बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए तावड़े सबसे आगे क्यों? रेस में हैं 5 और नाम, कौन पड़ेगा भारी?
भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद जेपी नड्डा को इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा इस साल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद उनका कार्यकाल भी इस साल समाप्त हो रहा है, ऐसे में पार्टी संगठन की ओर से नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश जारी है। विचार बीजेपी संगठन में रहकर लंबे समय तक संगठनात्मक ढांचे की परख और नेतृत्व क्षमता वाले पार्टी के किसी दिग्गज पदाधिकारी पर ही होगी। ऐसे में विनोद तावड़े का नाम सबसे पहले लिया जा रहा है। ऐसा नहीं ही सिर्फ एक ही नाम है, इसके अलावा पांच और नाम हैं, जो चर्चा में सबसे अधिक है।
बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम के लिए विनोद तावड़े चर्चा में है। वे वर्तमान में पार्टी के महासचिव हैं। तावड़े महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं, वे बीएल संतोष के अलावा सबसे अधिक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। तावड़े को पार्टी संगठन की अच्छी समझ है।

बीएल संतोष के अलावा जो नाम बीजेपी अध्यक्ष की रेस में हैं, उनमें सुनील बंसल, फग्गन सिंह कुलस्ते और केशव प्रसाद मौर्या का नाम शामिल है। सुनील बंसल वर्तमान में महासचिव हैं। इसके अलावा बीजेपी ने उन्हें पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और ओडिशा जैसे तीन राज्यों का प्रभारी भी नियुक्त किया है। इससे पहले सुनील बंसल उत्तर प्रदेश के महासचिव (संगठन) के रूप में कार्य कर चुके हैं। बंसल आरएसएस पृष्ठभूमि से जुड़े बीजेपी नेता हैं।
इसके अलावा फग्गन सिंह कुलस्ते का भी बीजेपी ने कुछ कम नहीं है। उनके भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर चर्चा है। कुलस्ते के राजनीतिक सफर की बात करें तो वे छह बार सांसद और केंद्र में ग्रामीण विकास व इस्पात राज्यमंत्री रह चुके हैं। कुलस्ते आदिवासी समाज से आते हैं और 80 के दशक से राजनीति में सक्रिय हैं।
कुलस्ते ने चुनावी राजनीति 1990 में शुरू की और मध्य प्रदेश की विधान सभा (1990-92) में विधायक बने थे। इसके बाद वह 1996 से 2009 तक लगातार मंडला लोकसभा सीट से जीतकर संसद चुने गए। राजनीति के शुरूआती दौर में वह गोंड समाज को एकजुट करने के लिए काम करते थे। वह 1980 में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद मध्य प्रदेश के अध्यक्ष थे। 1993 में बीजेपी ने उन्हें राज्य महासचिव बनाते हुए एसटी सेल की जिम्मेदारी दी। तीन साल बाद वह इसी सेल के राष्ट्रीय सचिव बने और 2006 से 2010 तक वह बीजेपी मध्य प्रदेश के महासचिव रहे।












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