Mukul Roy: ‘मुकुल रॉय की मौत या सियासी साजिश?’ बंगाल की राजनीति में छिड़ी ज़ुबानी जंग, TMC-BJP आमने-सामने
Mukul Roy Death Controversy: पश्चिम बंगाल की राजनीति के बड़े चेहरे मुकुल रॉय के निधन ने जहां एक ओर शोक की लहर दौड़ा दी, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। 22 फरवरी की रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे मुकुल रॉय अपने जीवन के अंतिम चरण में महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे।
23 फरवरी की दोपहर में उनका पार्थिव शरीर राज्य विधानसभा लाया गया, जहां सभी दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। लेकिन श्रद्धांजलि के इस माहौल के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी तेज हो गई। अब मुकुल रॉय की मौत को लेकर TMC-BJP आमने-सामने है।

TMC का सीधा हमला, BJP पर लगाए गंभीर आरोप (TMC vs BJP)
राज्य के मंत्री फिरहाद हकीम उर्फ बॉबी ने मीडिया से बात करते हुए बीजेपी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुकुल रॉय की असमय मौत के लिए बीजेपी जिम्मेदार है। उनके मुताबिक, मुकुल रॉय पर बीजेपी में शामिल होने का दबाव बनाया गया था और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए मानसिक तनाव दिया गया।
हकीम ने कहा कि मुकुल रॉय पार्टी के दूसरे नंबर के नेता थे और शुरुआती दौर से ही हर राजनीतिक संकट का समाधान माने जाते थे। उनका दावा है कि इसी भावनात्मक और राजनीतिक दबाव ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया।
BJP का पलटवार, TMC पर साधा निशाना (BJP Reaction)
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मुकुल रॉय ने पिछला चुनाव बीजेपी टिकट पर जीता था और उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। दिलीप घोष के मुताबिक, टीएमसी के दबाव में वे दोबारा पार्टी में लौटे और पिछले चार सालों से उनका बीजेपी से कोई संबंध नहीं था।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने समय से उनका बीजेपी से नाता नहीं था तो अब उनकी मौत के लिए पार्टी को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
बीजेपी की नेता शतरूपा घोष ने भी कहा कि मुकुल रॉय ने टीएमसी को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी। 2021 के बाद जब वे दोबारा टीएमसी में लौटे तो बीजेपी से उनका कोई संपर्क नहीं रहा। उन्होंने टीएमसी मंत्रियों से अपील की कि इस दुखद घटना को राजनीतिक रंग न दिया जाए।
कांग्रेस की टिप्पणी, 'वॉशिंग मशीन' वाला तंज (Congress Statement)
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कहा कि बीजेपी की पुरानी प्रवृत्ति है कि जो भी उनके खिलाफ बोलता है, उस पर दबाव बनाया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आज के दिन हमें मुकुल रॉय जैसे रंगीन और प्रभावशाली नेता को याद करना चाहिए, न कि सियासी बहस को हवा देनी चाहिए।
'चाणक्य' कहे जाते थे मुकुल रॉय (Mukul Roy Political Legacy)
मुकुल रॉय को बंगाल की राजनीति का चाणक्य माना जाता था। वे तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी को खड़ा किया। पार्टी का 'घास फूल' चुनाव चिह्न भी शुरुआती दौर में उनके नाम से पंजीकृत बताया जाता है।
केंद्र में मंत्री रह चुके रॉय ने बाद में राजनीतिक रास्ता बदला, बीजेपी में गए और फिर वापसी कर ली। लेकिन बीमारी के चलते वे सक्रिय राजनीति से लगभग दूर हो चुके थे।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री ममता ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि मुकुल रॉय के राजनीतिक अनुभव और सामाजिक योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें अपना लंबे समय का राजनीतिक सहयोगी और संघर्षों का साथी बताया। उन्होंने कहा कि मुकुल रॉय ने पार्टी की स्थापना से लेकर उसके विस्तार तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनकी कमी सभी राजनीतिक हलकों को महसूस होगी।
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा में उन्हें श्रद्धांजलि दी और परिवार के साथ अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए।
शोक या सियासत, क्या यही रहेगा सवाल?
मुकुल रॉय का जाना बंगाल की राजनीति के एक युग का अंत है। लेकिन जिस तरह उनके निधन के तुरंत बाद आरोपों की राजनीति शुरू हुई, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बंगाल में अब हर घटना सियासी जंग का मैदान बनेगी। फिलहाल, सियासत अपने रास्ते पर है और राजनीति के इस चाणक्य को लेकर छिड़ी बहस थमने का नाम नहीं ले रही है।












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