वक्फ संशोधन बिल को लेकर JPC की दूसरी बैठक में तीखी बहस, जानिए क्या-क्या हुआ
वक्फ विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की दूसरी बैठक में भाजपा सदस्यों और विपक्षी सांसदों के बीच तीखी बहस हुई। बैठक के दौरान मुस्लिम संगठनों ने प्रस्तावित संशोधन पर चिंता व्यक्त की। बता दें कि पहली जेपीसी बैठक 22 अगस्त को हुई थी। जिसके बाद 5 और 6 सितंबर को बैठकें निर्धारित की गई हैं।
शुक्रवार को लंबे सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने विधेयक के विरोध में वॉकआउट किया। सूत्रों ने बताया कि चर्चा के दौरान भाजपा सांसदों को अपने समकक्षों से बार-बार व्यवधान का सामना करना पड़ा। भाजपा सांसदों की ओर से शिकायतें आईं कि उन्हें अपने विचार ठीक से रखने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि विपक्षी सांसदों ने उन पर लोकतांत्रिक मानदंडों की अनदेखी करने और व्यक्तिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया।

जमकर बरसे संजय सिंह
भाजपा के दिलीप सैकिया और आप के संजय सिंह के बीच तीखी नोकझोंक हुई। संजय सिंह ने भाजपा पर संविधान को न समझने और न ही उसका पालन करने का आरोप लगाया और उन पर सत्ता हथियाने पर ध्यान केंद्रित करने का आरोप लगाया।
उन्होंने दिल्ली में आप की सरकार के मुद्दों को भी उजागर किया, जिसमें पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी और वक्फ संपत्ति के स्वामित्व और बोर्ड की सदस्यता को प्रभावित करने वाले प्रस्ताव शामिल हैं।
ओवैसी ने किया विरोध
हैदराबाद से एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जेपीसी प्रमुख जगदंबिका पाल को वक्फ विधेयक का विरोध करते हुए एक लिखित नोट सौंपा। ओवैसी ने गंगोपाध्याय द्वारा की गई "अपमानजनक" टिप्पणी को लेकर भाजपा के अभिजीत गंगोपाध्याय के साथ तीखी बहस की। विवाद तब शुरू हुआ जब विपक्षी सांसदों ने मुस्लिम निकाय के एक प्रतिनिधि को दूसरी बार बोलने का मौका न दिए जाने पर सदन से वॉकआउट कर दिया।
अखिल भारतीय सुन्नी जमीयत-ए-उलेमा ने वक्फ विधेयक के बारे में अपनी आपत्तियां व्यक्त करते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन अस्वीकार्य हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वक्फ मामले मुसलमानों से संबंधित हैं और इसमें सरकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। इसी तरह, भारतीय मुस्लिम फॉर सिविल राइट्स के अध्यक्ष मोहम्मद अदीब ने विधेयक को "अवैध" बताया और सरकार पर मुस्लिम धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।
पहली जेपीसी बैठक में विपक्षी सदस्यों ने दावा किया कि विधेयक के कई प्रावधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के कानूनों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने विधेयक में उल्लिखित विभिन्न धाराओं पर सवाल उठाए।
गरमागरम बहस के बीच एक हल्के-फुल्के पल ने बैठक में कुछ राहत प्रदान की। बैठक के दौरान जब एक अधिकारी ने गलती से 'आगाखानी' समुदाय को 'अफगानी' कह दिया, इसपर विपक्षी सांसदों ने मज़ाक में कहा कि यह विधेयक भारत के लिए है या 'अखंड भारत' के लिए।
इस दूसरी जेपीसी बैठक से ओवैसी, ए. राजा, इमरान मसूद, मोहम्मद अब्दुल्ला और अरविंद सावंत बीच में ही चले गए, हालांकि वो बाद में लौट आए। अगली दो बैठकों में संभवतः इन विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी, क्योंकि दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण विधायी मामले पर आम सहमति बनाने का प्रयास करेंगे।












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