इमरान ख़ान क्या पाकिस्तान को रूस से सस्ते में दिलाने वाले थे तेल?
पाकिस्तान के पूर्व ऊर्जा मंत्री हम्माद अज़हर ने कुछ दिनों पहले सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर रूसी ऊर्जा मंत्री को लिखा गया एक सरकारी पत्र साझा किया था, जिसमें रूस से कच्चे तेल, डीज़ल और पेट्रोल को रियायती दरों पर आयात करने का प्रस्ताव था.
हम्माद अज़हर ने यह सरकारी पत्र वर्तमान ऊर्जा मंत्री ख़ुर्रम दस्तगीर के उस बयान के बाद जारी किया है, जिसमे उन्होंने कहा था कि पिछली सरकार ने रूस के साथ ऐसा कोई आधिकारिक संपर्क नहीं किया था, जिसमें रूस से रियायती दरों पर पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर बात की गई हो.
हम्माद अज़हर के सरकारी पत्र जारी करने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है, जिसमें आम जनता के अलावा आर्थिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार ख़ुर्रम हुसैन ने भी हम्माद अज़हर से सवाल किया है कि क्या इस पत्र के बाद रूस की तरफ़ से सरकारी स्तर पर कोई ऐसा जवाब आया था जिसमें रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराने का वादा किया गया हो.
ख़ुर्रम हुसैन ने हम्माद अज़हर के ट्वीट के जवाब में लिखा कि रूस की ओर से ऐसी किसी प्रगति का कोई संकेत नहीं मिला है जिसमें वह पाकिस्तान को रियायती दरों पर तेल देने जा रहा था.
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बीबीसी से बात करते हुए, हम्माद अज़हर ने कहा कि यह पत्र रूस के अनुरोध पर लिखा गया था, क्योंकि रूस 30 प्रतिशत कम दरों पर तेल की सप्लाई करने के लिए ख़रीदारों की तलाश में है और क्योंकि पाकिस्तान तेल उत्पादों का एक प्रमुख आयातक है इसलिए, रूस पाकिस्तान को भी तेल बेचना चाहता है.
हम्माद अज़हर के सरकारी पत्र में पाकिस्तान के रूस से सस्ते तेल के आयात के बारे में, पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय ने बीबीसी से बात करते हुए पुष्टि की है कि जब पूर्व ऊर्जा मंत्री ने आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है, तो इसका मतलब है कि पाकिस्तान की तरफ़ से ऐसा पत्र लिखा गया है.
हालांकि, ऊर्जा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अभी तक रूस की ओर से ऐसा कोई जवाब नहीं मिला है, जिसमे पाकिस्तान की तरफ़ से सस्ते तेल के आयात के बारे कुछ कहा गया हो.
पाकिस्तान इस समय तेल की क़ीमतों की समस्या से जूझ रहा है. पिछली सरकार ने फरवरी के अंत में नए वित्तीय वर्ष के बजट तक पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों के बढाने पर रोक लगाने की घोषणा की थी, जिसे नई गठबंधन सरकार ने अभी तक बरक़ार रखा है. हालांकि क़ीमतों में वृद्धि नहीं होने के कारण सरकार को अरबो रूपये की सब्सिडी देनी पड़ रही है जिसका देश के खजाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है.
तेल सब्सिडी के कारण पाकिस्तान के आईएमएफ़ (इंटरनेशनल मॉनिटरिंग फ़ंड) के साथ बातचीत नहीं हो रही है, जो ऋण कार्यक्रम को फिर से शुरू करने से पहले इस सब्सिडी को समाप्त कराना चाहता है.
https://twitter.com/Hammad_Azhar/status/1523938814129229825?
रूस से सस्ते तेल के लिए आधिकारिक पत्र का सुझाव?
पूर्व ऊर्जा मंत्री हम्माद अज़हर की तरफ़ से जारी किया गया आधिकारिक पत्र पीटीआई सरकार के गिरने से नौ दिन पहले लिखा गया था और इसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की रूस यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों की पृष्ठभूमि पर बात करते हुए लिखा गया है, कि पाकिस्तान रूस से सस्ते दरों पर कच्चा तेल, पेट्रोल और डीज़ल आयात करने में दिलचस्पी रखता है.
इस पत्र में, हम्माद अज़हर ने अपने रूसी समकक्ष को लिखा कि वह रूस के उन अधिकारियों की डिटेल उपलब्ध कराये, जो रूसी संस्थानों की तरफ़ से इस मामले पर आगे चर्चा करेंगे.
हम्माद अज़हर ने अगले महीने, यानी अप्रैल में इस मामले पर सौदा तय करने के बारे में लिखा था. हम्माद अज़हर ने अपने ट्वीट में लिखा कि पीटीआई सरकार ने अप्रैल में पहला माल ख़रीदने की योजना बनाई थी.
हम्माद अज़हर ने बीबीसी न्यूज़ को बताया, कि "जब पूर्व प्रधानमंत्री की रूस यात्रा के बाद इस बारे में बात आगे बढ़ी, तो हमने तेल और गैस ख़रीदने के बारे में बात की और रूस ने इस बारे में बहुत दिलचस्पी दिखाई."
उन्होंने आगे कहा कि कुछ हफ्ते बाद रूस में पाकिस्तान के राजदूत ने लिखा कि रूसी अधिकारी चाहते हैं, कि पाकिस्तान इस बारे में बात आगे बढाए, जिसके बाद मैंने औपचारिक रूप से रूस के ऊर्जा मंत्री को यह पत्र लिखा, लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पत्र लिखे जाने के कुछ दिनों बाद, असेंबली भंग हो गईं और फिर पीटीआई सरकार ख़त्म हो गई.
ऊर्जा मंत्रालय के प्रवक्ता ज़करिया अली शाह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि यह पत्र लिख कर डिप्लोमेटिक बैग के ज़रिये रूस भेजा गया था, लेकिन उन्होंने बताया कि अभी तक रूस की तरफ़ से इस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला है.
यह पूछे जाने पर कि क्या हम्माद अज़हर के ट्वीट के अनुसार अप्रैल में तेल के कार्गो लाने की योजना थी, तो उन्होंने कहा कि यह पत्र मार्च के अंतिम दिनों में लिखा गया था और यह संभव नहीं लगता कि इस डील के तहत इतनी जल्दी कार्गो पहुंच जाते.
क्या रूस से सस्ता तेल आयात करना संभव है?
पूर्व ऊर्जा मंत्री के मुताबिक़ रूस से रियायती दरों पर तेल आयात करने की योजना थी. इस बारे में बीबीसी से बात करते हुए आर्थिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार ख़ुर्रम हुसैन ने कहा कि भारत रूस से तेल आयात करता है, लेकिन यह भारत की ऊर्जा ज़रूरतों का दस से बारह प्रतिशत है और यह लंबे समय से रूस से आयात किया जा रहा है.
लेकिन अगर पाकिस्तान रूस से तेल आयात करता है, तो इस परियोजना की व्यवहार्यता के बारे में कुछ सवाल हैं, जिनके जवाब बहुत ज़रूरी हैं. जैसे क्या रूस से तेल का जहाज़ पाकिस्तान भेजना संभव है और क्या बैंक इस बात के लिए तैयार होंगे कि वो रूस से तेल ख़रीदने के लिए फाइनेंस करें?
ख़ुर्रम हुसैन ने कहा कि इमरान ख़ान इसका फ़ायदा उठा रहे हैं और वह स्वतंत्र विदेश नीति की बात करते हैं, जिसका एक पहलू उनकी रूस से सस्ता तेल आयात करने की घोषणा भी है. लेकिन ख़ुर्रम के अनुसार उनकी यह घोषणा सच्चाई पर आधारित नहीं है.
इस संबंध में हम्माद अज़हर ने कहा कि रूस 30 प्रतिशत सस्ता तेल देकर अंतरराष्ट्रीय ख़रीदारों को अपनी तरफ़ आकर्षित करना चाहता है और क्योंकि पाकिस्तान तेल उत्पादों का एक प्रमुख आयातक देश है, इसलिए वह इस तेल को पाकिस्तान को रियायती दरों पर बेचना चाहता था. हम्माद ने कहा कि योजना के बाद अप्रैल में यह कार्गो ख़रीदा जाना था.
हालांकि, वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने रूस से तेल आयात करने की योजना को संभव बताया और कहा कि ऊर्जा मंत्रालय सहित हर सरकार का यही उद्देश्य होता है कि देश और राष्ट्र के हित में काम करे. उन्होंने कहा कि रूस से तेल आयात करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है और नई सरकार को भी इस संबंध में जानकारी दे दी गई है.
क्या पाकिस्तानी रिफ़ाइनरियां रूसी कच्चे तेल से उत्पाद तैयार कर पाएंगी?
रूसी कच्चे तेल को पाकिस्तान आयात करके क्या इसे पाकिस्तानी रिफ़ाइनरियों में उत्पाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है? इसके जवाब में पाकिस्तान रिफ़ाइनरी सेक्टर के लोगों का कहना है कि ऐसा हो सकता है.
तेल सेक्टर के विशेषज्ञ और पाकिस्तान रिफ़ाइनरी के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ज़ाहिद मीर ने बीबीसी को बताया कि स्थानीय रिफ़ाइनरियों में रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि रूस दो तरह के कच्चे तेल का उत्पादन करता है, एक सोकोल(sokol) और दूसरा यूरल (Ural).
उन्होंने कहा कि दोनों प्रकार के तेल का उपयोग किया जा सकता है और उनसे तेल उत्पाद बनाए जा सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार सोकोल ज़्यादा बेहतर है जिससे फ्रैंस ऑयल कम पैदा होता है.
ज़ाहिद मीर ने कहा कि इस समय पाकिस्तान में अलग-अलग रिफ़ाइनरियों में अलग-अलग कच्चे तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें अरब लाइट कच्चे तेल के साथ अरब एक्स्ट्रा, कुवैत सुपर और एक दो दूसरी तरह का कच्चा तेल शामिल हैं.
ज़ाहिद मीर ने कहा कि रिफ़ाइनरियों में ये क्षमता है कि जिस तरह वह दूसरे देशों के कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं उसी तरह रूसी कच्चे तेल को भी प्रोसेस कर सकती हैं.
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क्या रूसी तेल पाकिस्तान में स्थानीय क़ीमतों को कम कर सकता है?
पाकिस्तान में इस समय पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें देश की अर्थव्यवस्था और नई सरकार के लिए एक बड़ी समस्या है. पूर्व सरकार का दावा है कि रूस से सस्ता तेल मिलने से स्थानीय उपभोक्ताओं को फ़ायदा होगा.
पूर्व प्रधानमंत्री की 28 फरवरी, 2022 को की गई घोषणा के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष के बजट तक पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों को बढ़ाने पर रोक लगा दी गई थी और वैश्विक बाज़ार में बढ़ती क़ीमतों के कारण आने वाले अंतर का भुगतान सरकार ने अपने खजाने से करने की घोषणा की थी.
मार्च में तेल पर दी जाने वाली सब्सिडी की रक़म 33 अरब रुपये से अधिक थी, जो अप्रैल में वैश्विक क़ीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण बढ़कर 60 अरब रुपये तक पहुंच गई है.
ऊर्जा मंत्रालय के दस्तावेज़ों के मुताबिक़ मई के महीने में इस सब्सिडी की राशि 118 अरब रुपये तक पहुंच जाएगी.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल के पहले नौ महीनों में, पाकिस्तान ने लगभग 15 अरब डॉलर की क़ीमत के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 100 प्रतिशत ज़्यादा है. हालांकि आयात की मात्रा में कुछ वृद्धि हुई है, लेकिन तेल की वैश्विक क़ीमतों में वृद्धि के कारण आयात की रक़म में बहुत ज़्यादा वृद्धि हुई है.
देश के बढ़ते वित्तीय घाटे को कम करने और ऋण कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए आईएमएफ़ पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों पर दी जाने वाली सब्सिडी समाप्त कराना चाहता है, लेकिन वर्तमान सरकार ने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है.
रूसी कच्चे तेल के आयात के कारण पाकिस्तान में उत्पाद की क़ीमतों में कमी के बारे में बात करते हुए, ज़ाहिद मीर ने कहा कि यह इतना आसान नहीं है, क्योंकि कच्चा तेल पाकिस्तान सरकार नहीं ख़रीदती है बल्कि रिफ़ाइनरियां विश्व बाज़ार से ख़रीदती हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार केवल क़ीमत तय करती है और स्थानीय बाज़ार में यह क़ीमत पेट्रोल और डीज़ल की वैश्विक क़ीमतों के आधार पर तय की जाती है. जब सरकार क़ीमत तय करती है तो यह पेट्रोल और डीज़ल की वैश्विक क़ीमतों के आधार पर तय होती है न कि कच्चे तेल की क़ीमत के आधार पर.
उन्होंने कहा कि अगर रूस से कच्चा तेल रियायती क़ीमतों पर आता है, तो इस सरकार को क़ीमत तय करने का फॉर्मूला बदलना पड़ेगा.
"अगर उपभोक्ताओं को रूस से आने वाले कच्चे तेल का फ़ायदा पहुंचाना हैं, तो इससे सरकार को सस्ता कच्चा तेल ख़रीदकर डॉलर में तो बचत होगी, लेकिन जब इससे बनने वाले डीज़ल और पेट्रोल के उतपादों का निर्धारण उनकी वैश्विक क़ीमतों पर होगा, तो उसके लिए सरकार को इस तरह भी सब्सिडी देनी पड़ेगी, लेकिन उसकी रक़म इतनी ज़्यादा नहीं होगी. क्योंकि कच्चा तेल रियायती दरों पर मिल रहा होगा."
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