Bengal Voter List: बिना बताए कट रहे वोटरों के नाम! बंगाल की वोटर लिस्ट में सिस्टम का खेल, अफसरों ने उठाई आवाज
West Bengal Voter List Row SIR 2026: पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बीच राज्य के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने गंभीर चिंता जताई है। अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम-जनित (system-driven) तरीके से मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं, जबकि EROs को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके बावजूद अधिकारी खुद इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं।
पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (कार्यकारी) अधिकारियों के संघ ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल को पत्र लिखकर बताया कि EROs की भूमिका पूरी तरह से नजरअंदाज की जा रही है। पत्र में कहा गया कि "ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल से मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, बिना ERO की जानकारी के, जो कानूनन जिम्मेदार है।"

🔵 ERO की जिम्मेदारी और सॉफ्टवेयर की भूमिका (System Driven Deletion)
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक ERO ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सभी नोटिस केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) के पोर्टल से जेनरेट हो रहे हैं। अधिकारी सिर्फ नोटिस जेनरेट करने का बटन दबाते हैं, लेकिन असली नोटिस सिस्टम से अपने आप बन जाता है।
इसके तहत उन मतदाताओं को नोटिस भेजा जा रहा है, जो 2002 के SIR डेटा से मैप नहीं हैं। वहीं डेटा में "लॉजिकल डिस्केपेंसी" वाले मतदाताओं के लिए अधिकारी तय नहीं कर सकते कि किसे हियरिंग के लिए बुलाया जाएगा।
🔵 जनता को ERO से भ्रमित न करें
संगठन के महासचिव सैकट आस्राफ अली ने कहा कि आम जनता इस प्रक्रिया में भ्रमित हो सकती है। लोग केवल EROs को दोषी मान सकते हैं, जबकि असल में वे नाम कटने की प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं। उनका कहना है कि ECI को पारदर्शिता के साथ स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर अंतिम जिम्मेदारी EROs पर नहीं है।
🔵 कानूनी प्रावधानों की अनदेखी
संगठन ने ध्यान दिलाया कि Representation of the People Act, 1950 के तहत मतदाता का नाम तभी हटाया जा सकता है जब वह उस निर्वाचन क्षेत्र में स्थायी रूप से निवास नहीं करता या अन्य कारणों से पंजीकरण के योग्य नहीं है। साथ ही प्रत्येक मतदाता को अपनी सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। परंतु, सिस्टम-जनित नाम कटाव से EROs को अपनी कानूनी जिम्मेदारियां निभाने का अवसर नहीं मिलता।
🔵 31 लाख नोटिस और लॉजिकल डिस्केपेंसी
अधिकारी बताते हैं कि 2002 SIR डेटा से मैप न होने वाले मतदाताओं की संख्या लगभग 31 लाख है। इसके अलावा लॉजिकल डिस्केपेंसी वाले मतदाता 1.36 करोड़ हैं। कुल मिलाकर 1.67 करोड़ मतदाता अलग-अलग कैटेगरी में आते हैं। हालांकि विश्लेषण के बाद यह संख्या बदल भी सकती है।
🔵 ECI ने राज्यों को दिए निर्देश
संगठन के पत्र के दिन ही ECI ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के CEO को निर्देश भेजा कि सभी डाक्यूमेंट्स की पुष्टि जिला निर्वाचन अधिकारियों के जरिए पांच दिन में की जाए। बिहार में SIR में यह कदम नहीं उठाया गया था।
WBCS का कहना है कि ERO को स्पष्ट अधिकार और जिम्मेदारी दी जाए ताकि अंतिम मतदाता सूची (फाइनल वोटर लिस्ट) ERO के हस्ताक्षर और मुहर के साथ प्रकाशित हो, लेकिन ECI की देखरेख में। उनका यह भी कहना है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलती से नहीं हटना चाहिए।
🔵 क्या आम मतदाता जान पाएंगे सच?
इस पूरे विवाद से सवाल उठता है कि क्या आम मतदाता समझ पाएंगे कि सिस्टम-जनित नोटिसों और नाम कटन में में ERO का हाथ नहीं हैं। अधिकारी चाहते हैं कि ECI स्पष्ट रूप से यह जानकारी जनता को दे। पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया और सिस्टम-जनित नाम कटने की इस पूरी स्थिति ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और EROs की कानूनी जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में राजनीतिक चर्चाओं में गर्मी ला सकता है।
🔵 West Bengal SIR: सुनवाई में दस्तावेज से कानूनी चेतावनी तक, मतदाताओं के लिए क्या जरूरी
West Bengal Voter Verification: पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR के तहत 27 दिसंबर 2025 से सुनवाई चरण शुरू हो रहा है, जो 7 फरवरी 2026 तक चलेगा। इस प्रक्रिया में करीब 32 लाख ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में खुद, माता-पिता या दादा-दादी के स्तर पर नहीं मिल पाया है। इन मतदाताओं को 'अनमैप्ड' माना गया है।
सुनवाई के दौरान चुनाव अधिकारी मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच, फोटो खींचने, हस्ताक्षर या अंगूठा निशान लेने और सभी रिकॉर्ड को ERONET सॉफ्टवेयर पर अपलोड करेंगे। हर विधानसभा क्षेत्र में स्कूलों और सरकारी दफ्तरों जैसे स्थानों पर कई सुनवाई केंद्र बनाए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में हजारों अधिकारी और बूथ लेवल कर्मी तैनात रहेंगे।
चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, CAA के तहत मिली नागरिकता को भी नए मतदाता पंजीकरण में मान्य दस्तावेज माना जाएगा, जिससे खासकर मटुआ समुदाय को राहत मिल सकती है।
🔵 West Bengal Draft Voters List SIR 2026: पश्चिम बंगाल ड्राफ्ट मतदाता सूची की जानकारी
पश्चिम बंगाल में SIR 2026 के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर को जारी किए गए थे। इस प्रक्रिया के पहले चरण में राज्य के कुल 7 करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 मतदाताओं को कवर किया गया है। इनमें से 7 करोड़ 8 लाख 16 हजार 616 मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, यानी करीब 92.4 प्रतिशत फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा हो गया है।
SIR के दौरान 58 लाख से ज्यादा नाम ऐसे पाए गए हैं, जिन्हें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट होने के आधार पर हटाया गया है। वहीं 31 लाख 38 हजार 374 मतदाता ऐसे हैं, जिनका 2002 की मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया है। इन मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा, जो आज से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक चलेगी।
जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर BLO के पास या voters.eci.gov.in, ECINET ऐप के जरिए आवेदन कर सकते हैं। ड्राफ्ट सूची ऑनलाइन और स्थानीय सरकारी दफ्तरों में उपलब्ध है। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।
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