Poll Diary West Bengal Exit Poll 2026: क्या ढहेगा TMC का किला? पोल डायरी के आंकड़ों में BJP को बढ़त
Poll Diary West Bengal Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रण में लोकतंत्र का महापर्व अपने चरम पर है। राज्य की सभी 294 सीटों पर सत्ता के लिए मचे घमासान के बीच 'पोल डायरी' के ताजा अनुमानों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है।
बहुमत के जादुई आंकड़े 148 तक पहुंचने के लिए दोनों दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इन आंकड़ों ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है, जिससे मतदाताओं की चुप्पी ने भी बड़े उलटफेर के संकेत दिए हैं। उच्च मतदान प्रतिशत और आक्रामक चुनाव प्रचार ने इस बार के नतीजों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे बंगाल की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है।

पोल डायरी के अनुमानित आंकड़े
विभिन्न सर्वेक्षणों और जमीनी स्तर के विश्लेषण के आधार पर सीटों का गणित इस प्रकार नजर आ रहा है-
| पार्टी/गठबंधन | अनुमानित सीट | |
|---|---|---|
| 1 | भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party - BJP) | 142 - 171 |
| 2 | तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress - TMC) | 99 - 127 |
| 3 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress - INC) | 03 - 05 |
| 4 | अन्य (OTH) | 05 - 09 |
मतदान प्रतिशत, मतदाताओं का अटूट विश्वास
पश्चिम बंगाल में मतदान के प्रति लोगों का जुनून इस बार ऐतिहासिक रहा है। राज्य में दो प्रमुख चरणों में हुई वोटिंग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं-
- प्रथम चरण (23 अप्रैल): पहले चरण में मतदाताओं ने रिकॉर्ड तोड़ 93.19% मतदान किया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में एक बड़ी मिसाल है।
- द्वितीय चरण (29 अप्रैल): दूसरे चरण में भी उत्साह बरकरार रहा और शाम 5 बजे तक 89.99% मतदान दर्ज किया गया।
पश्चिम बंगाल में बहुमत का गणित
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को 148 सीटों की आवश्यकता है। आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी बहुमत के आंकड़े के काफी करीब या उसे पार करती दिख रही है, जबकि टीएमसी अपनी सत्ता बचाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रही है। कांग्रेस और अन्य छोटे दलों की भूमिका इस बार काफी सीमित नजर आ रही है।
इन आंकड़ों और भारी मतदान प्रतिशत ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता इस बार निर्णायक बदलाव या स्थिरता के पक्ष में मजबूती से खड़ी है। भारी मतदान का यह स्तर अक्सर सत्ता विरोधी लहर या फिर मौजूदा सरकार के प्रति भारी समर्थन का संकेत होता है, जिसे समझना फिलहाल किसी भी विश्लेषक के लिए चुनौती बना हुआ है।
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