क्या संसद भवन के अशोक स्तंभ में बदली गई है शेर की आकृति ? अब खुद मूर्तिकार ने बताई सच्चाई

नई दिल्ली, 13 जुलाई: नए संसद भवन के ऊपर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ लेकर लगातार विवाद हो रहा है। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रीय चिह्न के साथ छेड़छाड़ कर उसे बदल दिया गया है। इसमें बने हुए शेर सारनाथ में स्थित स्तंभ से अलग रूप में दिख रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि, स्तंभ के शेरों के भाव और चरित्र में बदलाव किया गया है। इस राष्ट्रीय प्रतीक को बनाने वाले मूर्तिकार सुनील देवड़े की ओर से इस सफाई आई हैं। उन्होंने अशोक स्तंभ के मूल रूप में बदलाव के दावों को खारिज कर दिया है।

नई मूर्ति पर विपक्ष ने उठाए सवाल

नई मूर्ति पर विपक्ष ने उठाए सवाल

नई मूर्ति को लेकर लगातार उठ रहे सवालों को देखते हुए अब मूर्तिकार सुनील देवड़े ने आधिकारिक बयान जारी किया है। सुनीव देवड़े ने कहा कि, यह मूर्ति सारनाथ की मूर्ति की प्रतिकृति है। वायरल हो रही फोटो वाइड एंगल से ली गई है और इसकी वजह से शेर का चेहरा आक्रामक नजर आ रहा है। हमने कुछ भी नहीं बदला है। हमने म्यूजियम में जाकर काफी रिसर्च किया है ...जो रेप्लिका है वो करीबन ढ़ाई फीट का ही है...जब हम इसे बड़ा करते हैं तो सब कुछ फैल जाता है।

'अशोक स्तंभ बनाने में हमे 9 महीने के करीब लग गए'

'अशोक स्तंभ बनाने में हमे 9 महीने के करीब लग गए'

वहीं इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में सुनील से शेरों के मुंह ज्यादा खुले होने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे नकारते हुए बताया कि हमे एक स्पष्ट ब्रीफ दिया गया था। इस विशालकाय अशोक स्तंभ बनाने में हमे 9 महीने के करीब लग गए। सरकार से कोई हमे सीधा कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिला था। हमने किसी के कहने पर कोई बदलाव नहीं किया है। सारनाथ में मौजूद स्तंभ का ही ये कॉपी है। अशोक स्तंभ बनाने का करार टाटा के साथ हुआ था। उन्हीं को सुनील द्वारा अशोक स्तंभ का मॉडल दिखाया गया था, जब अप्रूवल मिला, तब उस पर काम शुरू किया गया।

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    गुस्सैल शेरों को लेकर दी ये सफाई

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    मूर्तिकार ने कहा कि, अलग-अलग कोणों के अनुसार शेरों की अभिव्यक्ति में एक महत्वपूर्ण अंतर है। मूर्तिकार देवरे के मुताबिक जो तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं, वे नीचे से ली गई हैं, इसलिए शेरों के भाव आक्रामक लग रहे और मुंह बड़ा दिखाई दे रहा है। बता दें कि, विपक्ष का कहना है कि इस चिह्न में शेर को आक्रामक और गुस्सैल दिखाया गया है। बड़े -बड़े दांतों को प्रमुखता से दिखाया गया है जबकि मूल चिह्न में शेर काफी सौम्य दिखाई दे रहा है।

    अजंता एलोरा गुफाओं की रेप्लिका बना चुके हैं सुनील

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    बता दें कि अशोक स्तंभ की इस प्रतिकृति को महाराष्ट्र के औरंगाबाद के सुनील देवड़े और जयपुर के लक्ष्मण ने डिजाइन किया है। 49 वर्षीय मूर्तिकार सुनील देवड़े जेजे स्कूल ऑफ ऑर्ट्स से गोल्ड मेडल की उपाधि पा चुके हैं। सुनील ने इसके अलावा अंजता एलोरा विजिटर सेंटर में अजंता एलोरा गुफाओं की रेप्लिकाएं भी बनाई हैं जिसका मूल्य 125 करोड़ बताया जाता है। सुनील देवड़े के मुताबिक उन्हें राष्ट्रीय प्रतीक का क्ले बनाने में लगभग 5 महीने लग गए।

    16,000 किलोग्राम का है नया अशोक स्तंभ

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    नए अशोक स्तंभ की हाइट 21 फुट है जिसे 5 फुट के पेडेस्टल पर रखा गया है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कांस्य से बने इस प्रतीक की ऊंचाई 6.5 मीटर हैं और इसे सहारा देने वाले ढांचे समेत इसका वजन 16,000 किलोग्राम है। इसके 70 टुकड़ों में तैयार किया है।

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