वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, SC ने जताई 3 चिंताएं, कहा- बेंच पर बैठने के बाद हमारा कोई धर्म नहीं
Supreme Court (Waqf (Amendment) Act 2025): वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज गुरुवार (17 अप्रैल) को भी सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ वक्फ कानून पर सुनवाई कर रहे हैं। संभावनाएं हैं कि आज वक्फ कानून को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया जा सकता है।
चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने वक्फ कानून की याचिकाओं पर नोटिस जारी करने और एक संक्षिप्त आदेश पारित करने के लिए तैयार थी। लेकिन केंद्र और कुछ राज्यों ने अंतरिम आदेश पारित करने से पहले अपनी दलीलें पेश करने के लिए समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को दोपहर 2 बजे मामले की सुनवाई करेगी। इससे पहले बुधवार 16 अप्रैल को इसपर सुनवाई हुई...इस दौरान 70 मिनट की जिरह हुई। कोर्ट ने क्फ कानून को लेकर केंद्र सरकार से तीखे सवाल भी किए हैं।

वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जताईं 3 चिंताएं
वक्फ कानून पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने तीन चिंताएं जताई हैं। सुप्रीम कोर्ट की पहली चिंता, वक्फ बाय यूजर संपत्तियों के डिनोटिफेकेशन, दूसरी चिंता, वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिमों का बहुमत सदस्य होना और तीसरी चिंता, विवादित वक्फ संपत्ति पर कलेक्टर द्वारा जांच लंबित रहने तक यह घोषणा कि उसे वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा।
इन तीन संसोधनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश आ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने अतंरिम आदेश जारी करने से पहले अपनी दलीलें रखने का समय मांगा है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की सुनवाई आगे बढ़ाई है।
इन 3 मुद्दों पर आ सकता है सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश!
सुप्रीम कोर्ट तीन मुद्दों पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अंतरिम आदेश जारी करेगा। पहला सवाल है,- क्या वक्फ संपत्तियों को डिनोटिफाइड की अनुमति मिलनी चाहिए? दूसरा सवाल- क्या विवाद की स्थिति में कलेक्टर के अधिकारों पर रोक लगनी चाहिए? तीसरा सवाल- क्या वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना उचित है?...इन्ही तीनों मुद्दों पर केंद्र सरकार और वक्फ कानून के विरोध में याचिका दायर करने वालों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करेगा।
चीफ जस्टिस ने केंद्र सरकार से कहा- जब हम बेंच पर बैठते हैं तो हमारा कोई धर्म नहीं होता
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के समर्थन में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई एक उपमा पर कड़ा संज्ञान लिया और तर्क दिया कि इस तर्क के मुताबिक हिंदू न्यायाधीशों की पीठ को वक्फ से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए।
पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार और के वी विश्वनाथन की पीठ वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों पर सवाल उठा रही थी, जो केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों के नामांकन की अनुमति देता है। इस दौरान चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा, ''जब हम बेंच पर बैठते हैं, तो हम अपना धर्म भूल जाते हैं। हम पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष हैं। हमारे लिए एक पक्ष या दूसरा पक्ष एक जैसा है।"
सीजेआई ने केंद्र सरकार से कहा, "क्या आप सुझाव दे रहे हैं कि मुस्लिमों सहित अल्पसंख्यकों को भी हिंदू धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने वाले बोर्डों में शामिल किया जाना चाहिए? कृपया इसे खुलकर बताएं।"
सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से पेश होते हुए प्रावधानों का बचाव किया और इस बात पर जोर दिया कि गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना सीमित है और इन निकायों की मुख्य रूप से मुस्लिम संरचना को प्रभावित नहीं करता है।
मेहता ने पीठ से कहा, "अगर वैधानिक बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की मौजूदगी पर आपत्ति स्वीकार कर ली जाती है, तो मौजूदा पीठ भी मामले की सुनवाई नहीं कर पाएगी। अगर हम उस तर्क के हिसाब से चलें तो माननीय सदस्य इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते।"












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