प्रत्येक नीच ग्रह अशुभ परिणाम ही देगा। कभी-कभी ग्रह नीच राशि में होने के बावजूद जातक को रंक से राजा तक बना देते हैं। यह उस जातक की कुंडली के अन्य ग्रहों की स्थिति के कारण होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री भी तमाम बाधाओं और प्रारंभिक परेशानियों, विरोधों के बावजूद अपने लक्ष्य तक पहुंचने में कामयाब होंगे।

न ठहराया जाए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार
जिस तरह जन्म कुंडली का विश्लेषण किसी एक ग्रह के आधार पर नहीं किया जा सकता, उसी तरह यदि देश को एक जन्म कुंडली की तरह माना जाए तो इसमें जनता, मंत्रिमंडल के सदस्य, विपक्ष आदि सभी मिलकर अपना प्रभाव दिखाते हैं। इसलिए देश की तरक्की, विकास और प्रभाव भी सभी को मिलकर सुनिश्चित करना होगा। किसी एक व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।












Click it and Unblock the Notifications