Voter ID Controversy: डुप्लिकेट EPIC नंबर पर नए खुलासों से किसकी खुलने लगी पोल?

Voter ID Controversy: भारत में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। ताजा विवाद डुप्लिकेट EPIC (Electors Photo Identity Card) नंबर को लेकर हो रहा है, जिसको लेकर संसद में भी मुद्दा उठाया गया है। विपक्षी दल इसे सत्ता पक्ष की साजिश करार दे रहे हैं, वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव आयोग (ECI) इस समस्या को 'विरासत में मिली पुरानी समस्या' बता रहा है।

डुप्लिकेट EPIC नंबर की समस्या नई नहीं है। यह मुद्दा पिछले 25 वर्षों से चला आ रहा है। चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 2008 से 2013 के बीच कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़ी संख्या में डुप्लिकेट EPIC कार्ड जारी किए गए थे।

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Voter ID Controversy: लंबे समय से बनी हुई है डुप्लिकेट EPIC नंबर की समस्या

अगर 2008 से 2013 में डुप्लिकेट EPIC नंबर जारी हुए तो इसका मतलब ये हुआ कि यह तब की बात है जब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए की सरकार थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या किसी एक पार्टी के कार्यकाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय चुनाव प्रक्रिया में एक व्यापक खामी की मौजूदगी का संकेत देती है।

Fake Voter Controversy: बंगाल में फर्जी वोटर बनाम बोगस वोटर की जंग, TMC के निशाने पर चुनाव आयोग

तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आरोप है कि बीजेपी पश्चिम बंगाल में फर्जी वोटरों को उतारने के लिए डुप्लिकेट EPIC नंबर का इस्तेमाल कर रही है। वहीं, बीजेपी ने भी पलटवार करते हुए दावा किया है कि राज्य में 17 लाख बोगस वोटर मौजूद हैं और उन्हें मतदाता सूची से हटाने के लिए पार्टी चुनाव आयोग तक से शिकायत कर रही है।

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ऐसे आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनाव आयोग पर भी पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने तो आयोग पर बीजेपी से मिलीभगत तक का आरोप लगा दिया है और कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।

Duplicate EPIC number Controversy: चुनाव आयोग की दलील और डुप्लिकेट EPIC नंबर को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि EPIC नंबर चाहे जो भी हो, कोई भी मतदाता केवल उसी मतदान केंद्र में वोट डाल सकता है, जहां की वोटर लिस्ट में उसका नाम दर्ज है। किसी भी दूसरे बूथ पर मतदान करना संभव नहीं है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि तीन महीने के भीतर इस समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। आयोग ने 30 अप्रैल तक सभी राजनीतिक दलों और वरिष्ठ नेताओं से सुझाव भी मांगे हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।

Voter ID Controversy: संसद में भी गूंजा है मामला

डुप्लिकेट EPIC नंबर का मामला संसद तक पहुंच चुका है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं पर चर्चा की मांग की। विपक्ष का कहना है कि महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और असम समेत कई राज्यों में वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, टीएमसी नेता सौगत रॉय ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए वोटर लिस्ट की संपूर्ण समीक्षा की मांग की है।

Voter ID Controversy: विपक्षी दलों का रुख

कांग्रेस, टीएमसी और आम आदमी पार्टी (AAP) समेत अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। आप सांसद संजय सिंह ने तो यहां तक कहा कि सरकार चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और अब पश्चिम बंगाल में भी फर्जी वोटर तैयार किए जा रहे हैं।

Voter ID Controversy: आगे क्या है दावों और विवादों के निपटारे का रास्ता ?

इस विवाद के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि डुप्लिकेट EPIC नंबर की समस्या को जल्द से जल्द निपटाया जाएगा। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो। इसके लिए मतदाता सूची की अधिक सख्त जांच होगी और उसे एक केंद्रीकृत डेटाबेस में संरक्षित किया जाएगा। (इनपुट-एजेंसियां)

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