Waqf Act में बदलाव, किसके दबाव में मोदी सरकार? अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया
Waqf Act News: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 1995 के वक्फ कानून को बदलने की तैयारी में है। इसी दौरान अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसके पीछे की वजह को लेकर बहुत बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना है कि गरीब मुस्लिम महिलाओं की ओर से दबाव रहा है।
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर बहुत बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना है कि 'गरीब मुस्लिम समूहों' की यह बहुत ही पुरानी मांग है।

गरीब मुस्लिम महिलाओं और समूहों की ओर से दबाव- किरेन रिजिजू
हालांकि, रिजिजू ने यह भी कहा है कि संसद के मौजूदा सत्र में वक्फ कानून में संशोधन वाला बिल पेश किए जाने का फैसला 'अभी भी विचाराधीन' है।
लेकिन, उन्होंने इस बिल के बारे में बताया है, 'गरीब मुस्लिम महिलाओं और समूहों की ओर से वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी तरीके से प्रबंधन को लेकर दबाव है। कई समूहों की ओर से कानून में सुधार की मांग हो रही है। विभिन्न समूहों के साथ कई वर्षों से चर्चा चल रही है।'
प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा नहीं आया है सामने
वैसे मोदी सरकार ने प्रस्तावित विधेयक का मसौदा अभी तक लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के साथ साझा नहीं किया है। वक्फ बोर्ड के पास अभी देश में 8.7 लाख संपत्तियां हैं। इसके पास 9.4 लाख एकड़ जमीन है और सेना और रेलवे के पास यह सबसे बड़ा जमीन मालिक है। वक्फ कानूनों में अंतिम संशोधन मनमोहन सिंह के सरकार के दौरान 2013 में किया गया था।
इस मुस्लिम संगठन ने किया वक्फ कानून में सुधार के प्रस्ताव का स्वागत
बहरहाल, इस मामले को लेकर सोमवार को ऑल इंडिया सूफी सज्जदानशीन काउंसिल (AISSC) के सदस्यों ने रिजिजू से मुलाकात की और प्रस्तावित संशोधनों को 'लंबे समय से इंतजार किया जा रहा एक सुधार' बताते हुए इसका स्वागत किया।
सूफी परंपराओं को वक्फ कानून में किया गया है नजरअंदाज- AISSC
एआईएसएससी की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, 'हमारी काउंसिल और विभिन्न संगठनों ने पिछले दशकों में लगातार ज्ञापन दिए हैं, जिनमें वर्तमान कानून में संशोधन का अनुरोध किया गया है, क्योंकि इसमें सूफी परंपराओं और उनके रीति-रिवाजों के हितों की रक्षा के लिए कोई प्रावधान नहीं है।'
वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार की वजह से उठ रहे हैं सवाल
एआईएसएससी के प्रेसिडेंट सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती का कहना है कि भारत में वक्फ के मुख्य स्टेकहोल्डर दरगाहों के साथ मौजूदा कानून में हमेशा भेदभाव हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि वक्फ संशोधन विधेयक व्यापक होगा और सभी स्टेकहोल्डर्स के हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि प्रस्तावित संशोधनों में दरगाहों और उनके असली प्रतिनिधियों के हितों और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
चिश्ती के मुताबिक वक्फ बोर्ड के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप रहे हैं और सोमवार को उनकी अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल इसी को ध्यान में रखकर केंद्रीय मंत्री से मिला है।












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