याददाश्‍त खो चुका था कर्मचारी तो मालिक ने एक-एक पैसा जोड़कर अपने पास रखा, गूगल सर्च से परिवार को भी मिलवाया

नई दिल्‍ली। मध्‍य प्रदेश के होशंगाबाद से संतोष उइके नाम का शख्‍स जब काम की तलाश में घर से निकला था, तब उसकी उम्र 20 साल थी। उसके गांव का नाम है- रानीपुर, जहां से वह 22 साल पहले निकला था। उसके घरवालों को लगता था कि कच्‍छ में भूकंप के दौरान उसकी मौत हो गई, लेकिन मरा नहीं था। दूसरी ओर संतोष उइके जिस व्‍यक्ति के पास कच्‍छ में काम करता था, उसे यह नहीं पता था कि आखिर वह कहां का रहने वाला है, कौन है, उसके परिवार में कौन-कौन हैं? सालों तक कहानी इसी कशमकश में चलती रही। मामले में नया मोड़ तब आया जब संतोष उइके ने अपने मालिक से अपने घर जाने की इच्‍छा जताई।

 Weak Memory Man Meets With Family by the Efforts Of his Employer in Gujarat

भूल गया था गांव का नाम, सिर्फ डैम याद रहा

दैनिक भास्‍कर की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के कारोबारी भरत भाई गोरसिया को यह सुनकर अच्‍छा लगा कि संतोष उइके ने इतने सालों बाद घर जाने की इच्‍छा जताई है। भारत भाई तो यही समझते थे कि संतोष उइके का परिवार भूकंप में खत्‍म हो गया था। खैर, यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन परेशानी तब पैदा हुई जब संतोष उइके को उसके गांव का नाम ही याद ही नहीं आ रहा था। वह दिमाग पर बहुत जोर डालने के बाद गांव का आधा-अधूरा नाम बोल पा रहा था। हां, उसे इतना जरूर याद था कि उसके गांव में एक डैम है।

भरत भाई ने गूगल सर्च कर खोज निकाला परिवार

संतोष उइके से मिली टूटी-फूटी जानकारी के बाद भरत भाई ने गूगल पर उसके गांव का नाम सर्च किया तो उन्‍हें रानीपुर (तवा नगर), जिला होशंगाबाद, मध्‍य प्रदेश नाम मिला। भरत भाई ने संतोष उइके की फोटो स्‍थानीय पुलिस प्रभारी को भेजी, जिन्‍होंने परिवार को खोज निकाला। इसके बाद थाना प्रभारी ने संतोष उइके के बड़े भाई चिंतामणि उइके से उनकी बात कराई और फोन पर बात होने के बाद वह कच्‍छ के लिए रवाना हुए। चिंतामणि ने बताया कि भरत भाई का फोन आने के बाद वह कच्‍छ के लिए रवाना हुए और संतोष उइके को साथ लेकर घर आए। भरत भाई ने उन्‍हें संतोष के 25000 रुपये भी उनको दिए।

जब देखा शराब पीता है संतोष तो उसका पैसा अपने पास जमा करना शुरू किया

संतोष उइके ने भरत भाई के पास लंबे समय तक काम किया। भारत भाई ने एक दिन देखा कि वह शराब पीकर आया। उसे कुछ ठीक से याद भी नहीं रहता था तो भरत भाई ने उसका पैसा अपने पास जमा करना शुरू कर दिया। रोज-मर्रा की जरूरतों के लिए भरत भाई दुकानदारों को बोल दिया कि इसे सामान दे दें और पैसा वह चुका देंगे। इसी तरह करते-करते भरत भाई के पास संतोष उइके का करीब 80,000 रुपया जमा हो गया।

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