Waqf Bill: वक्फ विधेयक को राज्यसभा में पास कराने के लिए मोदी सरकार की खास रणनीति, समझिए पूरा नंबर गेम
Waqf Board Amendment Bill 2024: मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश कर दिया है। जिसके बाद इस विधेयक को लेकर लगातार हंगामा हो रहा है। हालांकि एनडीए के पास लोकसभा में बहुमत है, लिहाजा उसे इस विधेयक को यहां पास कराने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
लेकिन राज्यसभा में पार्टी के पास फिलहाल बहुमत नहीं है। ऐसे में सरकार राज्यसभा में इस बिल को पास कराने की रणनीति तैयार करने में जुटी है। केंद्र की मोदी सरकार अगले संसद सत्र में वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित करने के लिए राज्यसभा में बहुमत का रणनीतिक रूप से इंतजार कर रही है।

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा पेश किए गए इस विधेयक को कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है, आरोप है कि यह मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाता है।
मिल सकता है राज्यसभा में बहुमत
इसी वर्ष नवंबर-दिसंबर तक एनडीए के पास राज्य सभा में पर्याप्त संख्या होने की उम्मीद है। राज्यसभा की 12 सीटों के लिए 3 सितंबर को चुनाव होना है। हाल के चुनाव में एनडीए की जीत और चार खाली मनोनीत सदस्यों की सीट भरने की संभावना है।
राज्यसभा का नंबर गणित
बता दें कि चार मनोनीत सदस्यों के जुड़ने से सरकार को एआईएडीएमके जैसी भाजपा-मित्र पार्टियों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। आगामी चुनावों के बाद एनडीए के छह मौजूदा मनोनीत सदस्यों और दो निर्दलीय सदस्यों सहित 117 सदस्यों तक पहुंचने का अनुमान है।
राज्यसभा में कुल 237 सीटें हैं, ऐसे में एनडीए सहयोगियों के साथ मिलकर 117 के आंकड़े तक पहुंच सकती है, लेकिन बहुमत के 119 के आंकड़े से फिर भी दो सीट दूर रहेगी।
मनोनीत सदस्य करेंगे बेडा पार
ऐसे में यदि सरकार इन चार मनोनीत सीटों को भर लेती है, तो सदन की संख्या 241 हो जाएगी, जिससे बहुमत का आंकड़ा 121 हो जाएगा। मनोनीत सदस्य आमतौर पर सरकार का समर्थन करते हैं, जिससे एनडीए की संख्या 117 से बढ़कर ठीक 121 हो जाएगी।
अभी क्या है नंबर
भाजपा के पास अभी उच्च सदन में 87 सीटें हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, त्रिपुरा, असम, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में जीत के साथ यह संख्या बढ़कर 94 हो जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, बिहार और महाराष्ट्र में सहयोगी दलों को भी जीत मिल सकती है।
3 सितंबर अहम
वहीं 3 सितंबर को होने वाले चुनाव से कांग्रेस को भी फायदा होगा। तेलंगाना में पार्टी को एक सीट मिलने की उम्मीद है, जिससे उसकी सीटों की संख्या 27 हो जाएगी, जोकि राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद बरकरार रखने के लिए पर्याप्त है।
खड़गे के लिए यह चुनाव अहम
वर्तमान में 26 सीटों के साथ राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की स्थिति नाजुक है। 3 सितंबर को होने वाले चुनाव में 12 सीटों में से 10 सीटें खाली हो गई हैं क्योंकि मौजूदा भाजपा, कांग्रेस और राजद के सदस्य लोकसभा के लिए चुन लिए गए हैं। तेलंगाना और ओडिशा से एक-एक सदस्य ने इस्तीफा देकर पार्टी बदल ली है।
तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति के सदस्य के केशव राव ने इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया। वहीं ओडिशा से बीजेडी सदस्य ममता मोहंता ने भी पार्टी छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया। लिहाजा 3 सितंबर को होने वाला चुनाव काफी अहम होने वाला है।
जानबूझकर हो रही देरी
गौर करने वाली बात है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक को 8 अगस्त, 2024 तक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया है। विपक्षी दलों की कड़ी आपत्तियों के बीच इसे पेश किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।
सरकार ने जिस तरह से जानबूझकर इस बिल को पास कराने में रणनीतिक देरी की है, उससे साफ है कि मोदी सरकार राज्यसभा चुनाव का इंतजार कर रही है। सरकार अगले सदन में इस बिल को पेश करके इसे पास कराने की पूरी कोशिश करेगी।












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