Wayanad landslide: वायनाड में कुदरत ने बरपाया कहर, सामने आई लैंडस्लाइड की भयावह सैटेलाइट इमेज
Wayanad landslide: कुदरत ने केरल के वायनाड में 30 जुलाई को ऐसा कहर बरपा कि अभी तक 167 लोग मौत के मुंह में समा गए है। वहीं, कई घायल हो गए और कई अभी तक लापता है...जिनकी तलाश में खोज और बचाव अभियान जारी है।
लैंडस्लाइड की वजह से वायनाड में भारी तबाही मची है। ऐसा बताया जा रहा है कि चार गांव पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गए और वहां पर अब कुछ भी नहीं बचा है। जी हां...इस तबाही की सैटेलाइट इमेज सामने आई है, जो वाक्य काफी चौंकाने वाली है।

जो सैटेलाइट इमेज सामने है वो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने जारी की है। साथ ही, इस भीषण आपदा को लेकर चिंता भी जाहिर की है। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, इसरो ने गुरुवार 01 अगस्त को लैंडस्लाइड वाले क्षेत्र का सर्वे किया।
सैटेलाइट डेटा पर बेस्ड असेसमेंट में सामने आया, 'लैंडस्लाइड में लगभग 86 हजार वर्गमीटर एरिया धसकते हुए मलबे में तब्दील हो गया।' जी हां...वायनाड में जितने बड़े हिस्से पर लैंडस्लाइड का प्रभाव पड़ा है, वह भूखंड इतना बड़ा है कि इस एरिया में 13 से अधिक इंटरनेशल फुटबॉल ग्राउंड बनाए जा सकते थे।
हैदराबाद में राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने तबाही को कैद करने के लिए 31 जुलाई को ISRO के उन्नत कार्टोसैट-3 ऑप्टिकल उपग्रह और RISAT-2B सैटेलाइट को तैनात किया था। सैटेलाइट द्वारा कैप्चर की गई तस्वीरों के आधार पर इसरो के विश्लेषण में कहा गया है कि भूस्खलन समुद्र तल से लगभग 1500 मीटर की ऊंचाई पर हुआ।
भूस्खलन से हुआ कीचड़...बड़े पत्थरों और उखड़े हुए पेड़ों के साथ लगभग 8 किमी तक बता रहा और आखिरकार चेलियार नदी की एक सहायत नदी में गिर गया। खबर के मुताबिक, बहते आ रहे मलबे की तेज गति ने इरावानी फुज़ार नदी के मार्ग को चौड़ा कर दिया है, जिससे इसके किनारे टूट गए। नदी किनारों पर स्थित घरों को काफी नुकसान पहुंचा।
वहीं, भूस्खलन के इलाके की जो तस्वीरें सामने आई है उनसे पता चला है कि आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंचने पर नदी तेसी जे और लगातार अपनी ऊंचाई खोती जा रही है। वहीं, इंडियन आर्मी और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के कर्मियों सहित बचाव दल जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सैटेलाइट डेटा से भी उसी स्थान पर एक पुराने भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड का देखा गया था। इसरो द्वारा जारी की गई तस्वीरों से पता चला है कि 30 जुलाई को जहां भूस्खलन हुआ था, 2020 वाली जगह पर ही हुआ है। लेकिन, इस बार यह काफी बड़ा और विभीषिका वाला था।












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