महाराष्ट्र सरकार का वाटर ग्रिड प्रोजेक्ट, सूखा ग्रस्त क्षेत्र में किसानों के लिए अहम
Maharashtra Election 2024: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में शिंदे सरकार की बड़ी पहल का किसानों को लाभ मिल रहा है। मराठवाड़ा क्षेत्र में लंबे समय से अनियमित वर्षा के चलते किसानों के आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इस क्षेत्र में अक्सर फसलें बर्बाद हो जातीं, कर्ज बढ़ जाता है और क्षेत्र के किसानों की आजीविका चली जाती है। ऐसे में शिंदे सरकार की पहल किसानों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।
मराठवाड़ा क्षेत्र में बारिश की बात करें तो वर्ष 2023 में, मराठवाड़ा में केवल 589.9 मिमी वर्षा हुई, जोकि वार्षिक औसत से 21.44% कम थी। समय के साथ, बेमौसम बारिश के बीच सूखा की स्थिति इस क्षेत्र के लिए सामान्य हो गई। वर्ष 2022 की बात करें तो 42 सहित सूखा प्रभावित तालुका, जिनमें से चौदह मराठवाड़ा के अंतर्गत आते हैं। इस बिगड़ती स्थिति के कारण 2016 में प्रसिद्ध 'लातूर वॉटर ट्रेन' जैसे कठोर कदम उठाए गए, जहां तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने पानी की कमी से जूझ रहे लातूर शहर तक रेल के माध्यम से जल परिवहन की व्यवस्था की थी।

10 चरणों में मराठवाड़ा जल ग्रिड परियोजना
मराठवाड़ा जल ग्रिड परियोजना को दस चरणों में विभाजित किया गया है। पहले आठ मराठवाड़ा के भीतर एक आंतरिक जल ग्रिड के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि अंतिम दो का उद्देश्य ग्रिड को जल-समृद्ध कोंकण क्षेत्र और कृष्णा नदी जलग्रहण क्षेत्र से जोड़ना है। इस योजना में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण से बचने के लिए मुख्य रूप से मौजूदा राजमार्गों के साथ बिछाई गई पाइपलाइनों के माध्यम से जयकवाड़ी, येलदारी, मांजरा और टेरना जैसे बांधों को जोड़ना शामिल है। पाइपलाइनों द्वारा पार की गई कृषि भूमि पर फसलों को होने वाले किसी भी व्यवधान के लिए मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
वर्ष 2019 में, फड़नवीस ने छत्रपति संभाजीनगर और जालना जिलों को कवर करते हुए पहले चरण के लिए 4,300 करोड़ रुपये सुरक्षित किए, लेकिन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के सत्ता संभालने के बाद राजनीतिक परिवर्तनों के कारण देरी हुई। 2022 में जब फड़नवीस उपमुख्यमंत्री के रूप में लौटे तो इस परियोजना को पुनर्जीवित किया गया।
इस प्रोजेक्ट के समय तत्कालीन सीएम देवेन्द्र फडणवीस के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2016 में 25,000 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट से 40,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाए जाने की उम्मीद थी। लेकिन एमवीए सरकार में इसकी अनदेखी की गई।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार के वाटर ग्रिड प्रोजेक्ट का उद्देश्य मराठवाड़ा में दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करना है। यह परियोजना मराठवाड़ा में 11 प्रमुख बांधों को पाइपलाइनों के नेटवर्क जोड़ती है।












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