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Same Sex Marriage Hearing LIVE: सुप्रीम कोर्ट में कैसी चल रही है सुनवाई देखिए LIVE VIDEO

Same Sex Marriage Hearing: समलैंगिक विवाह मामले में सुप्रीम कोर्ट का लाइव प्रसारण जारी है। आप यहां देख सकते हैं पूरी बहस।

Supreme Court Same Sex Mariage

Supreme Court Hearing On Same Sex Marriage: समलैंगिक विवाह मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि केंद्र ने प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए एक याचिका दायर की है। एसजी तुषार मेहता ने कहा कि जो बहस होनी है वह सामाजिक स्तर पर होनी है। इसमें सामाज को सुनने की जरूरत है और संसद में कानून बनना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट में लाइव वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें https://main.sci.gov.in/display-board

ये संसद के क्षेत्राधिकार का मामला, सुप्रीम कोर्ट में नहीं हो सकती सुनवाई : केंद्र
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से कहा कि इस केस में हमारी प्रारंभिक आपत्ति है। तुषार मेहता ने कहा कि ये संसद के क्षेत्राधिकार का मामला है। सुप्रीम कोर्ट से तुषार मेहता ने कहा कि सवाल ये है कि क्या अदालत खुद इस मामले पर फैसला कर सकती है ? ये याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं। केंद्र को पहले सुना जाना चाहिए । सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर फैसला नहीं कर सकता। संसद ही इसका उपयुक्त मंच है।

कपिल सिब्बल ने किया समलैंगिक विवाह का विरोध
समलैंगिक विवाह का विरोध करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल नेकहा कि मामले में राज्यों और समाज को भी सुना जाना चाहिए।

समलैंगिक संबंधों को समाज ने स्वीकार किया है : CJI
CJI ने कहा कि हमारे समाज ने समलैंगिक संबंधों को स्वीकार किया है। पिछले पांच सालों में चीजें बदली हैं। एक स्वीकृति है, जो शामिल है। हम इसके प्रति सचेत हैं। नवतेज ( समलौंगिकता को अपराध से बाहर )के समय और अब हमारे समाज को अधिक स्वीकृति मिली है। इसे हमारे विश्वविद्यालयों में स्वीकृति मिली है।

सरकार के संसद वाले तर्क पर cji ने दिया जवाब
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमें वृद्धिशील तरीके से अपनी व्याख्यात्मक शक्ति का प्रयोग करना होगा और कानून विकसित हो रहे हैं, इसलिए हमें ध्यान रखना होगा कि अदालत इसे व्याख्या के तरीके से करे और हम वर्तमान के लिए एक कैनवास को कवर कर सकते हैं. अपने आप को सीमित रखें और फिर संसद को समाज के विकास का जवाब देने की अनुमति दें। हम इस तथ्य से इंकार नहीं कर सकते कि संसद वास्तव में यहां प्रासंगिक है।

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