पश्चिम बंगाल: 14 मई को पंचायत चुनाव, हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार, चुनाव आयोग को ये नसीहत

विपक्षी बीजेपी, सीपीएम और कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस पर बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने और विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकने का आरोप लगाया है

नई दिल्ली। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों के कार्यक्रम में हस्तक्षेप नहीं करेगा यानि की अब पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में 14 मई को ही होगा। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग का आचरण ऐसा होना ही चाहिए जिससे वह निष्पक्ष दिखे। वह संवैधानिक दायित्वों को निभाने में विफल रहा है। कोर्ट ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने आवश्यक स्पष्टीकरण के बगैर पंचायत चुनावों को तीन चरणों की बजाय एक चरण में कराने का फैसला किया, जिससे संदेह उत्पन्न होता है।

एक तिहाई से ज़्यादा सीटों पर विजेता का फ़ैसला हो चुका है

एक तिहाई से ज़्यादा सीटों पर विजेता का फ़ैसला हो चुका है

पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए वोट तो इस महीने की 14 तारीख़ को पड़ेंगे, लेकिन उससे पहले ही एक तिहाई से ज़्यादा सीटों पर विजेता का फ़ैसला हो चुका है। यह महज़ संयोग नहीं है कि 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' के तर्ज पर विजेता सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के ही उम्मीदवार हैं। पंचायतों की 58,692 में से 20,076 सीटों पर बिना एक भी वोट पड़े विजेता तय हो गया है। नामांकन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा और अदालती लड़ाई की वजह से यह चुनाव शुरुआत से ही सुर्खियों में रहा है।

वाममोर्चा ने तो बीते महीने इसके ख़िलाफ छह घंटे बंगाल बंद भी बुलाया था

वाममोर्चा ने तो बीते महीने इसके ख़िलाफ छह घंटे बंगाल बंद भी बुलाया था

विपक्षी बीजेपी, सीपीएम और कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस पर बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने और विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकने का आरोप लगाया है। इसके ख़िलाफ़ विपक्षी दल अदालत का दरवाज़ा खटखटाने के अलावा सड़कों पर उतर चुके हैं। वाममोर्चा ने तो बीते महीने इसके ख़िलाफ छह घंटे बंगाल बंद भी बुलाया था।

तृणमूल कांग्रेस पर बड़े पैमाने पर हिंसा और आतंक फैलाने का आरोप

तृणमूल कांग्रेस पर बड़े पैमाने पर हिंसा और आतंक फैलाने का आरोप

विपक्षी राजनीतिक दल शुरू से ही तृणमूल कांग्रेस पर बड़े पैमाने पर हिंसा और आतंक फैलाने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका आरोप है कि तृणमूल के कथित बाहुबलियों ने विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र ही दायर नहीं करने दिया। बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा कहा है 'बंगाल में सीपीएम ने बिना चुनाव लड़े जीतने की परंपरा शुरू की थी। अबकी ममता ने इसका रिकॉर्ड बनाया है।'

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