Bengal SIR: गजब की घर वापसी, कौन है शरीफ अहमद? मरने के 28 साल बाद कैसे हो गया जिंदा?
West Bengal SIR: कभी-कभी हकीकत किसी फिल्मी पटकथा से भी ज्यादा हैरान करने वाली होती है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक ऐसा ही चमत्कारिक मामला सामने आया है, जिसने उम्मीद की सारी सीमाओं को पीछे छोड़ दिया। साल 1997 में अचानक लापता हुए शरीफ अहमद, जिन्हें उनके परिवार और चार बेटियों ने लगभग तीन दशक पहले मृत मान लिया था। अब 28 साल बाद वो अचानक अपने घर की दहलीज पर खड़े मिले।
अब 79 वर्ष के हो चुके शरीफ अहमद का वापस आना उनके परिवार के लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था। पश्चिम बंगाल में चल रही चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के सत्यापन ने उन्हें अपने पुराने घर का पता खोजने पर मजबूर किया। सालों बाद जब वे लौटे, तो न उनके पिता जीवित थे और न भाई, लेकिन उनकी मौजूदगी ने पूरे गांव की आंखों में आंसू ला दिए।

1997 का वो मंजर जब टूट गया था संपर्क
शरीफ अहमद की कहानी साल 1997 में शुरू हुई थी। पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने दूसरी शादी की और काम की तलाश में पश्चिम बंगाल चले गए। शुरुआत में तो बातचीत हुई, लेकिन धीरे-धीरे संपर्क के सारे सूत्र टूट गए। उनके भतीजे वसीम अहमद बताते हैं कि परिवार ने उन्हें ढूंढने के लिए बंगाल की खाक छानी, दूसरी पत्नी के ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन जब वर्षों तक कोई सुराग नहीं मिला, तो सबने भारी मन से मान लिया कि शरीफ अब इस दुनिया में नहीं रहे।
वोटर लिस्ट और SIR ने लिखी वापसी की कहानी
शरीफ अहमद की इस वापसी के पीछे पश्चिम बंगाल की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया रही। दिसंबर 2025 के अंत में बंगाल में वोटर लिस्ट के सत्यापन के लिए उनसे पुराने दस्तावेजों की मांग की गई। अपनी पहचान साबित करने और जरूरी कागजात जुटाने की गरज से शरीफ अहमद को मुजफ्फरनगर की याद आई और वे 29 दिसंबर 2025 को अपने पुराने घर जा पहुंचे।
अपनों को ही पहचानना हुआ मुश्किल
जब शरीफ ने अपने घर का दरवाजा खटखटाया, तो परिवार सन्न रह गया। 28 साल का लंबा अंतराल उनके चेहरे पर झुर्रियों और सफेद बालों के रूप में साफ दिख रहा था।
शरीफ को घर आकर पता चला कि उनके पिता और भाई अब जीवित नहीं हैं। उनकी चार बेटियां और भतीजे उन्हें देखकर फूट-फूट कर रो पड़े। वसीम अहमद ने कहा, "हमने तो उम्मीद छोड़ दी थी, यह हमारे लिए किसी करिश्मे जैसा है।"
बंगाल में SIR को लेकर चल रहा है विवाद
शरीफ अहमद की वापसी ने उस SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को भी चर्चा में ला दिया है, जो बंगाल में सियासी संग्राम का कारण बनी हुई है। इसकी शुरुआत 4 नवंबर को हुई थी। 16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 58 लाख नाम हटाए गए। हटाए गए नामों में मृत, पते बदलने वाले और डुप्लीकेट वोटर्स शामिल हैं। इसी प्रक्रिया के तहत खुद को 'जीवित' साबित करने के चक्कर में शरीफ अहमद को यूपी आना पड़ा।
मुजफ्फरनगर में कुछ दिन बिताने और अपनों के साथ पुरानी यादें साझा करने के बाद, शरीफ अहमद वापस बंगाल के मेदिनीपुर लौट गए हैं। अब वे वहीं अपनी दूसरी पत्नी और परिवार के साथ रहते हैं। भले ही वे फिर चले गए हों, लेकिन मुजफ्फरनगर के उस परिवार को अब यह सुकून है कि उनका लापता सदस्य सात समंदर पार नहीं, बल्कि इसी मुल्क के एक कोने में सलामत है।
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